सौरव दास और आशुतोष रांका को 8 दिन बाद मिली जमानत, दिल्ली की अदालत ने पुलिस की हिरासत बढ़ाने की मांग ठुकराई; 50-50 हजार रुपये के बॉन्ड पर तत्काल रिहाई का आदेश
दिल्ली पुलिस ने आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी. लेकिन कोर्ट ने दोनों की रिहाई का आदेश जारी किया.
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को आज जेल से रिहा कर दिया गया। जेल के बाहर दोनों को लेने के लिए सीजेपी नेता और समर्थक पहुंचे। कोर्ट में दोनों को लिखित माफीनामा और शपथ पत्र देने के बाद जमानत पर छोड़ा गया है
नई दिल्ली। आशुतोष रांका और सौरव दास को आखिरकार आठ दिन बाद जेल से रिहाई मिल गई। दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने 21 अक्टूबर 2026 को दोनों के मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की पुलिस की मांग खारिज कर दी। अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद तिहाड़ जेल के अधीक्षक को रिहाई वारंट भेजने के निर्देश दिए गए।
दोनों की रिहाई का आदेश ऐसे समय आया, जब पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताते हुए उनकी न्यायिक हिरासत आगे बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस का तर्क था कि दोनों के आचरण, मीडिया और अदालत में दिए गए बयानों के बीच कथित अंतर तथा उनके रुख में बदलाव को देखते हुए स्थिति को लेकर आशंका बनी हुई है। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध परिस्थितियों और दोनों की ओर से दिए गए लिखित आश्वासनों पर विचार करने के बाद आगे हिरासत में रखने को आवश्यक नहीं माना।
आठ दिन तक न्यायिक हिरासत में रहे दोनों, पुलिस ने फिर मांगा था समय
मामले में आशुतोष रांका और सौरव दास को 14 अक्टूबर 2026 को पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद उनकी हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी गई, जो 21 अक्टूबर तक निर्धारित थी। इस दौरान दोनों तिहाड़ जेल में बंद रहे।
21 अक्टूबर को जब हिरासत की निर्धारित अवधि समाप्त होने वाली थी, तब जांच अधिकारी ने अदालत में नया आवेदन पेश किया। इसमें दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई थी। पुलिस ने अपने पक्ष में दलील दी कि दोनों के व्यवहार और उनके अलग-अलग मंचों पर दिए गए बयानों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। पुलिस के अनुसार, उनके रुख में कथित बदलाव के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, अदालत ने पुलिस की इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलों, प्रस्तुत आश्वासनों और निवारक कार्रवाई के उद्देश्य पर विचार करते हुए रिहाई का आदेश जारी किया।
मीडिया में दिए गए बयान पर अदालत में बिना शर्त मौखिक माफी
सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल ले जाते समय मीडिया को दिए गए एक बयान का मुद्दा भी सामने आया। आरोप था कि इस बयान से स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत की गरिमा प्रभावित हुई थी। इस विषय पर सुनवाई के दौरान बिना शर्त मौखिक माफी पेश की गई।
अदालत की कार्यवाही में यह पहलू महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि मामले में केवल हिरासत की अवधि ही नहीं, बल्कि दोनों के आचरण और भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े सवाल भी विचाराधीन थे।
दोनों की ओर से अदालत में दिए गए आश्वासनों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि भविष्य में उनके किसी भी कदम से शांति व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी और वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। अदालत ने इन आश्वासनों को रिहाई के निर्णय पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना।
अदालत में लिखित आश्वासन, शांति भंग नहीं करने का भरोसा
सुनवाई के दौरान आशुतोष रांका और सौरव दास ने स्वेच्छा से लिखित आश्वासन दिए। इन आश्वासनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में संवैधानिक दायरे में रहकर ही किसी भी गतिविधि में शामिल होने की बात कही गई।
दोनों ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करेंगे। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति अपना विश्वास भी व्यक्त किया।
इसके अलावा, दोनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से संबंधित एक महत्वपूर्ण आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिसूचित सूची से हटाए जाने तक वहां प्रदर्शन करने का आह्वान नहीं करेंगे।
दोनों ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में होने वाले किसी भी प्रदर्शन को संविधान के दायरे में रखा जाएगा। यानी किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।
अदालत के समक्ष दिए गए इन आश्वासनों से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया कि आगे ऐसी कोई गतिविधि नहीं की जाएगी, जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हो।
अदालत ने कहा—इस स्तर पर आगे हिरासत जरूरी नहीं
अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए माना कि इस स्तर पर आशुतोष रांका और सौरव दास को आगे न्यायिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है। आदेश के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135(3) के तहत निवारक कार्रवाई के उद्देश्य को निजी मुचलकों, जमानती बॉन्ड और लिखित आश्वासनों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।
निवारक कार्रवाई का उद्देश्य संभावित शांति भंग या कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं को रोकना होता है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति से यह सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाता है कि वह भविष्य में शांति बनाए रखेगा और कानून का उल्लंघन नहीं करेगा।
इस मामले में अदालत ने उपलब्ध विकल्पों पर विचार करते हुए हिरासत बढ़ाने के बजाय बॉन्ड और लिखित आश्वासनों के आधार पर रिहाई का रास्ता चुना। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले की कार्यवाही समाप्त हो गई है। दोनों को अदालत की ओर से तय शर्तों का पालन करना होगा और अगली सुनवाई में उपस्थित होना होगा।
50-50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहाई, तिहाड़ जेल भेजा गया वारंट
अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के लिए दोनों की ओर से बॉन्ड जमा किए गए और जमानतदारों के दस्तावेजों की प्रथम दृष्टया जांच की गई।
इसके बाद अदालत ने तत्काल रिहाई का आदेश जारी किया। आदेश के अनुपालन के लिए तिहाड़ जेल के अधीक्षक को रिहाई वारंट भेजा गया।
इस फैसले के बाद दोनों को आठ दिन की हिरासत के बाद जेल से बाहर आने का रास्ता मिला। हालांकि, रिहाई कुछ शर्तों के अधीन है और उन्हें आगे की न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना होगा।
रिहाई के साथ अदालत ने तय कीं सख्त शर्तें
अदालत ने रिहाई का आदेश देते समय कई निर्देश भी जारी किए हैं। इन शर्तों का उद्देश्य जमानत की प्रक्रिया की निगरानी करना और भविष्य में किसी तरह की कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या को रोकना है।
अदालत की प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
जमानतदारों का सत्यापन: जांच अधिकारी को अगली सुनवाई तक जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
हर सुनवाई पर उपस्थिति: आशुतोष रांका और सौरव दास को प्रत्येक सुनवाई की तारीख पर अदालत में उपस्थित होना होगा।
जमानतदारों की उपस्थिति: दोनों के जमानतदारों को भी सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर अदालत में उपस्थित रहना होगा।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना: दोनों को शांति व्यवस्था बनाए रखनी होगी और ऐसा कोई काम नहीं करना होगा, जिससे शांति भंग होने की आशंका पैदा हो।
लिखित आश्वासनों का पालन: अदालत में स्वेच्छा से दिए गए लिखित आश्वासनों का सख्ती से पालन करना होगा।
इन निर्देशों के तहत दोनों की गतिविधियों और जमानत की शर्तों के अनुपालन पर आगे भी नजर रखी जाएगी। जांच अधिकारी को जमानतदारों के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिससे अदालत को रिहाई की प्रक्रिया के अनुपालन की जानकारी मिल सके।
23 अक्टूबर को अगली सुनवाई, मामले पर बनी रहेगी नजर
आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में अदालत के निर्देशों के अनुसार जमानतदारों के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट पेश की जानी है। दोनों को भी निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित रहना होगा।
फिलहाल अदालत ने पुलिस की ओर से न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए दोनों को बॉन्ड और लिखित आश्वासनों के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट शर्तों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि दोनों कानून-व्यवस्था बनाए रखें और भविष्य की गतिविधियां संवैधानिक दायरे में हों।
इस फैसले से दोनों को जेल से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है। अगली सुनवाई में अदालत के निर्देशों के अनुपालन और प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट पर आगे की कार्यवाही निर्भर करेगी।
फिलहाल, आठ दिन बाद मिली जमानत के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास जेल से बाहर आ गए हैं। अदालत ने उनकी रिहाई के साथ यह शर्त भी रखी है कि वे कानून का पालन करेंगे, शांति बनाए रखेंगे और आगे की प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहेंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस