BJP को बड़ा झटका! पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने बेटी संग थामा सपा का दामन, अखिलेश यादव ने दिलाई सदस्यता
आखिरकार बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप फिर से समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। कुछ दिन पहले उन्होंने इसका संकेत भी दिया था। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दल बदल का गेम शुरू हो गया है. इसी कंडी में बीजेपी को बरेली से बड़ा झटका लगा है. बरेली की आंवला लोकसभा सीट से बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी और समर्थकों के साथ सामाजवादी पार्टी की सदस्यता ली है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब उन्होंने पार्टी बदली हो. उन्होंने लगभग सभी पार्टियों में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई है.
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। बीजेपी के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र कुमार कश्यप मंगलवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी को पार्टी की सदस्यता दिलाई। धर्मेंद्र कश्यप के सपा में शामिल होने के साथ ही पिछले कुछ समय से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है।
धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने को उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर रोहिलखंड क्षेत्र में कश्यप समुदाय के बीच उनकी राजनीतिक पकड़ को देखते हुए उनके इस फैसले के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी से उनका अलग होना पार्टी के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं सपा इसे अपने संगठन और सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।
राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं
धर्मेंद्र कश्यप के बीजेपी छोड़ने की अटकलें उस समय तेज हुई थीं, जब उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए बीजेपी की सूची सामने आई थी। धर्मेंद्र कश्यप को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है, लेकिन उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से बरेली जिले के राज्य मंत्री धर्मपाल सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा झारखंड के पूर्व राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया। सूची सामने आने के बाद धर्मेंद्र कश्यप की राजनीतिक सक्रियता और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
7 अक्टूबर को धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर समुद्र किनारे डूबते सूरज की एक तस्वीर पोस्ट की थी। इस तस्वीर के साथ उन्होंने ‘टाटा बाय-बाय’ लिखा था। उनकी इस पोस्ट को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया और तभी से यह चर्चा तेज हो गई थी कि वह बीजेपी से अलग होकर समाजवादी पार्टी में वापस जा सकते हैं।
मंगलवार को सपा में शामिल होने के बाद इन अटकलों पर आखिरकार मुहर लग गई।
अखिलेश यादव ने कराया पार्टी में स्वागत
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र कश्यप का पार्टी में स्वागत किया और उन्हें सदस्यता दिलाई। इस दौरान धर्मेंद्र कश्यप की बेटी भी उनके साथ मौजूद रहीं और उन्होंने भी समाजवादी पार्टी का दामन थामा।
अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र कश्यप के सपा में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से समाजवादी पार्टी और मजबूत होगी। पार्टी के लिए यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि धर्मेंद्र कश्यप लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहे हैं और क्षेत्रीय स्तर पर उनका मजबूत राजनीतिक आधार रहा है।
धर्मेंद्र कश्यप की सपा में वापसी को उनके पुराने राजनीतिक सफर से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वह पहले समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं और बाद में बीजेपी में शामिल हुए थे। अब करीब एक दशक से अधिक समय बाद उन्होंने दोबारा सपा का रुख किया है।
बीजेपी सरकार पर जमकर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। कश्यप ने दावा किया कि प्रदेश की जनता खराब कानून-व्यवस्था से परेशान है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बुलडोजर की कार्रवाई गरीबों को निशाना बनाती है। उन्होंने अपनी जाति के लोगों को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
सपा में शामिल होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप के तेवरों से साफ संकेत मिला कि आने वाले समय में वह बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल सकते हैं। खासतौर पर अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में वह सपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
दो बार आंवला से सांसद रह चुके हैं धर्मेंद्र कश्यप
धर्मेंद्र कुमार कश्यप उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड क्षेत्र में कश्यप समुदाय के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। उन्होंने मई 2013 में समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था।
बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें आंवला लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आंवला सीट से जीत दर्ज की और पहली बार बीजेपी के टिकट पर सांसद बने। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने आंवला सीट पर जीत हासिल की।
इस तरह धर्मेंद्र कश्यप लगातार दो बार लोकसभा सांसद रहे। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बताया गया कि इस चुनाव में वह बेहद कम अंतर से चुनाव हार गए थे।
2024 के चुनाव के बाद भी धर्मेंद्र कश्यप बीजेपी की राजनीति में सक्रिय रहे। राज्यसभा जाने की संभावनाओं के बीच उनका नाम भी चर्चा में था, लेकिन पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की सूची में नाम नहीं आने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सवाल खड़े हो गए थे।
विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण पर असर
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले धर्मेंद्र कश्यप का सपा में शामिल होना दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सपा जहां इसे अपने पक्ष में सामाजिक और राजनीतिक आधार मजबूत करने के मौके के तौर पर देख रही है, वहीं बीजेपी के लिए यह अपने पुराने नेता और दो बार के सांसद को खोने वाला घटनाक्रम है।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक प्रभाव मुख्य रूप से रोहिलखंड क्षेत्र में माना जाता है। ऐसे में उनके सपा में जाने के बाद इस क्षेत्र में पार्टी के सामाजिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।
सपा पहले से ही पिछड़े वर्ग और विभिन्न सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में कश्यप समुदाय से आने वाले एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे का पार्टी में शामिल होना उसके लिए अहम माना जा रहा है।
वहीं बीजेपी के सामने चुनौती यह होगी कि वह धर्मेंद्र कश्यप के पार्टी छोड़ने के बाद क्षेत्र में अपने संगठन और सामाजिक आधार को कैसे मजबूत बनाए रखती है। खासकर उन इलाकों में जहां धर्मेंद्र कश्यप लंबे समय से राजनीति करते रहे हैं, वहां उनके सपा में जाने का असर देखने को मिल सकता है।
सपा को मिल सकता है राजनीतिक फायदा
धर्मेंद्र कश्यप की सपा में वापसी को सिर्फ एक नेता के दल बदलने के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उनके दो बार सांसद रहने और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के कारण इस घटनाक्रम को व्यापक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला पहले से ही महत्वपूर्ण रहने वाला है। ऐसे में चुनाव से कुछ समय पहले नेताओं का दल बदलना राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
धर्मेंद्र कश्यप के सपा में आने से पार्टी उनके अनुभव और क्षेत्रीय संपर्कों का इस्तेमाल चुनावी रणनीति में कर सकती है। वहीं धर्मेंद्र कश्यप के लिए भी सपा में वापसी अपने पुराने राजनीतिक आधार को दोबारा सक्रिय करने का अवसर हो सकती है।
फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप के सपा में शामिल होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद शुरू हुई अटकलों का अब पटाक्षेप हो चुका है। बीजेपी से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी का रुख कर लिया है।
अब देखना होगा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी भूमिका क्या रहती है और उनके सपा में शामिल होने का रोहिलखंड क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस