महामंडलेश्वर के आश्रम पर चला बुलडोजर, 4 मंजिला इमारत जमींदोज: सिंहस्थ की जमीन पर अवैध निर्माण का आरोप; उज्जैन में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

उज्जैन में सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान के तहत नगर निगम ने जूना अखाड़े के हरियाणा सेवा आश्रम के जी+3 भवन को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, पहले दो नोटिस दिए गए थे। प्रशासन ने कार्रवाई को हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप बताया है।

महामंडलेश्वर के आश्रम पर चला बुलडोजर, 4 मंजिला इमारत जमींदोज: सिंहस्थ की जमीन पर अवैध निर्माण का आरोप; उज्जैन में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी है। शुक्रवार सुबह नगर निगम की टीम ने जूना अखाड़े से जुड़े महामंडलेश्वर ज्योति गिरि के हरियाणा सेवा आश्रम के चार मंजिला होटलनुमा भवन को ढहा दिया। कार्रवाई के लिए चार पोकलेन और एक जेसीबी मशीन मौके पर पहुंची..

उज्जैन। सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के बीच उज्जैन में सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार तड़के नगर निगम की टीम ने कर्कराज पार्किंग और नृसिंहघाट क्षेत्र के समीप स्थित जूना अखाड़े के हरियाणा सेवा आश्रम पर बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन ने यहां बने चार मंजिला जी+3 भवन को बुलडोजर और पोकलेन मशीनों की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह भवन महामंडलेश्वर ज्योतिगिरिजी महाराज के आश्रम परिसर में बना हुआ था।

कार्रवाई के दौरान नगर निगम और पुलिस का भारी अमला मौके पर मौजूद रहा। प्रशासन ने किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले से सुरक्षा के इंतजाम किए थे। तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में काफी देर तक हलचल बनी रही।

सुबह 5 से 6 बजे के बीच पहुंचा प्रशासनिक अमला

नगर निगम के भवन अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई शुक्रवार सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच शुरू की गई। टीम ने पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंचकर निर्माण को हटाने का काम शुरू किया। भवन को गिराने के लिए चार पोकलेन मशीनों और एक जेसीबी को लगाया गया था।

चार मंजिला होने के कारण भवन को गिराने में विशेष मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। मशीनों ने धीरे-धीरे भवन के अलग-अलग हिस्सों को तोड़ना शुरू किया। कुछ ही समय में इमारत का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया।

कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी और पुलिस बल मौके पर तैनात रहे। प्रशासन की मौजूदगी में पूरे अभियान को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया गया।

सिंहस्थ के लिए आरक्षित जमीन पर निर्माण का आरोप

प्रशासन के मुताबिक, आश्रम परिसर में बना यह निर्माण सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर किया गया था। अधिकारियों ने इसे अवैध निर्माण मानते हुए इसे हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन का इस्तेमाल केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जा सकता है और वहां बिना अनुमति किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना रहती है। ऐसे में प्रशासन के सामने मेला क्षेत्र, पार्किंग, आवागमन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध रखना बड़ी चुनौती है। इसी वजह से सिंहस्थ के लिए आरक्षित जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान चलाया जा रहा है।

दो बार जारी किए गए थे नोटिस

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, निर्माण हटाने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस भी जारी किए गए थे। प्रशासन की ओर से दो बार आधिकारिक नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। नोटिस के माध्यम से निर्माण को स्वयं हटाने के लिए समय दिया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इसके बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए निर्माण को ध्वस्त करने का निर्णय लिया।

प्रशासन ने यह भी बताया कि कार्रवाई हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की गई है। नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने और स्वेच्छा से निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर भवन को गिरा दिया।

कार्रवाई से पहले पुलिस बल रहा तैनात

इतने बड़े निर्माण को गिराने के दौरान किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो, इसके लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। नगर निगम के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर पूरे क्षेत्र की निगरानी की।

तड़के कार्रवाई शुरू होने के कारण आसपास के लोगों को भी इसकी जानकारी बाद में हुई। मशीनों की आवाज और भारी प्रशासनिक अमले की मौजूदगी से क्षेत्र में हलचल दिखाई दी।

प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता दी। मशीनों को निर्धारित तरीके से संचालित कराया गया और भवन को चरणबद्ध तरीके से गिराया गया।

सिंहस्थ भूमि को लेकर प्रशासन सख्त

उज्जैन में सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन को लेकर प्रशासन पिछले कुछ समय से लगातार सख्ती दिखा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर किए गए किसी भी अवैध निर्माण को हटाया जाएगा।

सिंहस्थ महापर्व उज्जैन की सबसे बड़ी धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा होता है। मेला क्षेत्र में पार्किंग, साधु-संतों के शिविर, सड़क, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के लिए बड़े भू-भाग की जरूरत होती है।

ऐसे में आरक्षित भूमि पर स्थायी निर्माण होने से भविष्य में मेला व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी को देखते हुए प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को महत्वपूर्ण मान रहा है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

सिंहस्थ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उज्जैन में पहले भी कई स्थानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। प्रशासन ने अलग-अलग स्थानों पर किए गए अवैध निर्माणों और कब्जों को चिन्हित कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की है।

इसी अभियान के तहत मंदिर, मस्जिद और अन्य निर्माणों के उन हिस्सों को भी हटाया गया है, जिन्हें प्रशासन ने सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन या निर्धारित मानकों के विपरीत पाया था। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और नियमों के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री के घर का हिस्सा भी हटाया गया

सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का असर आम लोगों से लेकर प्रभावशाली लोगों से जुड़े निर्माणों तक देखने को मिला है। प्रशासन की कार्रवाई में मुख्यमंत्री से जुड़े आवास के हिस्से को भी हटाए जाने की बात सामने आई है।

इससे प्रशासन की कार्रवाई को लेकर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि सिंहस्थ की आरक्षित जमीन को खाली कराने के अभियान में किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। हालांकि अलग-अलग मामलों में निर्माण की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई के आधार अलग हो सकते हैं।

आश्रम की चार मंजिला इमारत बनी चर्चा का विषय

जूना अखाड़े के हरियाणा सेवा आश्रम में बनी चार मंजिला इमारत कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा का विषय बन गई। प्रशासन के अनुसार, भवन का निर्माण होटलनुमा स्वरूप में किया गया था और इसे सिंहस्थ के लिए सुरक्षित जमीन पर बनाया गया था।

भवन काफी बड़ा होने के कारण इसे गिराने के लिए कई भारी मशीनों को मौके पर लगाया गया। पोकलेन मशीनों ने भवन के ऊपरी हिस्सों को गिराने के बाद धीरे-धीरे नीचे के हिस्से को भी ध्वस्त किया। कार्रवाई पूरी होने के बाद मौके पर भवन का मलबा दिखाई दिया।

आगे भी जारी रहेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान

नगर निगम और प्रशासन ने साफ किया है कि सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक, जिन स्थानों पर अवैध कब्जे या बिना अनुमति निर्माण पाए जाएंगे, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की प्राथमिकता सिंहस्थ से पहले मेला क्षेत्र को व्यवस्थित करना है। इसके लिए सड़क, पार्किंग, घाट, श्रद्धालुओं की आवाजाही और साधु-संतों के शिविरों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए आरक्षित भूमि का संरक्षण बेहद जरूरी है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो भविष्य में आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

कार्रवाई के बाद प्रशासन का स्पष्ट संदेश

हरियाणा सेवा आश्रम की चार मंजिला इमारत पर हुई कार्रवाई के बाद प्रशासन ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सिंहस्थ के नाम पर आरक्षित जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण या कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शुक्रवार तड़के हुई इस कार्रवाई में भारी मशीनरी और पुलिस बल की मौजूदगी ने अभियान की गंभीरता को भी दिखाया। प्रशासन का कहना है कि पहले नोटिस की प्रक्रिया अपनाई जा रही है और उसके बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

आने वाले दिनों में उज्जैन के अन्य सिंहस्थ क्षेत्रों में भी ऐसे निर्माणों की जांच और कार्रवाई की संभावना है। प्रशासन का लक्ष्य सिंहस्थ शुरू होने से पहले आरक्षित जमीन को पूरी तरह व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त करना है, ताकि महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और साधु-संतों को किसी तरह की परेशानी न हो।