BJP ने इमरजेंसी को भी पीछे छोड़ा, CJP नेता आशुतोष रांका का आरोप; दिल्ली में हिरासत और ट्रेनों के रद्द होने पर उठाए सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका ने प्रेस क्लब में रविवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि आजाद भारत में नरेंद्र मोदी जैसा डरा हुआ प्रधानमंत्री नहीं देखा है।

BJP ने इमरजेंसी को भी पीछे छोड़ा, CJP नेता आशुतोष रांका का आरोप; दिल्ली में हिरासत और ट्रेनों के रद्द होने पर उठाए सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने कहा- नरेंद्र मोदी जैसा डरपोक, कायर पीएम नहीं देखा. 72 घंटों में तानाशाही का नँगा नाच देखा, हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया.

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका ने रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने, ट्रेनों के रद्द होने और कथित तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित किए जाने के मुद्दे उठाए। रांका ने मौजूदा हालात की तुलना 1975 में लगाए गए आपातकाल से करते हुए दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में देश में ऐसे हालात बने हैं, जिन्हें वे आपातकाल से भी अधिक गंभीर मानते हैं।

CJP नेता के ये बयान ऐसे समय सामने आए हैं, जब पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। पार्टी के मुताबिक, शनिवार को प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान उसके नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। रिहाई के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई, संचार उपकरणों की जब्ती और विरोध प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े सवाल उठाए।

आशुतोष रांका ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में विरोध की आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लिया गया और दिल्ली में पिछले 24 घंटों के दौरान आपातकाल जैसे हालात पैदा हुए।

रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे महान प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, लेकिन उनके मुताबिक हालिया घटनाक्रम सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने 1975 के आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में भी ट्रेनों को बंद करने जैसी स्थिति नहीं आई थी, जबकि मौजूदा घटनाक्रम में बड़ी संख्या में ट्रेनों के रद्द होने की बात सामने आई है।

हालांकि, आपातकाल से मौजूदा स्थिति की तुलना आशुतोष रांका का राजनीतिक आकलन है। उनके बयान में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

ट्रेनों के रद्द होने को लेकर भी सरकार पर निशाना

आशुतोष रांका ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में सैकड़ों ट्रेनों के रद्द होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए किए गए सुरक्षा इंतजामों का असर आम लोगों की आवाजाही पर भी पड़ा।

दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाए गए और रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं। रेलवे से जुड़ी रिपोर्टों में बताया गया कि कई यात्री ट्रेनों को रद्द किया गया या उनके समय में बदलाव किया गया। बाद में रेल सेवाओं को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

रांका ने कहा कि इन घटनाओं से यह सवाल उठता है कि क्या किसी राजनीतिक या सामाजिक विरोध को रोकने के लिए आम नागरिकों की आवाजाही प्रभावित करना उचित है। उन्होंने दावा किया कि अब CJP की लड़ाई केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका भी उनके विरोध का विषय बन गई है।

ज्ञानेश कुमार पर पक्षपात के आरोप

CJP नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। आशुतोष रांका ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी देश के लोकतंत्र की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना है। उनके मुताबिक, आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए।

रांका ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार केंद्र सरकार के नेतृत्व के इशारों पर काम कर रहे हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां जताई गई हैं। पार्टी और आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष और संबंधित आधिकारिक आंकड़े अलग से देखना जरूरी है।

सौरव दास ने फोन जब्त करने पर उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस की कार्रवाई के दौरान मोबाइल फोन जब्त किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि फोन जब्त करते समय उन्हें कोई जब्ती मेमो नहीं दिया गया।

दास ने कहा कि पार्टी के नेताओं को आशंका है कि उनके मोबाइल फोन हैक या क्लोन किए गए हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उपकरणों में दस्तावेज या अन्य सामग्री डाली जा सकती है, जिन्हें भविष्य में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाए।

दास ने कहा कि उनकी यह आशंका उन घटनाओं के आधार पर है, जिनमें अन्य कार्यकर्ताओं और एक्टिविस्ट्स के डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, फोन हैक या क्लोन किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने आए बिना उन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच या संबंधित तकनीकी साक्ष्य ही स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

CJP नेताओं ने कहा कि हिरासत और फोन जब्त किए जाने की घटनाओं को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों और उनकी निजी डिजिटल जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अभिजीत दिपके की दादी के निधन का मामला भी उठा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP नेता अभिजीत दिपके की दादी के निधन का मामला भी चर्चा में आया। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत में रहने के दौरान दिपके को अपने परिवार से संपर्क करने और गांव में मौजूद रिश्तेदार से बात करने में कठिनाई हुई।

CJP की ओर से बताया गया कि दिपके ने अपने परिवार की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। पार्टी के मुताबिक, उन्होंने पुलिस से अपने चचेरे भाई से बात करने की अनुमति मांगी, ताकि उन्हें दादी के निधन और परिवार की परिस्थितियों की जानकारी मिल सके।

पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस दौरान भी पुलिस की मौजूदगी और कैमरों के कारण स्थिति संवेदनशील बनी रही। उन्होंने पुलिस के व्यवहार को अमानवीय बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को परिवार में हुई मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आवश्यक संपर्क करने का अवसर मिलना चाहिए।

CJP के अनुसार, रिहाई के बाद अभिजीत दिपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अपने पैतृक गांव रवाना हुए। पार्टी ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि व्यक्तिगत दुख की इस घड़ी में संगठन उनके साथ खड़ा है।

दिपके के मामले को उठाते हुए पार्टी नेताओं ने कहा कि वह अपने निजी जीवन को सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं बनाना चाहते थे। इसके बावजूद, पार्टी ने इसे हिरासत के दौरान मानवीय व्यवहार और परिवार से संपर्क के अधिकार से जुड़ा सवाल बताया।

रिहाई के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान

CJP नेताओं अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद रविवार को रिहा किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें एक वर्ष तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया। पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी भी दी है।

रिहाई के बाद पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह अपनी मांगों से पीछे हटने वाली नहीं है। CJP का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर उसका विरोध जारी रहेगा।

आशुतोष रांका ने कहा कि पार्टी इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अपनाए गए तरीकों पर देश में चर्चा होनी चाहिए।

लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था पर बहस तेज

CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई, सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध और चुनाव आयोग की निष्पक्षता जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर CJP नेता कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित चिंताओं के आधार पर प्रतिबंध लगाए थे।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। साथ ही, हिरासत के दौरान लोगों के अधिकारों, मोबाइल फोन जब्त करने की प्रक्रिया और परिवार से संपर्क की सुविधा को लेकर उठे आरोपों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है।

फिलहाल CJP ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने आंदोलन को जारी रखेगी। आने वाले दिनों में इस मामले पर सरकार, दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग की ओर से आने वाली प्रतिक्रियाएं तथा संबंधित कानूनी कार्यवाही इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।