प्रेमानंद महाराज की किडनी की सरकारी जांच की मांग, आशुतोष ब्रह्मचारी ने DM को लिखी चिट्ठी; 25 वर्षीय शिष्य की मौत के बाद उठे सवाल

संत प्रेमानंद किडनी जांच: आशुतोष ब्रह्मचारी ने संत प्रेमानंद की किडनी की सरकारी जांच की मांग उठाई है। दीपक लोधी की आत्महत्या के बाद उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। 2024 में भी प्रार्थना-पत्र भेजा था।

प्रेमानंद महाराज की किडनी की सरकारी जांच की मांग, आशुतोष ब्रह्मचारी ने DM को लिखी चिट्ठी; 25 वर्षीय शिष्य की मौत के बाद उठे सवाल

25 वर्षीय शिष्य दीपक लोधी की मौत के बाद निष्पक्ष जांच की मांग तेज

2024 में भी प्रेमानंद महाराज की किडनी की सरकारी जांच की मांग उठी थी

शव परीक्षण, मेडिकल रिपोर्ट, CCTV और मोबाइल साक्ष्यों की जांच की मांग

राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े पुराने विवादों की जांच की भी मांग

वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज के 25 वर्षीय शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिलाधिकारी (DM) को पत्र भेजकर संत प्रेमानंद महाराज की किडनी से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी दावों की सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की भी मांग रखी है।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने पत्र में वृंदावन स्थित श्री राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े विभिन्न मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए वर्ष 2024 में उठाए गए सवालों और शिकायतों को भी जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए।

2024 में भी उठाया था किडनी की जांच का मुद्दा

आशुतोष ब्रह्मचारी के मुताबिक, उन्होंने जुलाई 2024 में तत्कालीन जिलाधिकारी को पत्र भेजा था। इसमें अनिरुद्ध कुमार पांडे उर्फ संत प्रेमानंद की किडनी खराब होने संबंधी दावों की सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराने की मांग की गई थी। साथ ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी रखी गई थी।

उनका कहना है कि उस समय भी आश्रम से जुड़े कई अन्य मुद्दे उठाए गए थे। इनमें आश्रम की संपत्ति, वाहनों और सार्वजनिक मार्गों पर कथित अतिक्रमण से संबंधित शिकायतें शामिल थीं। अब दीपक लोधी की मौत के बाद उन्होंने पुराने सवालों को भी नए सिरे से जांच के दायरे में लाने की मांग की है।

शिष्य की मौत के बाद जांच की मांग

25 वर्षीय दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद आश्रम से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है। उनकी मांग केवल यह है कि यदि किसी मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी जांच स्वतंत्र और विशेषज्ञ स्तर पर कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।

शव परीक्षण और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की मांग

पत्र में दीपक लोधी की मृत्यु से जुड़े शव परीक्षण और चिकित्सकीय दस्तावेजों की विशेषज्ञ जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा विधिविज्ञान से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की बात कही गई है।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने मामले में CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि आधुनिक जांच तकनीक के माध्यम से घटनाक्रम की पूरी कड़ी को समझने की कोशिश की जानी चाहिए।

आश्रम से जुड़े पुराने मामलों की भी जांच हो

पत्र में श्री राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े पूर्व विवादों, कथित उत्पीड़न और धमकी की शिकायतों को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है। आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि यदि पहले भी किसी प्रकार की शिकायतें प्रशासन के सामने आई थीं, तो वर्तमान मामले की जांच के दौरान उनके रिकॉर्ड को भी देखा जाना चाहिए।

उनका तर्क है कि किसी भी निष्पक्ष जांच में केवल मौजूदा घटना ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े पुराने तथ्य और शिकायतें भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए प्रशासन को सभी उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच करनी चाहिए।

संपत्ति और वाहनों की जांच की मांग

आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने पुराने पत्र में आश्रम से संबंधित करोड़ों रुपये की संपत्ति और वाहनों की जांच की मांग किए जाने का भी उल्लेख किया है। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आश्रम से संबंधित संपत्तियों और अन्य संसाधनों का रिकॉर्ड क्या है।

इसके साथ ही सार्वजनिक मार्गों पर कथित अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया गया है। उनका कहना है कि इन शिकायतों की भी प्रशासनिक स्तर पर जांच होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार का अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

बिना जांच किसी को दोषी ठहराने से इनकार

आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने पत्र में यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि वह किसी व्यक्ति को पहले से दोषी घोषित करने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य तथ्य सामने लाना होना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी पक्षों के बयान लिए जाएं, मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच हो तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी सुरक्षित कर उनका वैज्ञानिक विश्लेषण कराया जाए। इससे किसी भी तरह की अटकलों के बजाय तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

सरकारी अस्पताल में जांच की मांग

संत प्रेमानंद की किडनी को लेकर पहले से किए गए दावों की जांच के लिए आशुतोष ब्रह्मचारी ने सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी चिकित्सा विशेषज्ञों की रिपोर्ट सामने आने से इस संबंध में उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिल सकता है।

हालांकि, किडनी की बीमारी या किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति से संबंधित किसी भी निष्कर्ष के लिए अधिकृत चिकित्सकीय रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच ही निर्णायक हो सकती है। केवल आरोप या दावों के आधार पर किसी व्यक्ति की बीमारी अथवा स्वास्थ्य स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद

अब इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दिए गए पत्र में अलग-अलग पहलुओं की जांच की मांग की गई है। इनमें संत प्रेमानंद की किडनी से संबंधित पुराने दावे, दीपक लोधी की मौत, मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्य, CCTV व मोबाइल डेटा तथा आश्रम से जुड़ी पुरानी शिकायतें शामिल हैं।

मामले में आगे प्रशासन किस स्तर की जांच कराता है और किन बिंदुओं को जांच के दायरे में शामिल करता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल 25 वर्षीय शिष्य की मौत के बाद उठी जांच की मांग ने श्री राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े पुराने विवादों और शिकायतों को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।