दिग्विजय सिंह का बड़ा हमला- बोले: 2024 में BJP विधायक ने दी थी जहरीली शराब की चेतावनी, कार्रवाई होती तो टल सकती थीं बंडा में 30 मौतें

मध्य प्रदेश में सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में संदिग्ध अवैध शराब के सेवन से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के कार्यालय जिले के SP अनुराग सुजानिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

दिग्विजय सिंह का बड़ा हमला- बोले: 2024 में BJP विधायक ने दी थी जहरीली शराब की चेतावनी, कार्रवाई होती तो टल सकती थीं बंडा में 30 मौतें

सागर शराब कांड पर दिग्विजय सिंह का बड़ा हमला: बोले- 2024 में BJP विधायक ने दी थी अवैध शराब की चेतावनी, कार्रवाई होती तो टल सकती थीं 30 मौतें

सागर। बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। अवैध शराब के कारोबार को लेकर अब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिग्विजय सिंह ने इंटरनेट मीडिया पर नरयावली से भाजपा विधायक प्रदीप लारिया का वर्ष 2024 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को लिखा पत्र साझा करते हुए दावा किया कि इलाके में अवैध शराब के कारोबार को लेकर करीब दो साल पहले ही चेतावनी दे दी गई थी।

दिग्विजय सिंह का कहना है कि यदि उस समय भाजपा विधायक की शिकायत को गंभीरता से लिया जाता और अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो बंडा में सामने आया जहरीली शराब कांड शायद टाला जा सकता था। बंडा में जहरीली शराब से करीब 30 लोगों की मौत के बाद यह सवाल अब और तीखा हो गया है कि आखिर प्रशासन को अवैध शराब के कारोबार की जानकारी होने के बावजूद उसे रोकने के लिए समय रहते कठोर कदम क्यों नहीं उठाए गए।

भाजपा विधायक के पत्र ने बढ़ाए सरकार के सामने सवाल

दिग्विजय सिंह ने जिस पत्र को सार्वजनिक किया है, उसमें भाजपा विधायक प्रदीप लारिया ने सागर जिले के कई क्षेत्रों में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री होने की शिकायत की थी। पत्र तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को संबोधित था। विधायक ने सागर और राहतगढ़ विकासखंड के साथ-साथ नगर पालिका परिषद मकरोनिया, नगर परिषद कर्रापुर और सदर कैंट क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री का मुद्दा उठाया था।

विधायक की शिकायत के मुताबिक गांवों और कस्बों में पान की गुमटियों और छोटे-छोटे टपरों तक शराब पहुंचाई जा रही थी। आरोप था कि एजेंटों के माध्यम से थैलों में शराब बेचने का काम किया जा रहा है। यानी अवैध शराब का कारोबार किसी एक स्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि उसका नेटवर्क कई इलाकों में फैला होने की बात शिकायत में कही गई थी।

दिग्विजय सिंह ने इसी पत्र को आधार बनाकर सरकार से सवाल किया है कि जब सत्ता पक्ष के विधायक ने ही प्रशासन को अवैध शराब के कारोबार की जानकारी दे दी थी, तो उसके बाद भी इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म क्यों नहीं किया गया।

कलेक्टर और आबकारी विभाग से भी शिकायत का दावा

विधायक प्रदीप लारिया ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि अवैध शराब की बिक्री को लेकर वे पहले भी कलेक्टर और सहायक आबकारी आयुक्त से शिकायत कर चुके थे। इसका मतलब यह है कि मामला केवल एक बार पुलिस को भेजे गए पत्र तक सीमित नहीं था। अलग-अलग स्तर पर शिकायतें किए जाने का दावा किया गया था।

इसके बावजूद यदि अवैध शराब का कारोबार जारी रहा, तो अब प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद यही पुरानी शिकायत राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासन की जवाबदेही से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

‘शिकायत पर कार्रवाई होती तो बच सकती थीं जानें’

दिग्विजय सिंह का सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2024 में अवैध शराब की बिक्री की शिकायत सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उनका तर्क है कि अवैध शराब का नेटवर्क अचानक एक दिन में तैयार नहीं होता। यदि लगातार शिकायतें मिल रही थीं और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी थी, तो प्रशासन को उसके स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

बंडा में जहरीली शराब की घटना ने अब इस पुराने पत्र को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। राजनीतिक तौर पर कांग्रेस इसे सरकार की विफलता के प्रमाण के तौर पर पेश कर रही है। वहीं पूरे मामले में जांच के जरिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि अवैध शराब कहां से आती थी, किस नेटवर्क के माध्यम से लोगों तक पहुंचती थी और स्थानीय स्तर पर किन लोगों की भूमिका थी।

दिग्विजय बोले- केवल मौतों तक सीमित न रहे जांच

छतरपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि बंडा की घटना को केवल जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक इसके पीछे सक्रिय अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय नेताओं, पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत या संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध शराब का कारोबार लंबे समय तक चलना मुश्किल है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

दिग्विजय सिंह के बयान ने इस मामले को सीधे राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल से जोड़ दिया है। अब विपक्ष यह पूछ रहा है कि अगर वर्ष 2024 में ही अवैध शराब की शिकायत सामने आ गई थी, तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई और कार्रवाई का परिणाम क्या रहा।

अवैध शराब के नेटवर्क की जांच की मांग

बंडा की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल अवैध शराब की सप्लाई चेन को लेकर है। जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची? शराब बनाने या मिलावट का काम कहां हुआ? इसे किन लोगों ने खरीदा और आगे किन इलाकों में पहुंचाया? स्थानीय स्तर पर इसकी बिक्री कौन कर रहा था? इन सवालों के जवाब जांच के जरिए सामने आने जरूरी हैं।

अगर जांच केवल घटना के बाद शराब पीने वाले लोगों या कुछ स्थानीय आरोपियों तक सीमित रहती है, तो उस नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी जिसने अवैध शराब को बाजार तक पहुंचाया। इसी वजह से दिग्विजय सिंह ने पूरे नेटवर्क की जांच की मांग की है।

2024 की शिकायत अब बनी बड़ा राजनीतिक मुद्दा

करीब दो साल पुराने भाजपा विधायक के पत्र का सामने आना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पत्र विपक्ष के किसी नेता द्वारा नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायक द्वारा लिखा गया था। यही बिंदु दिग्विजय सिंह के हमले को राजनीतिक रूप से धार दे रहा है।

कांग्रेस का कहना है कि जब भाजपा के ही विधायक ने अवैध शराब के खुले कारोबार की शिकायत की थी, तो प्रशासन को उस पर तत्काल और स्थायी कार्रवाई करनी चाहिए थी। अब बंडा में बड़ी संख्या में मौतों के बाद वही शिकायत सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रही है।

वहीं सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि अवैध शराब के खिलाफ पहले की गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई थी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदारी तय करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

मौतों के बाद उठे कई गंभीर सवाल

बंडा शराब कांड ने सागर जिले में अवैध शराब के कारोबार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन को इस नेटवर्क की पहले से जानकारी थी। दूसरा सवाल यह है कि अगर जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों प्रभावी नहीं हुई। तीसरा सवाल यह है कि जहरीली शराब की सप्लाई के पीछे कौन लोग थे और उन्हें संरक्षण किस स्तर पर मिला।

अब वर्ष 2024 का भाजपा विधायक का पत्र सामने आने के बाद इन सवालों का दायरा और बढ़ गया है। दिग्विजय सिंह ने इसी आधार पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि समय रहते चेतावनी पर कार्रवाई की जाती तो बंडा की त्रासदी को रोका जा सकता था।

फिलहाल बंडा की घटना ने अवैध शराब के खिलाफ सरकारी कार्रवाई, पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका तथा स्थानीय स्तर पर संभावित संरक्षण को लेकर बहस तेज कर दी है। करीब 30 मौतों के बाद सबसे जरूरी सवाल यही है कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार पूरे नेटवर्क तक जांच कब पहुंचेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।