NHAI के टोल प्लाजा पर फर्जीवाड़े में ED की बड़ी छापेमारी, 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई-फर्जी टोल रसीदों से रकम डायवर्ट करने का आरोप, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच

ED ने NHAI टोल प्लाजा पर धोखाधड़ी से टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित 7 राज्यों के 14 ठिकानों पर छापेमारी की है.

NHAI के टोल प्लाजा पर फर्जीवाड़े में ED की बड़ी छापेमारी, 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई-फर्जी टोल रसीदों से रकम डायवर्ट करने का आरोप, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच

NHAI टोल प्लाजा पर फर्जी सॉफ्टवेयर को लेकर पर्दाफाश किया गया है. ED की कार्रवाई जारी है. अनऑथोराइज्ड सॉफ्टवेयर और फर्जी रसीदों की मदद से धोखाधड़ी की जा रही थी.

नई दिल्ली/लखनऊ। राष्ट्रीय राजमार्गों पर संचालित टोल प्लाजा में कथित फर्जीवाड़े और टोल वसूली की रकम को आधिकारिक सिस्टम से बाहर डायवर्ट किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ED ने बुधवार, 2 सितंबर को देश के कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है।

जांच एजेंसी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और पश्चिम बंगाल के कोलकाता समेत कई स्थानों पर चल रही है। ED की अलग-अलग टीमें संदिग्धों और मामले से जुड़े लोगों के परिसरों में दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, कंप्यूटर सिस्टम और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।

फर्जी टोल रसीद बनाकर रकम डायवर्ट करने का आरोप

जांच के केंद्र में कथित तौर पर ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर हैं, जिनका इस्तेमाल टोल प्लाजा पर फर्जी रसीदें बनाने और वास्तविक टोल कलेक्शन के आंकड़ों में हेरफेर करने के लिए किए जाने का आरोप है। आशंका है कि इन सॉफ्टवेयर की मदद से कुछ वाहनों से टोल की रकम वसूली जाती थी, लेकिन उसका पूरा रिकॉर्ड NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज नहीं किया जाता था।

आरोप है कि टोल से प्राप्त रकम के एक हिस्से को आधिकारिक हिसाब-किताब से बाहर निकालकर अलग-अलग माध्यमों से डायवर्ट किया गया। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और फर्जी तरीके से हासिल रकम आखिर किन लोगों तक पहुंची।

NHAI के रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच में सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत

मामले की जांच के दौरान NHAI के रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच में कथित तौर पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। इसके बाद जांच एजेंसियों का ध्यान टोल प्लाजा पर इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर, डिजिटल लॉग और सॉफ्टवेयर की गतिविधियों पर केंद्रित हो गया है।

ED की टीमें तलाशी के दौरान कंप्यूटर, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डिजिटल साक्ष्य जुटा रही हैं। इसके साथ ही टोल कलेक्शन से संबंधित दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम को किस तरह अलग-अलग बैंक खातों या अन्य माध्यमों में पहुंचाया गया।

टोल संचालकों और IT कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच में टोल प्लाजा संचालकों के साथ-साथ IT सिस्टम से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आने की आशंका है। आरोप है कि टोल प्लाजा के संचालन से जुड़े कुछ लोगों और तकनीकी कर्मचारियों की मिलीभगत से अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया।

ED कथित मनी ट्रेल को खंगालते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी तरीके से हासिल रकम किस-किस खाते में गई। संदिग्ध बैंक खातों, कंपनियों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी को आशंका है कि मामले में रकम को अलग-अलग खातों के माध्यम से घुमाकर वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाया गया हो सकता है। इसी वजह से तलाशी के दौरान बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

फर्जी FASTag से ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को निकालने का आरोप

मामले में फर्जी FASTag और टोल सिस्टम में कथित हेरफेर का पहलू भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कुछ ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को नियमों के मुताबिक टोल वसूली से बचाने के लिए सिस्टम में हेरफेर किया जाता था।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ऐसे वाहनों की पहचान और एंट्री सिस्टम में किस तरह बदली जाती थी और इससे सरकारी राजस्व को कितना नुकसान हुआ।

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) और केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच में कई टोल संचालकों और उनसे जुड़े लोगों की गतिविधियां पहले से ही निगरानी में बताई जा रही हैं।

कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह गिरफ्तार

इस मामले में वाराणसी से कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। आरोप है कि वह वाराणसी के हरहुआ क्षेत्र में रहकर कथित अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

आलोक सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को टोल प्लाजा से जुड़े कथित नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात सामने आई है। अब ED इसी नेटवर्क के वित्तीय पहलुओं और उससे जुड़े मनी ट्रेल की जांच कर रही है।

वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा से जुड़े करीब ₹62.87 करोड़ की कथित स्टांप चोरी के मामले की भी जांच चल रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अलग-अलग मामलों के बीच कोई वित्तीय या आपराधिक कनेक्शन है या नहीं।

देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा जांच के दायरे में

जांच का दायरा केवल कुछ टोल प्लाजा तक सीमित नहीं है। जानकारी के मुताबिक देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा जांच के दायरे में हैं। इनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियां टोल प्लाजा के कलेक्शन डेटा, FASTag ट्रांजेक्शन, वाहन श्रेणी, टोल रसीदों और आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच कर रही हैं। यदि किसी स्थान पर सिस्टम में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक टोल कलेक्शन के बीच अंतर पाया जाता है तो उसे जांच में अहम साक्ष्य माना जा सकता है।

पिछले महीने भी हुई थी ED की कार्रवाई

फर्जी टोल वसूली और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में ED पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। पिछले महीने जांच एजेंसी ने PMLA की धारा 17 के तहत कई परिसरों में तलाशी ली थी।

उस समय भी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता समेत कई स्थानों पर कार्रवाई की गई थी। अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू होने से संकेत मिल रहे हैं कि जांच एजेंसी मामले की वित्तीय कड़ियों को लेकर अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है।

असली लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश

ED की मौजूदा कार्रवाई का सबसे अहम पहलू कथित घोटाले की रकम के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना है। एजेंसी यह जांच रही है कि टोल से कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम किन खातों में पहुंची और उसके बाद उसे किस तरह इस्तेमाल किया गया।

जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेनदेन, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और टोल प्लाजा के तकनीकी रिकॉर्ड को आपस में मिलाया जा रहा है।

यदि जांच में फर्जी रसीदों, अनधिकृत सॉफ्टवेयर और धन के डायवर्जन के आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में शामिल लोगों पर PMLA के तहत आगे कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल ED की टीमें अलग-अलग स्थानों पर तलाशी और डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं। छापेमारी से बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद ही कथित टोल घोटाले में शामिल लोगों और रकम के वास्तविक नेटवर्क की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।