पांढुर्णा में गोटमार मेले का खूनी खेल शुरू, पत्थरों की बारिश में 118 से ज्यादा घायल; 15 मिनट में 28 लोग लहूलुहान
पांढुर्णा में गोटमार मेले के दौरान जाम नदी में पत्थरबाजी जारी है। झंडे पर कब्जे के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के खिलाड़ी आमने-सामने हैं। पत्थर लगने से करीब 118 लोग घायल हो गए हैं। इनमें कई लोगों के सिर फूट गए। 4 खिलाड़ियों को गंभीर चोट आई है।
झंडा हासिल करने के लिए दोनों पक्षों में जमकर पत्थरबाजी
खेल शुरू होने के 15 मिनट में ही 28 लोग हुए घायल
सिर पर पट्टी बंधवाकर भी कई खिलाड़ी लौटे मैदान में
पत्थर लगने से सचिन हाटेकर के पैर की हड्डी टूटी
घायलों के इलाज के लिए 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र तैयार
पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में शुक्रवार को सदियों पुरानी और खौफनाक परंपरा गोटमार मेला शुरू होते ही जाम नदी का किनारा देखते ही देखते युद्ध के मैदान में बदल गया। नदी के बीचों-बीच पलाश का पेड़ गाड़कर उस पर लगाए गए झंडे को हासिल करने के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते नदी किनारे पत्थरों की बारिश होने लगी और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए।
दोपहर 12 बजे तक इस खूनी खेल में 118 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों में कई लोगों के सिर फूट गए, जबकि कई के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। पत्थर लगने से कई लोग मैदान में गिर पड़े, लेकिन इसके बावजूद खेल में शामिल कई लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। सिर पर चोट लगने के बाद पट्टी बंधवाकर कुछ लोग दोबारा पत्थरबाजी में शामिल होते दिखाई दिए।
झंडा हासिल करने के लिए आमने-सामने आए दोनों पक्ष
गोटमार मेले की परंपरा के तहत जाम नदी के बीचों-बीच पलाश का पेड़ स्थापित किया गया और उसके ऊपर झंडा लगाया गया। इसके बाद पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के लोगों के बीच झंडे को हासिल करने की कोशिश शुरू हुई। परंपरा के मुताबिक दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं।
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जैसे ही खेल की शुरुआत हुई, कुछ ही मिनटों में माहौल बेहद आक्रामक हो गया। दोनों तरफ से लगातार पत्थर फेंके जाने लगे। नदी का किनारा लोगों की भीड़, पुलिस बल और स्वास्थ्य विभाग की टीमों के बीच पत्थरों की आवाज से गूंजता रहा।
खेल शुरू होने के महज 15 मिनट के भीतर 28 लोग घायल हो गए। कई लोगों के सिर पर गंभीर चोटें आईं। कुछ लोग खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। घायलों को मौके पर मौजूद स्वास्थ्य टीमों ने तत्काल प्राथमिक उपचार दिया।
चोट लगने के बाद भी मैदान छोड़ने को तैयार नहीं खिलाड़ी
गोटमार मेले की सबसे भयावह तस्वीर उस समय सामने आई, जब घायल होने के बावजूद कई खिलाड़ी मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हुए। सिर पर चोट लगने के बाद घायलों को स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां उपचार और पट्टी कराने के बाद कुछ लोग वापस मैदान में पहुंच गए।
पथराव के दौरान सावरगांव पक्ष की ओर से आक्रामकता बढ़ने पर पांढुर्णा पक्ष के कुछ खिलाड़ियों को पीछे हटना पड़ा। कई लोग पुलिया से हटकर भागते हुए भी नजर आए। इस दौरान पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहीं।
सचिन हाटेकर के पैर की हड्डी टूटी
पत्थरबाजी में पांढुर्णा पक्ष के सचिन हाटेकर भी गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया कि उनके पैर पर बड़ा पत्थर आकर लगा, जिससे उनकी हड्डी टूट गई। उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया और इसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मेले के दौरान लगातार चोटिल लोगों को उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया जाता रहा। गंभीर घायलों को जिला अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस को भी तैयार रखा गया है।
7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र और 44 डॉक्टर तैनात
प्रशासन ने मेले में बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की आशंका को देखते हुए पहले से ही व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था की है। मेला क्षेत्र के आसपास 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं।
इन केंद्रों पर 44 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार घायलों का उपचार कर रहे हैं। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट लगने वाले लोगों की मरहम-पट्टी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर घायलों को टांके भी लगाए जा रहे हैं।
इसके अलावा 22 एंबुलेंस को मौके पर तैनात रखा गया है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
700 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती
गोटमार मेले के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पत्थरबाजी की इस परंपरा को देखते हुए पुलिस ने मेला क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।
मेला क्षेत्र में 700 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस बल को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
इसके साथ ही पूरे क्षेत्र में 10 हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। तीन निगरानी ड्रोन भी लगातार आसमान से पूरे इलाके पर नजर रख रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर हालात की निगरानी कर रहे हैं।
लाउडस्पीकर से शांति की अपील
पथराव के बीच प्रशासनिक अधिकारी लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों से शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था में सहयोग करने की अपील कर रहे हैं। पुलिस की ओर से भी लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, परंपरा से जुड़े लोगों में इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। पत्थरबाजी के बीच बड़ी संख्या में लोग मैदान और नदी किनारे डटे रहे।
1955 से अब तक 13 लोगों की मौत
गोटमार मेले की यह परंपरा लंबे समय से विवादों में रही है। पत्थरबाजी के कारण इसमें हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 1955 से 2025 के बीच इस परंपरा के दौरान अब तक 13 लोगों की जान जा चुकी है।
इसके बावजूद यह परंपरा आज भी जारी है। भाद्रपद मास की पोला अमावस्या के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले में पांढुर्णा और सावरगांव के लोग पारंपरिक तरीके से आमने-सामने आते हैं और जाम नदी के बीच स्थापित झंडे को हासिल करने के लिए पत्थरबाजी करते हैं।
परंपरा, आस्था और हिंसा के बीच सवाल
गोटमार मेले को लेकर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि आखिर ऐसी परंपरा को किस तरह जारी रखा जाए, जिसमें हर वर्ष लोगों के घायल होने और कभी-कभी मौत तक होने का खतरा बना रहता है। समर्थक इसे पुरानी परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन से जोड़कर देखते हैं, जबकि विरोध करने वाले लोग इसे जानलेवा और हिंसक परंपरा बताते रहे हैं।
इस बार भी प्रशासन ने स्वास्थ्य और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, लेकिन मेले के शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने से व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।
दोपहर तक 118 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना ने एक बार फिर इस परंपरा को लेकर बहस तेज कर दी है। सिर पर चोट, हाथ-पैर में गंभीर चोट और हड्डी टूटने जैसी घटनाएं यह बताती हैं कि पत्थरबाजी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन की नजर मेले की गतिविधियों और कानून व्यवस्था पर बनी हुई है। ड्रोन और CCTV के जरिए निगरानी की जा रही है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें घायलों के उपचार में जुटी हैं। पुलिस बल को किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट रखा गया है।
पांढुर्णा का गोटमार मेला एक बार फिर उसी सवाल के साथ सामने है—क्या सदियों पुरानी परंपरा को उसी हिंसक रूप में जारी रखा जाना चाहिए, जिसमें उत्सव के बीच पत्थरों की बारिश लोगों को अस्पताल तक पहुंचा देती है?
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस