CSP विक्रम अहिरवार से VHP नेता की तीखी बहस, नागदा थाने में रात 2 बजे तक हंगामा और धरना; SI के तबादले की मांग पर गरमाया मामला

दशहरे की बधाई देने के दौरान महिलाओं के बीच हुए विवाद ने देर रात थाने में हंगामे का रूप ले लिया। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया। इस बीच पुलिस अधिकारियों और नेताओं के बीच तीखी बहस हुई।

CSP विक्रम अहिरवार से VHP नेता की तीखी बहस, नागदा थाने में रात 2 बजे तक हंगामा और धरना; SI के तबादले की मांग पर गरमाया मामला

उज्जैन जिले के नागदा में दशहरे की बधाई देने को लेकर शुरू हुआ विवाद थाने तक पहुंच गया। मंगलवार रात करीब एक बजे विश्व हिंदू परिषद के जिला कोषाध्यक्ष रमेश प्रजापत की सीएसपी विक्रम अहिरवार से बहस हो गई।

नागदा में महिलाओं के बीच विवाद के बाद बढ़ा तनाव, शिकायत पर SC-ST एक्ट के तहत FIR दर्ज; SI योगिता उपाध्याय पर अभद्र व्यवहार और हाथ उठाने की कोशिश का आरोप, जांच के आश्वासन के बाद शांत हुए प्रदर्शनकारी

उज्जैन/नागदा। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में दशहरे की बधाई देने के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते गंभीर रूप ले बैठा। महिलाओं के बीच शुरू हुई कहासुनी के बाद मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया। देर रात तक चले घटनाक्रम में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के पदाधिकारी थाने में धरने पर बैठ गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि रात करीब 2 बजे तक हंगामा और विरोध प्रदर्शन चलता रहा। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के जिला कोषाध्यक्ष रमेश प्रजापत और CSP विक्रम अहिरवार के बीच तीखी बहस भी हुई। विवाद के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली, महिला सब-इंस्पेक्टर के कथित व्यवहार और उनके तबादले की मांग को लेकर माहौल गरमाया रहा।

पुलिस अधिकारियों की ओर से मामले की जांच कराने और जांच के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। हालांकि, पूरे घटनाक्रम में लगाए गए आरोपों और SI के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अब पुलिस जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

दशहरे की बधाई देने के दौरान शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, विवाद नागदा के किल्लीपुरा क्षेत्र स्थित इंद्र कॉलोनी में दशहरे की बधाई देने के दौरान शुरू हुआ था। इस दौरान महिलाओं के बीच कहासुनी हो गई। मामला बढ़ने पर हिंदू पक्ष की ओर से एक मुस्लिम महिला पर आपत्तिजनक बातें कहने का आरोप लगाया गया। इसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया और शिकायत पुलिस तक पहुंची।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित महिला के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। FIR दर्ज होने के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ। घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे और संगठन के पदाधिकारी थाने पहुंच गए।

शुरुआत में महिलाओं के बीच हुई कहासुनी तक सीमित दिख रहा मामला बाद में पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों के कथित व्यवहार को लेकर बड़े विवाद में बदल गया। देर रात तक चले घटनाक्रम ने नागदा में पुलिस और हिंदूवादी संगठनों के बीच तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी।

बजरंग दल के नगर संयोजक ने SI पर लगाया गंभीर आरोप

मामले में बजरंग दल के नगर संयोजक दिनेश परमार ने महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) योगिता उपाध्याय पर आरोप लगाया कि जब उन्होंने मामले में हस्तक्षेप किया, तो SI ने उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया और हाथ उठाने की कोशिश की।

इस आरोप के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने महिला SI के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। उनकी प्रमुख मांगों में SI योगिता उपाध्याय का तबादला भी शामिल था। संगठन के लोगों का कहना था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी पुलिसकर्मी की गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसी मांग को लेकर VHP और बजरंग दल के पदाधिकारी नागदा थाने में धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों पर कार्रवाई होने तक विरोध जारी रखने का रुख अपनाया। इससे थाने में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

हालांकि, SI योगिता उपाध्याय पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल, उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच का भरोसा दिलाया है।

रात 2 बजे तक थाने में चला हंगामा और धरना

विवाद बढ़ने के बाद देर रात तक थाने में गहमागहमी बनी रही। संगठन के पदाधिकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर जवाब मांगते रहे। विरोध प्रदर्शन के दौरान कई बार बातचीत का माहौल गर्म हुआ और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच बहस की स्थिति बनी।

रात करीब 2 बजे तक धरना और हंगामा जारी रहने की बात सामने आई है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाए और संबंधित पुलिस अधिकारी के कथित व्यवहार की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।

पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और जांच के आधार पर निर्णय लेने की बात कही। लेकिन इसी दौरान VHP जिला कोषाध्यक्ष रमेश प्रजापत और CSP विक्रम अहिरवार के बीच हुई तीखी बहस ने मामले को और गरमा दिया।

थाने में देर रात तक चले इस घटनाक्रम के कारण विवाद का केंद्र महिलाओं के बीच हुई शुरुआती कहासुनी से हटकर पुलिस की कार्रवाई और अधिकारियों के व्यवहार पर आ गया।

CSP से बहस के दौरान थप्पड़ मारने वाला बयान

मामले की जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बीच VHP जिला कोषाध्यक्ष रमेश प्रजापत और CSP विक्रम अहिरवार के बीच तीखी बहस हुई। घटनाक्रम के दौरान रमेश प्रजापत ने CSP से कहा कि आप अपने किसी जवान को बुलाइए, मैं भी उसे थप्पड़ मार देता हूं।

इस कथित बयान के बाद मौके पर तनाव और बढ़ गया। पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस तेज हो गई। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच माहौल गर्म रहने से मामले को शांत कराने की चुनौती भी बढ़ गई।

प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे, जबकि पुलिस अधिकारियों की ओर से जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर कदम उठाने की बात कही गई। इस पूरे घटनाक्रम में अधिकारियों और संगठन के पदाधिकारियों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की गई।

थाने में हुए इस विवाद ने यह सवाल भी खड़ा किया कि शिकायतों की जांच और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान किस तरह किया जाए, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो।

VHP और बजरंग दल के पदाधिकारियों के बीच भी हुई बहस

हंगामे के दौरान विवाद केवल पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच ही सीमित नहीं रहा। VHP जिला कोषाध्यक्ष रमेश प्रजापत और बजरंग दल के जिला अध्यक्ष देवेंद्र सेन के बीच भी तीखी बहस होने की जानकारी सामने आई।

इस घटनाक्रम ने थाने में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान तनावपूर्ण स्थिति को और बढ़ा दिया। देर रात तक कई मुद्दों पर चर्चा और बहस होती रही। संगठन के पदाधिकारी SI के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर जोर देते रहे, वहीं पुलिस अधिकारियों ने पूरे मामले को जांच के दायरे में लेकर नियमानुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

आखिरकार, पुलिस अधिकारियों की ओर से जांच के आधार पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। इसके बाद देर रात तक जारी हंगामे के समाप्त होने का रास्ता साफ हुआ।

अब जांच और SI के तबादले की मांग पर टिकी निगाहें

नागदा के इंद्र कॉलोनी से शुरू हुआ यह विवाद अब कई सवाल छोड़ गया है। एक ओर दशहरे की बधाई देने के दौरान महिलाओं के बीच हुई कहासुनी और उसके बाद दर्ज FIR का मामला है, तो दूसरी ओर SI योगिता उपाध्याय पर लगाए गए आरोप और उनके तबादले की मांग है।

पुलिस के सामने अब चुनौती पूरे घटनाक्रम के तथ्यों की निष्पक्ष जांच करने की है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि विवाद की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई, संबंधित शिकायत पर की गई कार्रवाई नियमानुसार थी या नहीं और SI के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

इसके साथ ही, पुलिस अधिकारियों और संगठन के पदाधिकारियों के बीच थाने में हुई तीखी बहस के घटनाक्रम को भी समझना महत्वपूर्ण होगा। किसी भी पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना जरूरी है।

फिलहाल, पुलिस की ओर से जांच के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और SI योगिता उपाध्याय के तबादले या अन्य कार्रवाई की मांग पर पुलिस प्रशासन क्या निर्णय लेता है।