शिक्षित युवा बेरोजगार हैं तो विकसित भारत कैसे बनेगा? जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना, शिक्षा व्यवस्था पर श्वेतपत्र की मांग
स्कूलों की संख्या, शिक्षकों की कमी और उच्च शिक्षा में कम नामांकन को लेकर सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चे 12वीं तक नहीं पहुंच रहे और करोड़ों युवा उच्च शिक्षा के दायरे से बाहर हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के आंकड़ों पर श्वेतपत्र जारी करने और शिक्षा से रोजगार तक समयबद्ध रोडमैप बनाने की मांग की है।
स्कूल से उच्च शिक्षा तक युवाओं के सामने संकट, पटवारी ने सरकार से मांगा शिक्षा व्यवस्था का पूरा हिसाब
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों में घटते नामांकन, शिक्षकों के रिक्त पद और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पटवारी ने कहा कि भारत की युवा आबादी को देश की ताकत बनाने के लिए शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।
पटवारी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है, लेकिन यदि बड़ी संख्या में बच्चे स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं और करोड़ों युवा उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण तथा रोजगार के दायरे से बाहर हैं, तो देश के सामने मौजूद जनसांख्यिकीय अवसर चुनौती में बदल सकता है।
शिक्षा और रोजगार को लेकर सरकार से जवाब मांगा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा से बाहर हैं। उनके मुताबिक लगभग 10.5 करोड़ युवा उच्च शिक्षा के GER कवरेज से बाहर हैं, जबकि करीब 8.7 करोड़ युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आंकड़े सरकार की शिक्षा और रोजगार नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
पटवारी ने जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर 2014 में 2.3 थी, जो 2024 में घटकर 1.9 रह गई है। अनुमान के मुताबिक आने वाले वर्षों में इसमें और गिरावट हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही 2.1 के Replacement Level से नीचे पहुंच चुका है। ऐसे में वर्तमान युवा आबादी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
100 में सिर्फ 47 बच्चे पहुंच रहे 12वीं तक
जीतू पटवारी ने स्कूली शिक्षा में बच्चों के रुकने की दर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कक्षा 1 से 5 तक 92.4 प्रतिशत बच्चे पहुंचते हैं, जबकि कक्षा 1 से 8 तक यह आंकड़ा 82.8 प्रतिशत रह जाता है। कक्षा 1 से 10 तक पहुंचने वाले बच्चों का अनुपात 62.9 प्रतिशत और कक्षा 1 से 12वीं तक पहुंचने वाला अनुपात सिर्फ 47.2 प्रतिशत बताया गया।
कांग्रेस ने इन आंकड़ों के आधार पर सवाल उठाया कि यदि कक्षा 1 में 100 बच्चे प्रवेश लेते हैं और 12वीं तक केवल 47.2 बच्चे पहुंचते हैं, तो बाकी बच्चों की शिक्षा व्यवस्था से बाहर होने के कारणों को लेकर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
पटवारी ने कहा कि स्कूल छोड़ने की समस्या केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जिम्मेदारियां और रोजगार की मजबूरी जैसे कारण भी हो सकते हैं।
सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी का दावा
पत्रकार वार्ता में सरकारी स्कूलों की संख्या को लेकर भी आंकड़े पेश किए गए। कांग्रेस के मुताबिक वर्ष 2014-15 में देश में 11.07 लाख सरकारी स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर करीब 10.05 लाख रह गए। यानी लगभग 1.02 लाख सरकारी स्कूलों की शुद्ध कमी का दावा किया गया।
मध्यप्रदेश के संदर्भ में कांग्रेस ने इसी अवधि के दौरान करीब 30,650 सरकारी स्कूलों की कमी होने का दावा किया। पटवारी ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्कूलों की संख्या में कमी के पीछे क्या कारण हैं और इसका विद्यार्थियों की शिक्षा पर क्या असर पड़ा है।
मध्यप्रदेश में 2,269 Single-Teacher Schools का मुद्दा
शिक्षकों की कमी को लेकर पटवारी ने मध्यप्रदेश की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2,269 Single-Teacher Schools बताए गए हैं, जिनमें करीब 2.29 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं।
उन्होंने कहा कि जब किसी स्कूल में केवल एक शिक्षक उपलब्ध हो तो बच्चों को अलग-अलग कक्षाओं और विषयों की शिक्षा उपलब्ध कराने में व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। कांग्रेस ने सरकार से शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने और स्कूलों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।
पटवारी ने देश में 5,663 Zero-Enrolment Schools होने का भी उल्लेख किया, जहां कोई बच्चा नामांकित नहीं है। उन्होंने नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 36 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में 50 से कम विद्यार्थी हैं और इनमें कई स्कूलों में सिर्फ एक या दो शिक्षक हैं।
गरीबी के कारण भी पढ़ाई छोड़ रहे बच्चे
शिक्षा छोड़ने के कारणों पर बात करते हुए पटवारी ने Economic Survey 2025-26 और PLFS 2023-24 के आंकड़ों का हवाला दिया। उनके मुताबिक 14 से 18 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों में 44 प्रतिशत ने परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम करने और 28 प्रतिशत ने घरेलू काम में व्यस्तता को कारण बताया।
इसके अलावा 8 प्रतिशत ने शिक्षा को जरूरी नहीं माना, जबकि 1 प्रतिशत ने स्कूल की दूरी को कारण बताया। बाकी मामलों में अन्य कारण सामने आने की बात कही गई।
पटवारी ने कहा कि यदि आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चे शिक्षा छोड़ रहे हैं तो सरकार को शिक्षा के साथ परिवारों की आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
उच्च शिक्षा में करोड़ों युवा दायरे से बाहर
उच्च शिक्षा को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने AISHE 2023-24 के आंकड़ों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का Gross Enrolment Ratio करीब 30 प्रतिशत बताया गया है। कुल नामांकन लगभग 4.50 करोड़ और 18 से 23 वर्ष की अनुमानित आबादी करीब 15 करोड़ होने के आधार पर उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा के दायरे से बाहर हैं।
कांग्रेस ने भारत की तुलना कुछ अन्य देशों के उच्च शिक्षा GER से भी की। पटवारी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में भारत के मुकाबले यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जर्मनी, चीन और जापान में उच्च शिक्षा GER अधिक बताया गया।
हालांकि अलग-अलग देशों में GER की गणना, शिक्षा व्यवस्था और जनसंख्या संरचना अलग होती है, इसलिए इन आंकड़ों की तुलना उनके संबंधित संदर्भ में किए जाने की आवश्यकता है।
विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली होने का दावा
पटवारी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पदों का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक Centrally Funded Higher Educational Institutions में स्वीकृत 41,351 Teaching Posts में से 27,133 पद भरे हैं, जबकि 14,042 पद खाली बताए गए हैं।
उन्होंने संस्थानवार आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि IIIT में 54 प्रतिशत, IIT में 39 प्रतिशत और Central Universities में 29 प्रतिशत Teaching Posts खाली होने का दावा किया गया है।
मध्यप्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों को लेकर कांग्रेस ने इससे भी गंभीर स्थिति होने का दावा किया। पटवारी के मुताबिक प्रदेश के 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में 1,949 स्वीकृत पदों में से 1,585 पद खाली हैं। Assistant Professor के 1,069 पदों में सिर्फ 276 पद भरे होने और 93 विषयों में एक भी Assistant Professor नहीं होने का दावा भी किया गया।
उन्होंने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा, क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पांच विश्वविद्यालयों में एक भी Assistant Professor नहीं होने की स्थिति बताई गई है।
सरकार के सामने छह सवाल
पटवारी ने सरकार के सामने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल रखे। उन्होंने पूछा कि कक्षा 1 के 100 बच्चों में से केवल 47.2 बच्चों के 12वीं तक पहुंचने की स्थिति में Dropout रोकने और Retention बढ़ाने के लिए सरकार की क्या योजना है।
उन्होंने सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी, Single-Teacher Schools, उच्च शिक्षा में कम GER और उच्च शिक्षण संस्थानों में रिक्त पदों को लेकर भी जवाब मांगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि युवा आबादी देश की बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा पहुंचानी होगी। युवाओं को उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के अवसर देने के साथ रोजगार के पर्याप्त अवसर भी तैयार करने होंगे।
शिक्षा से रोजगार तक रोडमैप की मांग
जीतू पटवारी ने कहा कि केवल युवा आबादी अधिक होने से Demographic Dividend हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों पर श्वेतपत्र जारी किया जाए, रिक्त शिक्षक पदों को भरा जाए, सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए तथा शिक्षा से रोजगार तक स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप सामने रखा जाए।
पटवारी ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि आने वाले वर्षों में बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर कम करने, उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इन मुद्दों पर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस