जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को शासन का कारण बताओ नोटिस, 15 दिन में मांगा स्पष्टीकरण

बिना अनुमति सामान ले जाने, धरना-हंगामा और सोशल मीडिया पर शासन की आलोचना समेत कई आरोप; 15 दिन में जवाब मांगा

जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को शासन का कारण बताओ नोटिस, 15 दिन में मांगा स्पष्टीकरण

जालौन में तैनात जॉइंट मजिस्ट्रेट (न्यायिक) रिंकू सिंह राही को शासन ने प्रशासनिक अनुशासन और सेवा आचरण से जुड़ी शिकायतों पर कारण बताओ नोटिस जारी किया

उरई। जालौन जिले में तैनात जॉइंट मजिस्ट्रेट (न्यायिक) रिंकू सिंह राही को शासन ने प्रशासनिक अनुशासन, सेवा आचरण और कार्यप्रणाली से संबंधित शिकायतों के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नियुक्ति विभाग की ओर से जारी नोटिस में उनसे 15 दिन के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। नोटिस जारी होने के बाद जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बुधवार को आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने स्वयं शासन की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस की प्रति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।

जानकारी के अनुसार, जालौन के जिलाधिकारी ने पांच अगस्त 2026 को रिंकू सिंह राही के आचरण और कार्यप्रणाली से संबंधित एक पत्र शासन को भेजा था। जिलाधिकारी की ओर से भेजे गए पत्र में विभिन्न घटनाओं और शिकायतों का उल्लेख किया गया था। इसी पत्र को आधार बनाते हुए नियुक्ति विभाग ने रिंकू सिंह राही को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे आरोपों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

शासन की ओर से जारी नोटिस में 27 जून 2026 की एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। नोटिस के अनुसार, रिंकू सिंह राही ने सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना कलेक्ट्रेट से फर्नीचर समेत अन्य सामान लिया और उसे उरई तहसील परिसर में पहुंचाया। इसके बाद कक्ष आवंटन के मुद्दे को लेकर मीडिया को बुलाकर धरना और हंगामा किए जाने का आरोप भी नोटिस में लगाया गया है। शासन ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक अनुशासन और निर्धारित प्रक्रिया के संदर्भ में गंभीरता से लिया है।

नोटिस में सोशल मीडिया पर रिंकू सिंह राही की गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। शासन के अनुसार, उन्होंने कई अवसरों पर सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की योजनाओं, नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक टिप्पणियां कीं। नोटिस में कहा गया है कि एक सरकारी अधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच पर इस तरह की टिप्पणियां सेवा आचरण के अनुरूप नहीं मानी जा सकतीं। शासन ने इन गतिविधियों को लेकर भी अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है।

इसके अलावा नोटिस में अधीनस्थ कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और स्थानीय संगठनों की ओर से की गई शिकायतों का भी हवाला दिया गया है। शिकायतों में रिंकू सिंह राही के व्यवहार को कथित तौर पर अपमानजनक, असंगत और प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत बताया गया है। शासन ने इन शिकायतों को भी नोटिस का हिस्सा बनाते हुए अधिकारी से उनका पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

शासन की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस का उद्देश्य संबंधित अधिकारी को आरोपों पर अपना पक्ष रखने का अवसर देना है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि रिंकू सिंह राही को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। उनके जवाब और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल नोटिस जारी होने के बाद किसी अंतिम दंडात्मक कार्रवाई की स्थिति सामने नहीं आई है।

मामले की चर्चा इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि रिंकू सिंह राही ने स्वयं सोशल मीडिया पर नोटिस की प्रति सार्वजनिक की है। इससे प्रशासनिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, नोटिस में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अधिकारी के स्पष्टीकरण और शासन की आगे की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

प्रशासनिक सेवा में अधिकारियों के लिए निर्धारित सेवा आचरण नियमों के तहत सरकारी कार्यप्रणाली, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश, कार्यालयीन अनुशासन और सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले वक्तव्यों को लेकर स्पष्ट अपेक्षाएं रहती हैं। शासन ने इसी संदर्भ में रिंकू सिंह राही से विभिन्न आरोपों पर जवाब मांगा है। अब सभी की निगाहें उनके स्पष्टीकरण पर टिकी हैं।

रिंकू सिंह राही के जवाब के बाद शासन यह तय करेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और आगे किसी विभागीय कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक पाया जाता है तो मामला आगे नहीं बढ़ सकता है, जबकि आरोपों की पुष्टि होने की स्थिति में शासन नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।

फिलहाल कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद जालौन के प्रशासनिक गलियारों में यह मामला प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है। शासन ने अधिकारी को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया है। इस अवधि में दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और उसके बाद शासन के निर्णय से ही मामले की अगली दिशा स्पष्ट होगी।