जीतू पटवारी का सीएम मोहन यादव को पत्र, सागर शराब कांड की न्यायिक जांच की मांग; सरकार से श्वेत पत्र जारी करने को कहा
इस मामले ने प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार, प्रशासनिक निगरानी और राजनीतिक संरक्षण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता ने सरकार से पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय करने और जहरीली शराब की सप्लाई के संभावित नेटवर्क की जांच की मांग की है।
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत हुई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले की न्यायिक जांच करने के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने मांग की है
भोपाल। सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले ने मध्यप्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। मामले को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल अधिकारियों के तबादले या निलंबन से सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। घटना के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होना चाहिए और दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पटवारी ने मुख्यमंत्री से बंडा शराब कांड पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि श्वेत पत्र में मृतकों की प्रमाणित सूची, पीड़ित परिवारों को दी गई सहायता, उपचार की व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे पटवारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में कहा कि बंडा क्षेत्र में हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने दावा किया कि वे स्वयं पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे और वहां के हालात देखे। पटवारी के मुताबिक, परिवारों का दर्द केवल सरकारी आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। उन्होंने सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
तबादला और निलंबन से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती
पटवारी ने शराब कांड के बाद अधिकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की सूचनाएं या शिकायतें पहले से मौजूद थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि मौत होने के बाद अधिकारियों का तबादला या निलंबन कर देना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, प्रशासनिक कार्रवाई के साथ यह भी तय होना चाहिए कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। पटवारी ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक होने पर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
कांग्रेस नेता ने वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि अवैध शराब की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग और प्रभावी सुपरविजन की जिम्मेदारी किसकी थी।
उन्होंने संदिग्ध शराब को लेकर विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई में कथित विरोधाभासों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की। पटवारी ने कहा कि यदि किसी मामले में पहले कार्रवाई का आदेश दिया गया और बाद में उसमें बदलाव किया गया, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि बदलाव किसके आदेश पर और किस कारण से किया गया।
ललितपुर से सागर तक नेटवर्क की जांच
पटवारी ने जहरीली शराब की सप्लाई के संभावित नेटवर्क की जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच केवल बंडा या सागर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि शराब का नेटवर्क स्थानीय था या इसके तार अंतरराज्यीय कारोबार से जुड़े हुए थे।
उन्होंने ललितपुर से सागर तक कथित रूप से नकली शराब पहुंचने के सवाल पर भी सरकार से जवाब मांगा। इसके अलावा उन्होंने गुजरात में हुई जहरीली शराब त्रासदी और उज्जैन से सामने आए कथित कनेक्शन का उल्लेख करते हुए पूछा कि पिछली घटनाओं के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए।
डिस्टलरी से गांव के अंतिम विक्रेता तक जांच
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश की डिस्टलरियों को लेकर सामने आने वाले आरोपों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी डिस्टलरी से अवैध शराब के उत्पादन या आपूर्ति की कड़ी जुड़ती है तो जांच को केवल स्थानीय विक्रेता तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने डिस्टलरी, गोदाम, लाइसेंसी शराब दुकान और गांव के अंतिम विक्रेता तक पूरी सप्लाई चेन की जांच की मांग की। पटवारी ने सागर में स्थानीय भाजपा नेताओं की कथित भूमिका और शराब कारोबार से उनके संभावित संबंधों की भी जांच की मांग उठाई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
पटवारी ने आबकारी विभाग के संचालन को लेकर लगाए जा रहे ‘विंध्य कोठी से रिमोट कंट्रोल’ जैसे आरोपों की भी जांच की मांग की। उन्होंने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही।
उन्होंने आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा की नैतिक जिम्मेदारी तय करने और उनके इस्तीफे की मांग भी की है। पटवारी का आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बाद केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय शासन स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
श्वेत पत्र में मांगी पूरी जानकारी
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से बंडा मामले पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। इसमें मृतकों की प्रमाणित सूची, पीड़ितों की स्वास्थ्य स्थिति, उन्हें उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सुविधा, आर्थिक सहायता और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि जांच का दायरा इतना व्यापक होना चाहिए कि यह स्पष्ट हो सके कि जहरीली शराब बनाने वाला कौन था, उसे उपलब्ध कराने वाला कौन था, गांवों तक उसकी सप्लाई किसने की और यदि किसी स्तर पर संरक्षण मिला तो उसके पीछे कौन लोग थे।
गुजरात और मुरैना की घटनाओं का भी दिया हवाला
कांग्रेस नेता ने सरकार से यह भी बताने को कहा कि गुजरात और मुरैना में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद मध्यप्रदेश में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या एक्शन प्लान तैयार किए गए थे। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई कार्ययोजना बनाई गई थी तो उसका जमीन पर कितना पालन हुआ।
पटवारी ने कहा कि सरकार को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय अवैध शराब के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की ठोस व्यवस्था बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शराब के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के साथ-साथ यदि किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
न्यायिक जांच की मांग पर सियासत तेज
बंडा शराब कांड को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ा दिया है। पटवारी की मांग है कि मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता को लेकर कोई सवाल न उठे। साथ ही उन्होंने सरकार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
पटवारी ने कहा कि सागर के मृतकों को न्याय मिलना चाहिए, पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए और प्रदेश को जहरीली शराब के अवैध नेटवर्क से मुक्त कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। अब इस मामले में सरकार की ओर से न्यायिक जांच और श्वेत पत्र की मांग पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजरें हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस