हमीदिया अस्पताल की चौथी मंजिल से पाइप पकड़कर भागा उम्रकैद का कैदी, रात 3 बजे खिड़की से उतरा; एक घंटे की तलाश के बाद ग्राउंड फ्लोर पर दबोचा गया
हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती नर्मदापुरम सेंट्रल जेल के उम्रकैद कैदी सचेंद्र उर्फ सचिन राजपूत ने देर रात चौथी मंजिल के टॉयलेट की खिड़की से पाइपलाइन के सहारे भागने की कोशिश की। सुरक्षा कर्मियों ने तलाश शुरू की तो करीब एक घंटे बाद वह ग्राउंड फ्लोर पर पाइपलाइन के पास पकड़ा गया। कैदी हत्या, फिरौती के लिए अपहरण समेत गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा है। घटना के बाद कोहेफिजा पुलिस ने मामला दर्ज कर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है।
हमीदिया की चौथी मंजिल से फरार होने की कोशिश, पाइप पकड़कर नीचे उतरा उम्रकैद का कैदी; ग्राउंड फ्लोर पर ही पकड़ा गया
भोपाल। हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती नर्मदापुरम सेंट्रल जेल के एक उम्रकैद के कैदी ने देर रात सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर फरार होने की कोशिश की। कैदी चौथी मंजिल के टॉयलेट की खिड़की से बाहर निकला और पाइपलाइन के सहारे नीचे उतरने लगा। उसके अस्पताल से भागने की जानकारी सामने आते ही सुरक्षा कर्मियों और पुलिस ने तलाश शुरू कर दी। करीब एक घंटे की खोजबीन के बाद कैदी ग्राउंड फ्लोर पर पाइपलाइन के पास ही मिल गया। इसके बाद उसे दोबारा पुलिस अभिरक्षा में ले लिया गया।
कैदी की पहचान सचेंद्र उर्फ सचिन राजपूत (30) के रूप में हुई है। वह नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। उसे एक गंभीर आपराधिक मामले में अदालत ने वर्ष 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इलाज के सिलसिले में उसे पहले नर्मदापुरम जिला अस्पताल ले जाया गया था और बाद में भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
टिन का टुकड़ा निगलने की बात कहकर कराया था अस्पताल में भर्ती
जानकारी के अनुसार सचेंद्र ने 14 सितंबर को जेल अधिकारियों को बताया था कि उसने टिन का एक टुकड़ा निगल लिया है। उसकी बात सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने उसे चिकित्सकीय जांच के लिए जिला अस्पताल नर्मदापुरम भेजा।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उसकी जांच की। जांच में शरीर के अंदर कोई अज्ञात वस्तु नहीं मिली। इसके बाद भी आगे की चिकित्सकीय जांच के लिए उसे भोपाल रेफर किया गया। 15 सितंबर को उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद वह चिकित्सकीय निगरानी में था। इसी दौरान उसने मौका देखकर अस्पताल से निकलने की कोशिश कर दी।
रात करीब तीन बजे टॉयलेट जाने के दौरान निकला बाहर
पुलिस के अनुसार घटना रात करीब तीन बजे की है। सचेंद्र टॉयलेट जाने के लिए गया था। इसी दौरान उसने टॉयलेट की खिड़की का रास्ता चुना और वहां से बाहर निकल गया।
खिड़की से बाहर आने के बाद उसने अस्पताल की पाइपलाइन पकड़ ली। इसके बाद वह पाइपलाइन के सहारे चौथी मंजिल से नीचे उतरने लगा। रात के अंधेरे में उसने अस्पताल की इमारत से नीचे उतरकर परिसर से बाहर निकलने की कोशिश की।
हालांकि उसकी यह कोशिश ज्यादा देर तक छिपी नहीं रह सकी। उसके गायब होने की जानकारी सामने आते ही अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षा कर्मियों और पुलिसकर्मियों को सतर्क किया गया। इसके बाद आसपास के हिस्से में उसकी तलाश शुरू कर दी गई।
अस्पताल परिसर में मचा हड़कंप, हर तरफ शुरू हुई तलाश
कैदी के गायब होने की जानकारी मिलते ही अस्पताल में हड़कंप की स्थिति बन गई। सुरक्षा कर्मियों ने अस्पताल परिसर के अलग-अलग हिस्सों में खोजबीन शुरू की। संभावित रास्तों और निकास स्थानों पर भी नजर रखी गई, ताकि कैदी परिसर से बाहर न निकल सके।
तलाश के दौरान पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को जानकारी मिली कि कैदी पाइपलाइन के रास्ते नीचे उतर सकता है। इसके बाद इमारत के निचले हिस्से में भी खोजबीन की गई।
करीब एक घंटे तक चली तलाश के बाद सचेंद्र ग्राउंड फ्लोर पर पाइपलाइन के पास मिल गया। वह अस्पताल परिसर से बाहर निकलने में सफल नहीं हो सका था। उसे तत्काल पकड़कर दोबारा अभिरक्षा में ले लिया गया।
चौथी मंजिल तक पहुंचने और खिड़की से निकलने पर सवाल
घटना के बाद अस्पताल में कैदियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जेल से इलाज के लिए लाए गए कैदी को अस्पताल की चौथी मंजिल स्थित टॉयलेट तक जाने की अनुमति और मौका कैसे मिला।
जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि कैदी टॉयलेट की खिड़की से बाहर निकलकर पाइपलाइन तक पहुंच गया, लेकिन उसकी निगरानी में तैनात कर्मचारियों को इसकी जानकारी तत्काल क्यों नहीं मिली।
पुलिस घटना के समय कैदी की निगरानी में तैनात कर्मचारियों से भी पूछताछ कर सकती है। इसके अलावा अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था, कैदी की आवाजाही और घटना के दौरान मौजूद कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।
हत्या और फिरौती के मामले में काट रहा था उम्रकैद
सचेंद्र उर्फ सचिन राजपूत सामान्य कैदी नहीं है। वह हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में सजा काट रहा है।
अदालत ने 15 मई 2019 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसे नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में रखा गया था। जेल में सजा काटने के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जांच के लिए उसे अस्पताल लाया गया था।
यही अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उसने कथित तौर पर फरार होने की कोशिश की। हालांकि, उसकी योजना अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकलने से पहले ही नाकाम हो गई।
कोहेफिजा पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण
घटना के बाद जेल प्रशासन की शिकायत पर कोहेफिजा पुलिस ने कैदी के भागने के प्रयास को लेकर प्रकरण दर्ज किया है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कैदी ने भागने की कोशिश अचानक की या इसके लिए पहले से कोई योजना बनाई थी। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अस्पताल में उसकी निगरानी के दौरान सुरक्षा में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
अस्पताल में लगे सुरक्षा इंतजाम और कैदी की आवाजाही से जुड़े तथ्यों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है। पुलिस घटना के समय की परिस्थितियों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कैदी किस तरह चौथी मंजिल की खिड़की तक पहुंचा और वहां से पाइपलाइन पर उतरने में सफल हुआ।
बाहर निकलने से पहले ही खत्म हो गई कोशिश
सचेंद्र ने चौथी मंजिल से पाइपलाइन के सहारे नीचे उतरकर अस्पताल से फरार होने की कोशिश तो की, लेकिन वह परिसर से बाहर नहीं निकल पाया। ग्राउंड फ्लोर पर ही उसकी तलाश पूरी हो गई और उसे दोबारा सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।
अब इस घटना के बाद अस्पताल में इलाज के लिए लाए जाने वाले बंदियों और कैदियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों का ध्यान सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा पर है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना में सुरक्षा की चूक किस स्तर पर हुई और कैदी को फरार होने का मौका कैसे मिला।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस