थाने के अंदर पेट्रोल डालकर आग लगाने वाले दलपत पटेल की मौत: 90% झुलसने के बाद इलाज के दौरान तोड़ा दम, पुलिस पर परिजनों के गंभीर आरोप; SP बोले- होगी निष्पक्ष जांच

दलपत के दूसरे बेटे महेंद्र पटेल का कहना है कि चार बजे के लगभग पिता मां से मिलने थाना गए थे और वो उनके पीछे पीछे गया। जब वह थाना पहुंचा तो पिता आग की लपटों में घिरे थे।

थाने के अंदर पेट्रोल डालकर आग लगाने वाले दलपत पटेल की मौत: 90% झुलसने के बाद इलाज के दौरान तोड़ा दम, पुलिस पर परिजनों के गंभीर आरोप; SP बोले- होगी निष्पक्ष जांच

थाने के भीतर पेट्रोल डालकर आया, खुद को आग लगाई….फिर भी किसी को भनक तक नहीं लगी कुठला थाने में 90% झुलसे दलपत पटेल की इलाज के दौरान मौत ; बेटे के चोरी केस में जेल और पत्नी से पूछताछ के बीच हुआ आत्मदाह का प्रयास पुलिस बोली-चोरी का माल बरामद न हो, इसलिए दबाव बनाने की कोशिश, परिजनों के आरोप अलग कहानी कहते हैं

कुठला थाने में पत्नी से पूछताछ के बीच पहुंचा था दलपत पटेल, अचानक खुद को लगाई आग; पुलिस बोली- चोरी का माल बरामद न होने देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश, परिजनों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

कटनी के कुठला थाना परिसर में खुद को आग लगाने वाले दलपत पटेल की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह करीब 90 प्रतिशत झुलस गया था और गंभीर हालत में जबलपुर रेफर किया गया था। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस कार्रवाई और कथित दबाव को लेकर सवाल उठाए हैं। पुलिस का कहना है कि चोरी के मामले में कार्रवाई के दौरान दबाव बनाने की कोशिश की गई। अब इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की बात कही जा रही है।

थाने के अंदर पेट्रोल डालकर पहुंचा दलपत, फिर खुद को लगा ली आग

कटनी के कुठला थाना परिसर में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब दलपत पटेल ने कथित तौर पर अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। अचानक थाना परिसर में आग की लपटें उठने से वहां मौजूद पुलिसकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिसकर्मियों ने तत्काल आग बुझाई और गंभीर रूप से झुलसे दलपत पटेल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उसकी हालत बेहद गंभीर बताई। शरीर का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा झुलसने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

बेटा चोरी के मामले में जेल, पत्नी से थाने में पूछताछ

बताया जा रहा है कि पूरा घटनाक्रम चोरी के एक मामले की जांच से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार 12 सितंबर 2026 को चोरी का अपराध दर्ज किया गया था। जांच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और चोरी का कुछ सामान बरामद किया गया।

पुलिस के मुताबिक चोरी के सामान से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद आरोपी के परिवार से भी पूछताछ की जा रही थी। इसी सिलसिले में दलपत की पत्नी को कुठला थाने लाया गया था।

इसी दौरान दलपत पटेल थाना परिसर पहुंचा और कथित तौर पर खुद को आग के हवाले कर दिया।

सबसे बड़ा सवाल- पेट्रोल लेकर थाने के अंदर कैसे पहुंचा?

दलपत पटेल की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है।

अगर दलपत अपने शरीर पर पहले से पेट्रोल डालकर थाने पहुंचा था, तो किसी पुलिसकर्मी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या थाना परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच की जा रही थी? क्या प्रवेश द्वार पर निगरानी व्यवस्था थी?

थाना संवेदनशील स्थान होता है। यहां आने वाले लोगों की गतिविधियों पर पुलिस की नजर रहती है। ऐसे में किसी व्यक्ति का कथित तौर पर पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थ के साथ अंदर पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा का विषय बन गया है।

परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

घटना के बाद दलपत पटेल के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए। परिवार का आरोप है कि चोरी के मामले में बेटे के जेल जाने और पत्नी से पूछताछ के बीच परिवार पर दबाव बनाया जा रहा था।

परिजनों का कहना है कि इसी वजह से दलपत मानसिक रूप से परेशान था और इसी घटनाक्रम के बीच उसने थाना परिसर में आत्मदाह जैसा कदम उठाया।

हालांकि पुलिस पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस ने आरोपों को खारिज किया, बताया दबाव बनाने की कोशिश

पुलिस का कहना है कि चोरी के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक चोरी का सामान बरामद न होने देने और जांच को प्रभावित करने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा था।

पुलिस ने आत्मदाह की घटना को भी इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा है। हालांकि दलपत ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है पूरा घटनाक्रम

इस मामले में थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

जांच में यह देखा जाना जरूरी है कि दलपत थाना परिसर में कब पहुंचा, उसके पास क्या था, वह किस रास्ते से अंदर आया, उसके आसपास कौन-कौन लोग मौजूद थे और आग लगाने से पहले उसके साथ क्या हुआ।

सीसीटीवी फुटेज से यह भी पता लगाया जा सकता है कि घटना के समय पुलिसकर्मियों की तैनाती कहां थी और आग लगने के बाद पुलिस ने कितनी जल्दी प्रतिक्रिया दी।

पुलिस प्रशासन से उठ रहे 10 बड़े सवाल

1. दलपत अगर पेट्रोल लेकर थाने पहुंचा था तो उसे प्रवेश के समय किसी ने क्यों नहीं देखा?

2. क्या थाना परिसर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच की व्यवस्था थी?

3. क्या घटना के समय सभी सीसीटीवी कैमरे चालू थे?

4. क्या दलपत के प्रवेश से लेकर आग लगाने तक की पूरी गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड हुई?

5. क्या किसी पुलिसकर्मी को पेट्रोल की गंध महसूस नहीं हुई?

6. क्या थाना परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों की निगरानी का कोई निर्धारित प्रोटोकॉल है?

7. यदि प्रोटोकॉल है तो घटना के समय उसका पालन हुआ या नहीं?

8. क्या पुलिस को दलपत या उसके परिवार की ओर से किसी तनाव या विरोध की पूर्व जानकारी थी?

9. घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए हैं या नहीं?

10. क्या घटना के बाद थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई?

परिवार के आरोप और पुलिस के दावे आमने-सामने

इस मामले में पुलिस और परिवार की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। परिजन पुलिस कार्रवाई और कथित दबाव को घटना की वजह से जोड़ रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि चोरी के माल की बरामदगी को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी।

ऐसे में किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानने के बजाय पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

दलपत की मौत के बाद बढ़ी जांच की गंभीरता

दलपत पटेल की मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब जांच सिर्फ आत्मदाह की वजह तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाना जरूरी है कि थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई थी या नहीं।

जांच में चोरी के मामले की पूरी पृष्ठभूमि, दलपत की थाना परिसर में मौजूदगी, उसकी पत्नी से पूछताछ, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल- थाने में आग लगाने की नौबत आखिर क्यों आई?

दलपत पटेल की मौत ने पुलिस व्यवस्था के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आत्मदाह की वजह क्या थी, परिवार के आरोपों में कितनी सच्चाई है, पुलिस की कार्रवाई नियमानुसार थी या नहीं और थाना परिसर में सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब जांच से ही सामने आएगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दलपत शरीर पर पेट्रोल डालकर थाना परिसर तक पहुंच गया था, तो उसे आग लगाने से पहले रोकने वाली सुरक्षा व्यवस्था आखिर कहां थी?

अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर निष्पक्ष जांच की है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें और भविष्य में किसी थाने के भीतर ऐसी घटना दोबारा न हो।