मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: 24,500 करोड़ के कामों को मंजूरी, अग्निवीरों को 5 वर्दीधारी विभागों में 20% आरक्षण
मोहन कैबिनेट: 24,500 करोड़ के कामों को मंजूरी, अग्निवीरों को पांच वर्दीधारी विभागों में 20% आरक्षण
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने बैठक में सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई और शिक्षा से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। अग्निवीरों को पांच वर्दीधारी विभागों की भर्ती में 20% आरक्षण देने के साथ दमोह-कटनी मार्ग के लिए 4,470 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में करीब 24,500 करोड़ रुपये के विकास कार्यों और योजनाओं से जुड़े फैसले लिए गए। इनमें स्कूली बच्चों की ड्रेस के लिए अभिभावकों के खातों में सीधे राशि भेजने, दमोह-कटनी के बीच फोरलेन सड़क बनाने, अग्निवीरों को वर्दीधारी विभागों में आरक्षण देने, सिंगरौली में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सिंचाई परियोजनाओं को गति देने जैसे फैसले शामिल हैं।
सरकार के इन फैसलों का असर शिक्षा, सड़क, रोजगार, स्वास्थ्य, सिंचाई और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। कैबिनेट ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी।
स्कूल ड्रेस के लिए अभिभावकों के खातों में जाएगी राशि
कैबिनेट बैठक में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों की स्कूल ड्रेस के लिए सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में राशि भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार की ओर से 600 रुपये प्रति ड्रेस के हिसाब से करीब 348 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि पहले करीब 9.58 लाख विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस बनाकर उपलब्ध कराने की योजना थी। हालांकि ड्रेस की गुणवत्ता और व्यवस्था को लेकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में दिक्कत सामने आई। बच्चों को ड्रेस मिलने में और देरी न हो, इसलिए अब डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खातों में राशि भेजने का फैसला किया गया है।
सरकार के अनुसार अगले साल स्कूल ड्रेस की व्यवस्था अलग नियमों और प्रक्रिया के तहत की जाएगी। मौजूदा व्यवस्था में अभिभावक निर्धारित राशि के माध्यम से बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस की व्यवस्था कर सकेंगे।
दमोह-कटनी के बीच 105 किलोमीटर फोरलेन
कैबिनेट ने प्रदेश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दमोह-कटनी के बीच 105.01 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क के निर्माण को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब 4,400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
वर्तमान में दमोह-कटनी मार्ग पर दो लेन की सड़क होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से कई स्थानों पर यातायात प्रभावित होता है। फोरलेन बनने के बाद इस मार्ग पर आवागमन आसान होने और यात्रा का समय करीब डेढ़ घंटे तक कम होने का अनुमान है।
यह सड़क बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। इससे माल परिवहन के साथ स्थानीय आवागमन को भी गति मिलने की संभावना है।
अग्निवीरों के लिए वर्दीधारी विभागों में 20% आरक्षण
कैबिनेट बैठक में अग्निवीरों के लिए रोजगार से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। मध्यप्रदेश में पांच वर्दीधारी विभागों में अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।
इसके तहत अग्निवीरों को वन विभाग के आरक्षक, गृह विभाग, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी और आबकारी विभाग के आरक्षक जैसे पदों पर भर्ती में अवसर मिलेगा। सरकार के अनुसार पूर्व सैनिकों को भी इस व्यवस्था का लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि सेना में सेवा का अनुभव हासिल करने वाले अग्निवीरों के लिए प्रदेश में रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया है।
इस फैसले से सैन्य सेवा पूरी करने के बाद प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने वाले अग्निवीरों को एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
सिंगरौली में 450 बेड का अस्पताल
कैबिनेट ने सिंगरौली में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। सिंगरौली में 450 बेड का अस्पताल तैयार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटों से संबंधित जरूरत को भी बढ़ाया गया है।
मेडिकल कॉलेज में पहले 150 सीटों की जरूरत बताई गई थी, जिसे बढ़ाकर 155 सीटों किया गया है। अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं के विकास के लिए करीब 355 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
इससे सिंगरौली और आसपास के क्षेत्रों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। मेडिकल कॉलेज से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से विशेषज्ञ चिकित्सा और अस्पताल की क्षमता बढ़ाने का भी लक्ष्य है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 3,113 करोड़
प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित कार्यों के लिए 3,113 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। सरकार का फोकस जिला और संभाग स्तर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी है।
इस तरह कैबिनेट के फैसलों में सड़क और सिंचाई जैसी अधोसंरचना परियोजनाओं के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को भी प्रमुखता दी गई है।
चार बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
किसानों और सिंचाई व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। मां रतनगढ़-दतिया सिंचाई परियोजना के लिए करीब 1,608 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से लगभग 78 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में सिंचाई का रकबा बढ़ने और किसानों को पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।
इसी तरह रामपुर मानव परियोजना के लिए करीब 524 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना के माध्यम से करीब 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है। इसे भी 2027 तक पूरा करने की योजना है।
सिंचाई परियोजनाओं पर लिए गए इन फैसलों से कृषि क्षेत्र को पानी की उपलब्धता बढ़ाने और खेती योग्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।
शिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाने की योजना जारी रहेगी
उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी शिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया। कान नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा नदी में मिलने से रोकने के लिए चल रही योजना को आगे जारी रखने की मंजूरी दी गई है।
इस परियोजना का करीब 52 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। योजना का उद्देश्य कान नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में पहुंचने से रोकना है, ताकि नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
उज्जैन में शिप्रा नदी का धार्मिक महत्व होने के कारण नदी की स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण लंबे समय से प्रमुख मुद्दा रहा है। परियोजना का शेष काम पूरा होने के बाद इसके प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
सागर में 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा
कैबिनेट में सागर जिले से जुड़ी सिंचाई योजना को लेकर भी निर्णय लिया गया। करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने वाली परियोजना का काम वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के मुताबिक सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को वर्षा पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
कई क्षेत्रों को एक साथ प्रभावित करेंगे फैसले
मंगलवार की कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों का दायरा शिक्षा से लेकर रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई और पर्यावरण तक फैला हुआ है। स्कूल ड्रेस के लिए डीबीटी व्यवस्था से तत्काल भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया गया है, वहीं अग्निवीरों के लिए आरक्षण का फैसला सेना से सेवा पूरी करने वाले युवाओं को प्रदेश की वर्दीधारी सरकारी सेवाओं में अवसर देने से जुड़ा है।
दमोह-कटनी फोरलेन जैसी बड़ी सड़क परियोजना से परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने का लक्ष्य है। दूसरी ओर सिंचाई परियोजनाओं के जरिए हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सिंगरौली अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्वीकृत राशि से चिकित्सा ढांचे के विस्तार पर जोर दिया गया है। वहीं शिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाने की परियोजना को जारी रखने का फैसला पर्यावरण और नदी संरक्षण से जुड़ा है।
कुल मिलाकर कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों में युवा रोजगार, सड़क अधोसंरचना, किसानों के लिए सिंचाई, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कूली शिक्षा से जुड़े कई बड़े प्रस्ताव शामिल रहे। सरकार के सामने अब इन स्वीकृत परियोजनाओं को तय समयसीमा में जमीन पर उतारने की चुनौती होगी
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस