निशु आजाद केस में SC-ST एक्ट की धारा जुड़ी, CJP नेताओं के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस का एक्शन का भरोसा

जंतर-मंतर मारपीट मामले में वायरल पॉडकास्ट क्लिप के बाद CJP और कांग्रेस की लीगल टीम सक्रिय हो गई है. CJP नेता संसद मार्ग थाने पहुंचे, जबकि कांग्रेस की टीम स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और FIR में अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की मांग करेगी.

निशु आजाद केस में SC-ST एक्ट की धारा जुड़ी, CJP नेताओं के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस का एक्शन का भरोसा

दिल्ली पुलिस ने संजय आजाद पर हुए कथित जानलेवा हमले के खिलाफ संसद मार्ग थाने पर जारी CJP कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन के बाद उनकी एक मांग तो मानते हुए एफआईआर में दिल्ली SC/ST एक्ट की धारा

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर धरने में शामिल रही सीजेपी कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले का मामला एक बार फिर गरमा गया है। शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर आरोपी के खिलाफ अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। मामले में बढ़ते दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा दिया है।

सीजेपी नेता सौरव दास के नेतृत्व में कार्यकर्ता पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने संजय कुमार पर कथित हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मामले में आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।

पुलिस ने 72 घंटे में गिरफ्तारी का दिया भरोसा

पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर सांसद चंद्रशेखर ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाएगा। इसके साथ ही मामले में पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज करने की बात भी सामने आई है।

दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज एफआईआर में अब एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धारा भी जोड़ी गई है। पुलिस ने पीड़ित संजय कुमार की दोबारा मेडिकल जांच कराने की बात भी कही है। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी मांगों की दिशा में शुरुआती कदम बताया है, हालांकि उनका कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे मामले पर नजर बनाए रखेंगे।

सीजेपी नेता सौरव दास ने कहा कि वे पुलिस से बातचीत करने आए थे और फिलहाल पुलिस को कार्रवाई के लिए समय दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की तो वे दोबारा थाने पहुंचेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।

निशु आजाद ने राहुल गांधी से मांगी थी मदद

संजय कुमार पर कथित हमले का मामला उस समय और चर्चा में आया, जब उनकी बेटी और सीजेपी कार्यकर्ता निशु आजाद ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मदद की अपील की थी। निशु ने अपने पिता पर हुए कथित हमले और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे।

निशु की अपील के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें समर्थन देने की बात कही। राहुल गांधी ने अपने संदेश में निशु को आश्वस्त करते हुए कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है और वह उनके साथ हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि निशु को उनके समुदाय और छात्रों के अधिकारों की आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और केंद्र सरकार तथा गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि कथित हमले के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि निशु की लड़ाई अकेली नहीं है और न्याय मिलने तक आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने अपने पोस्ट का समापन ‘जय भीम’ और ‘जय संविधान’ के नारे के साथ किया।

पॉडकास्ट में हमले की बात कबूलने का दावा

मामले को लेकर विवाद तब और बढ़ गया, जब संजय कुमार पर कथित हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट में दिया गया बयान सामने आया। आरोप लगाया गया कि पॉडकास्ट के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय कुमार पर हमला करने की बात खुले तौर पर स्वीकार की।

इस बयान के सामने आने के बाद सीजेपी और विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि यदि आरोपी ने सार्वजनिक रूप से हमले की बात स्वीकार की थी तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

हालांकि, बाद में स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने बयान को लेकर सफाई दी। उसका कहना है कि घटना में उसने जो भी किया, वह आत्मरक्षा यानी सेल्फ डिफेंस में किया था। उसने आरोप लगाया कि पॉडकास्ट में दिए गए बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ऐसे में मामले में आरोप और बचाव के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने हमले को बताया था मामूली

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर संजय कुमार पर हुए हमले को लेकर सामने आ रहे कुछ दावों का खंडन किया था। पुलिस के मुताबिक, संजय कुमार को लगी चोटें मामूली थीं। पुलिस ने बताया कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल यानी आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों ने चोटों को मामूली बताया था।

पुलिस के अनुसार, संजय कुमार के सिर पर चोटें हाथ में पहने जाने वाले कड़े से लगी थीं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि चोट किसी हथियार से लगने की बात मेडिकल जांच से पुष्ट नहीं होती।

मामले में सोशल मीडिया पर संजय कुमार के सिर में क्रैक होने की जानकारी भी प्रसारित हुई थी। दिल्ली पुलिस ने इसे तथ्यों और मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट यानी एमएलसी से मेल नहीं खाने वाली जानकारी बताया। पुलिस के मुताबिक, सिर में क्रैक होने का दावा बेबुनियाद है।

पुलिस बोली- जल्द दाखिल होगी चार्जशीट

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है। पुलिस ने बताया कि हमले के आरोपियों सूरज कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज से पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में किसी बाहरी व्यक्ति के दखल या राजनीतिक संरक्षण के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत और बेबुनियाद हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

अब एससी-एसटी एक्ट की धारा जोड़े जाने और दोबारा मेडिकल जांच के फैसले के बाद मामले की जांच नए सिरे से चर्चा में आ गई है। सीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे पुलिस की कार्रवाई पर नजर रखेंगे और यदि तय समय में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के समर्थन के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि पुलिस अपने आधिकारिक बयान में मामले को तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांचने की बात कह रही है।

एक तरफ प्रदर्शनकारी आरोपी की गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है। आरोपी की ओर से भी आत्मरक्षा का दावा किया गया है। ऐसे में मामले की सच्चाई जांच और अदालत में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

फिलहाल, पुलिस द्वारा 72 घंटे में गिरफ्तारी का भरोसा, एफआईआर में एससी-एसटी एक्ट की धारा जोड़े जाने और संजय कुमार की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने के बाद निशु आजाद केस में कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस तय समय सीमा में आरोपी के खिलाफ क्या कदम उठाती है और जांच के बाद चार्जशीट में किन तथ्यों को शामिल किया जाता है।