पीएम मोदी ने विरोधियों को बताया ‘नाराज़ फूफा’, ‘दिमागी नक्सल’ का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आलोचकों को नए तरीके से आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सवाल उठाने वालों को नाराज फूफा बताया और कहा कि होम्योपैथी की ऐसी दवा दी है कि सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया है कि अब भारतीय सेना पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारती है। उन्होंने 'दिमागी नक्सलवाद' पर अपनी टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बयान से ऐसे लोग बेनकाब हो गए हैं।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए विपक्ष और सरकार की नीतियों के आलोचकों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विरोधियों को ‘नाराज़ फूफा’ बताते हुए कहा कि देश में जब भी कोई नया काम शुरू होता है, कुछ लोग हर कदम पर सवाल उठाने और उसका विरोध करने के लिए सामने आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का पसंदीदा काम हर चीज पर सवाल उठाना और पूछना है कि आखिर इसकी जरूरत क्या है।
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से कहा कि कॉलेज कैंपस से बाहर निकलने के बाद उन्हें समाज और देश की वास्तविक दुनिया में अलग-अलग तरह के लोग मिलेंगे। इनमें एक वर्ग ऐसा होगा जो सकारात्मक सोच के साथ समाज और देश के लिए काम करता है, जबकि दूसरा वर्ग ऐसा होगा जो किसी भी नए काम को देखकर उसकी आलोचना करने लगता है।
छात्रों से बोले पीएम मोदी- दो तरह के लोग मिलेंगे
एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कैंपस के बाहर उन्हें दो तरह के लोगों का सामना करना पड़ेगा। एक वे लोग होंगे जो सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं और समाज के लिए कुछ करने की कोशिश करते हैं। वहीं, दूसरी तरह के लोग ऐसे होंगे जो किसी भी नए काम के शुरू होते ही ‘नाराज़ फूफा’ की भूमिका में आ जाते हैं।
पीएम मोदी ने अपने अंदाज में कहा कि ‘नाराज़ फूफा’ का पसंदीदा काम हर काम का विरोध करना होता है। उनका एक ही सवाल होता है—“इसकी क्या जरूरत है?” प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जब भी कोई बड़ा निर्णय या नई पहल हुई, कुछ लोगों ने इसी तरह सवाल उठाए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में यूपीआई शुरू किया गया तो सवाल उठे, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई गई तो विरोध हुआ, देश में चिप निर्माण की बात हुई तो भी सवाल खड़े किए गए। नई संसद के निर्माण और वीर सेना नायकों के स्मारक बनाए जाने को लेकर भी आलोचनाएं हुईं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लेकिन समय के साथ भारत ने इन सभी सवालों का जवाब अपने काम और उपलब्धियों के जरिए दिया है। जो काम देश के लिए आवश्यक है, उसे केवल विरोध के कारण रोका नहीं जा सकता।
‘दिमागी नक्सल’ का फिर किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बदलाव को देखकर कुछ लोगों की बौखलाहट बढ़ रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने 15 अगस्त को लाल किले से ऐसे लोगों के लिए ‘होम्योपैथी की दवा’ देने की बात कही थी। उन्होंने इसी संदर्भ में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का जिक्र करते हुए कहा कि होम्योपैथी की दवा बीमारी को कुछ समय के लिए उभारती है और उसके बाद उसके इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जैसे ही उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ वाली होम्योपैथी की गोली दी, वैसे ही ऐसे लोग सामने आने लगे। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की सोच को बढ़ावा दे रहे हैं, जनता अब उनका वास्तविक चेहरा भी देख रही है।
पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश की राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बयानबाजी जारी है। प्रधानमंत्री अक्सर अपने भाषणों में सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विपक्ष की आलोचना करते रहे हैं।
2013 और आज के भारत की तुलना
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने 2013 के भारत और वर्तमान भारत के बीच तुलना भी की। उन्होंने कहा कि आज देश आर्थिक और सामाजिक रूप से पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और मजबूत स्थिति में है।
प्रधानमंत्री ने 2013 के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विकास ‘फर्श पर’ था और महंगाई ‘अर्श पर’ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय घोटाले चरम पर थे और भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उस दौर में आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियां गंभीर थीं और पाकिस्तान भी लगातार भारत के लिए परेशानी खड़ी करता था।
उन्होंने कहा कि आज स्थिति बदल चुकी है। प्रधानमंत्री के मुताबिक आतंकवाद फैलाने वाले पस्त पड़े हैं और अगर पाकिस्तान की ओर से कोई नापाक हरकत होती है तो भारतीय सेना उसका जवाब देने में सक्षम है।
आतंकवाद और नक्सलवाद पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि देश में नक्सलवाद की कमर तोड़ दी गई है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में भारत ने पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं। सरकार का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और केंद्र तथा राज्य सरकारों की रणनीति के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा और नक्सली गतिविधियों में कमी आई है।
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी सरकार की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत अब आतंकवाद को लेकर पहले की तरह रक्षात्मक रवैया नहीं अपनाता। उन्होंने भारतीय सेना की कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
युवाओं को सकारात्मक सोच का संदेश
एसआरसीसी के छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा युवाओं की सोच और उनकी भूमिका पर केंद्रित रखा। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी को केवल आलोचना करने के बजाय समस्याओं का समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने छात्रों से कहा कि नए विचारों और प्रयोगों से डरने की जरूरत नहीं है। देश में जब भी कोई नया काम शुरू होता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन किसी पहल की सफलता का फैसला उसके परिणामों से होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को यह संदेश भी दिया कि भारत के विकास में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश आज तकनीक, डिजिटल भुगतान, विनिर्माण, स्टार्टअप और अन्य क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले और नए अवसरों का निर्माण करने वाले बन सकते हैं।
सरकार की नीतियों को बताया बदलाव का आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में देश में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। डिजिटल भुगतान व्यवस्था से लेकर बुनियादी ढांचे, नई संसद, रक्षा क्षेत्र और तकनीकी निर्माण तक कई क्षेत्रों में भारत ने अपनी क्षमता बढ़ाई है।
उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं और परियोजनाओं को लेकर शुरुआत में सवाल उठाए गए, उनमें से कई आज देश की पहचान बन चुकी हैं। यूपीआई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान ने आम लोगों के लेनदेन के तरीके को बदल दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल दुनिया की समस्याओं का अनुसरण करने वाला देश नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में दुनिया को दिशा देने की क्षमता रखता है।
राजनीतिक संदेश भी साफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन छात्रों के बीच होने के बावजूद राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘नाराज़ फूफा’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों के जरिए उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों और सरकार की नीतियों के आलोचकों पर सीधा निशाना साधा।
प्रधानमंत्री ने जहां एक ओर अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं दूसरी ओर 2014 से पहले की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के दौर पर सवाल उठाए। उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, आतंकवाद और नक्सलवाद का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
उनके भाषण में युवाओं के लिए सकारात्मक सोच, नए प्रयोग और राष्ट्र निर्माण का संदेश भी प्रमुख रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास की गति को रोकने के लिए केवल विरोध या सवाल पर्याप्त नहीं हैं। देश की जनता और युवा यह तय करेंगे कि कौन-से विचार और योजनाएं भारत को आगे ले जा सकती हैं।
इस तरह एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन शिक्षा और युवाओं के भविष्य की चर्चा के साथ-साथ मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी केंद्रित रहा। ‘नाराज़ फूफा’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे उनके शब्दों ने भाषण को राजनीतिक रंग दिया, जबकि आर्थिक विकास, सुरक्षा, तकनीक और युवाओं की भूमिका को उन्होंने नए भारत की तस्वीर से जोड़कर पेश किया।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस