प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बड़े बदलाव: दर्शन-दीक्षा पर रोक, साधकों का ड्रेस कोड खत्म; शिष्य की मौत के बाद बदले नियम

प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद वृंदावन में स्थित आश्रम में कई व्यवस्थाएं बदल दी गई हैं. केली कुंज में दीक्षा देने का कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है. टोकन से होने वाले दर्शन भी बंद कर दिए गए हैं. इसके अलावा यमुना विहार कुंज बेलवान में दीक्षित भक्तों के दर्शन की व्यवस्था भी रोक दी गई है. आश्रम के सेवादारों ने माइक के जरिए भक्तों को बदलावों की जानकारी दी है.

प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बड़े बदलाव: दर्शन-दीक्षा पर रोक, साधकों का ड्रेस कोड खत्म; शिष्य की मौत के बाद बदले नियम

संत प्रेमानंद के आश्रम में एक शिष्य की आत्महत्या के बाद ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है। अब सभी शिष्य पीला अचला नहीं पहन पाएंगे, केवल सेवा में लगे विरक्त शिष्यों को ही सफेद वस्त्र पहनने की अनुमति होगी।

वृंदावन के केली कुंज आश्रम में दर्शन और दीक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को फिलहाल रोकने की जानकारी सामने आई है। वहीं आश्रम से जुड़े साधक-साधिकाओं की वेशभूषा के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब सभी के लिए सफेद वस्त्र और पीला अचला अनिवार्य नहीं रहेगा। यह बदलाव 25 सितंबर को रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की आत्महत्या के बाद सामने आया है। हालांकि, दर्शन-दीक्षा पर रोक को लेकर आश्रम की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

वृंदावन के केली कुंज आश्रम में बदले नियम

मथुरा के वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम में साधकों की वेशभूषा को लेकर नए निर्देश सामने आए हैं। 30 सितंबर 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए शिष्यों के पहनावे से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है।

पहले आश्रम से जुड़े साधक-साधिकाओं के लिए सफेद मार्किन के कपड़े और पीला अचला पहनने की व्यवस्था थी। नए निर्देशों के बाद यह व्यवस्था सभी शिष्यों के लिए अनिवार्य नहीं रहेगी। कई श्रेणियों के शिष्यों को अब सामान्य कपड़े अथवा कुर्ता-पायजामा पहनने की अनुमति दी गई है।

गृहस्थ और व्यवसाय से जुड़े शिष्यों के लिए सामान्य कपड़े

आश्रम की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जो शिष्य गृहस्थ जीवन में हैं और किसी व्यवसाय या काम से जुड़े हुए हैं, उन्हें सामान्य कपड़े पहनने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें ठेला लगाने, दुकान चलाने अथवा अन्य व्यवसाय करने वाले शिष्य शामिल हैं।

केली कुंज की सेवा से जुड़े गृहस्थ शिष्यों के लिए भी सामान्य कपड़े या कुर्ता-पायजामा पहनने की व्यवस्था की गई है। यानी अब ऐसे शिष्यों के लिए पहले की तरह निर्धारित सफेद और पीले रंग की वेशभूषा अनिवार्य नहीं होगी।

हालांकि, आश्रम की व्यवस्था और सेवा में सक्रिय रूप से जुड़े विरक्त शिष्यों को सफेद वस्त्र पहनने की अनुमति रहेगी। इस तरह नए नियमों में शिष्यों की जीवनशैली और उनकी जिम्मेदारियों के आधार पर वेशभूषा को अलग किया गया है।

दीक्षा कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए रोके जाने की जानकारी

वहीं केली कुंज आश्रम में नए भक्तों को दीक्षा देने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि दीक्षा कार्यक्रम कब दोबारा शुरू होगा, इसे लेकर अभी कोई निश्चित समय सीमा सामने नहीं आई है।

दर्शन और दीक्षा पर रोक को लेकर भी ऐसी जानकारी सामने आई है, लेकिन इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल सामने आई जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।

25 सितंबर को हुई थी रसिक दुलारी की मौत

इन बदलावों की चर्चा 25 सितंबर को हुई रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद तेज हुई है। बताया गया कि उन्होंने वृंदावन के गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।

घटना के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले की पड़ताल शुरू की। मृतक के शरीर पर गंभीर चोटें मिली थीं। उनके निजी अंग पर भी गंभीर चोट होने की जानकारी सामने आई थी। घटनास्थल से एक ग्राइंडर मिलने की बात भी कही गई है, जिसकी फोरेंसिक जांच कराए जाने की जानकारी दी गई।

पोस्टमॉर्टम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मौत अधिक खून बहने के कारण होने की बात सामने आई है। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसके पीछे की वजहों को लेकर जांच महत्वपूर्ण है।

घटना के बाद आश्रम के नियमों में बदलाव की चर्चा

रसिक दुलारी की मौत के बाद केली कुंज से जुड़े नियमों में बदलाव की जानकारी सामने आने से दोनों घटनाओं को लेकर चर्चा बढ़ी है। हालांकि, किसी भी बदलाव को सीधे तौर पर आत्महत्या की घटना का कारण या प्रतिक्रिया मानना उचित नहीं होगा, जब तक आश्रम या जांच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी ऐसा स्पष्ट न करे।

फिलहाल सामने आई जानकारी का मुख्य केंद्र आश्रम की व्यवस्था में किया गया बदलाव है। खास तौर पर वेशभूषा को लेकर पहले लागू व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है और कुछ श्रेणी के शिष्यों को सामान्य कपड़े पहनने की अनुमति दी गई है।

नए भक्तों की दीक्षा पर भी फिलहाल विराम

केली कुंज में दीक्षा लेने के इच्छुक नए भक्तों के लिए भी फिलहाल प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने की जानकारी है। दीक्षा कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए रोके जाने से आश्रम की नियमित धार्मिक गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि, दर्शन और दीक्षा की व्यवस्था कब तक बंद रहेगी और इसे दोबारा कब शुरू किया जाएगा, इस बारे में स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।

सफेद वस्त्र पर पूरी तरह रोक नहीं

नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि आश्रम में सफेद वस्त्र पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, केली कुंज की सेवा और व्यवस्था में सक्रिय रूप से जुड़े विरक्त शिष्यों को सफेद वस्त्र पहनने की अनुमति जारी रहेगी।

वहीं गृहस्थ और व्यवसाय से जुड़े शिष्यों को सामान्य कपड़े या कुर्ता-पायजामा पहनने की व्यवस्था की गई है। इससे आश्रम से जुड़े अलग-अलग वर्गों के शिष्यों के लिए वेशभूषा के नियम पहले की तुलना में अलग हो गए हैं।

आधिकारिक स्थिति पर नजर

केली कुंज से जुड़े इन बदलावों को लेकर सामने आई जानकारी में 30 सितंबर 2026 की सूचना का उल्लेख है। दूसरी ओर दर्शन और दीक्षा बंद किए जाने की अवधि को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

रसिक दुलारी की मौत की जांच भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मौत की परिस्थितियों, घटनास्थल से मिले सामान और फोरेंसिक जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आश्रम में वेशभूषा और दीक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव सबसे प्रमुख घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।