खाद की भीषण किल्लत से अन्नदाता बेहाल, यूरिया-डीएपी के लिए 100 किलोमीटर तक भटकने को मजबूर किसान
किसानों का कहना है कि इससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। उन्होंने स्थानीय समितियों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने और पंजीयन-वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है।
राजेंद्र सिंह राजपूत
खाद की किल्लत से किसान परेशान, आश्वासनों के बावजूद समस्या जस की तस
बरेली/रायसेन। किसान आंदोलन और शासन-प्रशासन की ओर से समय-समय पर दिए जा रहे आश्वासनों के बावजूद किसानों की खाद संबंधी समस्या समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। रायसेन जिले की बरेली तहसील सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों किसान यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं। खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद की जरूरत पूरी नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
किसानों का कहना है कि स्थानीय सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें खाद के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में पंजीयन करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई स्थानों पर किसानों को सीमित मात्रा में ही खाद उपलब्ध होने की जानकारी मिल रही है। कहीं एक बोरी खाद के लिए पंजीयन किया जा रहा है, तो कहीं दो या चार बोरी की सीमा निर्धारित की जा रही है।
100 किलोमीटर दूर तक जाने की मजबूरी
किसानों की सबसे बड़ी परेशानी खाद के लिए निर्धारित किए जा रहे दूरस्थ केंद्रों को लेकर है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें उनके स्थानीय क्षेत्र से काफी दूर खाद लेने के लिए भेजा जा रहा है। कुछ मामलों में यह दूरी लगभग 100 किलोमीटर तक बताई जा रही है।
किसानों का सवाल है कि जब खेत में खाद की आवश्यकता तत्काल है, तो एक-दो बोरी खाद लेने के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना उनके लिए कितना व्यावहारिक है। दूर जाने में किसान का पूरा दिन खर्च होता है। इसके अलावा वाहन का किराया, डीजल और अन्य परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है। यदि किसान स्वयं का वाहन लेकर जाता है तो ईंधन का खर्च अलग से उठाना पड़ता है।
किसानों का कहना है कि खेती पहले ही महंगी होती जा रही है। बीज, डीजल, मजदूरी और कृषि से जुड़ी अन्य लागत बढ़ने के बीच यदि खाद के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़े तो किसान पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
पंजीयन व्यवस्था को लेकर भी सवाल
किसानों ने खाद के पंजीयन और वितरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में किसानों का पंजीयन एक ही केंद्र पर कर दिया जाता है, तो वहां भीड़ बढ़ने की स्थिति बनती है। इससे किसानों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है और वितरण व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है।
वहीं दूसरी ओर, यदि किसानों को अलग-अलग दूरस्थ केंद्रों पर भेजा जाता है तो उन्हें आने-जाने में समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। ऐसे में किसानों की मांग है कि पंजीयन और वितरण व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर व्यवस्थित किया जाए, जिससे किसान को खाद लेने के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे क्षेत्रों में न जाना पड़े।
खेती के महत्वपूर्ण समय में बढ़ी चिंता
किसानों के लिए यूरिया और डीएपी दोनों ही महत्वपूर्ण उर्वरक हैं। खेती के अलग-अलग चरणों में इनकी आवश्यकता होती है। ऐसे समय में यदि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होती है तो उन्हें अपनी फसल के प्रबंधन को लेकर चिंता सताने लगती है।
किसानों का कहना है कि खेती का काम समय के अनुसार करना पड़ता है। खेत में जिस समय खाद की आवश्यकता होती है, उस समय उपलब्धता नहीं होने पर किसान के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है। खाद के इंतजार में खेती का काम प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि स्थानीय सहकारी समितियों और संबंधित वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसानों को अपनी आवश्यकता के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद मिल सके।
स्थानीय समितियों में पर्याप्त स्टॉक की मांग
किसानों का कहना है कि यदि स्थानीय सहकारी समितियों में ही पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करा दी जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। इससे किसानों को दूर के केंद्रों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वितरण व्यवस्था भी बेहतर तरीके से संचालित की जा सकेगी।
किसानों ने मांग की है कि प्रशासन प्रत्येक क्षेत्र की वास्तविक जरूरत का आकलन करे और उसी के अनुसार खाद का वितरण सुनिश्चित करे। जिन क्षेत्रों में किसानों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए, ताकि मांग के समय किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
केंद्र और राज्य की जिम्मेदारी पर भी चर्चा
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से खरीफ 2026 के दौरान देश में यूरिया और डीएपी की उपलब्धता पर्याप्त होने की जानकारी दी गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिला और ब्लॉक स्तर पर उर्वरक के वितरण और स्थानीय व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है।
ऐसे में रायसेन जिले के किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए। किसानों का सवाल है कि यदि पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होने की जानकारी दी जा रही है, तो स्थानीय स्तर पर किसानों को खाद के लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है।
किसानों की मांग है कि शासन-प्रशासन उपलब्ध स्टॉक, समितियों की मांग और किसानों की वास्तविक जरूरत के बीच समन्वय स्थापित करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि खाद की आपूर्ति समय पर संबंधित समितियों तक पहुंचे।
आश्वासन नहीं, समय पर खाद की मांग
किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से खाद की समस्या को लेकर अपनी परेशानी सामने रखते आ रहे हैं। समय-समय पर उन्हें समस्या के समाधान का भरोसा भी दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
किसानों का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का विशेष लाभ नहीं चाहिए। उनकी मांग केवल इतनी है कि खेती के जरूरी समय पर उन्हें आवश्यक खाद स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो। किसान को खाद लेने के लिए कई किलोमीटर दूर चक्कर लगाने की स्थिति न बने और पंजीयन एवं वितरण की प्रक्रिया सरल तथा पारदर्शी हो।
बरेली तहसील और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने प्रशासन से तत्काल व्यवस्था की समीक्षा कर स्थानीय सहकारी समितियों में पर्याप्त यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो खेती का काम प्रभावित हो सकता है।
किसानों की साफ मांग है कि अन्नदाता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर खाद चाहिए, ताकि वह अपनी फसल को बचा सके और खेती का काम बिना किसी अनावश्यक बाधा के पूरा कर सके। अब किसानों की नजर शासन-प्रशासन की आगामी कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर खाद की उपलब्धता में होने वाले सुधार पर टिकी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस