आदिवासी छात्रों को ‘यहीं कूट दूंगा’ कहने वाले TI सस्पेंड, ‘जय जोहार’ बोलने पर की थी गाली-गलौज; CM के निर्देश पर विभागीय जांच

भोपाल में मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के साथ गाली गलौज की थी। वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए थे। इसके बाद सीएम के निर्देश पर सस्पेंड किया गया है।

आदिवासी छात्रों को ‘यहीं कूट दूंगा’ कहने वाले TI सस्पेंड, ‘जय जोहार’ बोलने पर की थी गाली-गलौज; CM के निर्देश पर विभागीय जांच

आदिवासी छात्रों पर कथित अभद्र टिप्पणी का वीडियो प्रसारित होने के बाद भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतनलाल सिंह परिहार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र से अटैच किया गया।

भोपाल। आदिवासी छात्रों के प्रति कथित अभद्र टिप्पणी करने वाले मिसरोद थाने के थाना प्रभारी निरीक्षक रतनलाल सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर पिछले दो दिनों से वायरल हो रहे वीडियो को लेकर पुलिस विभाग ने यह कार्रवाई की है। वीडियो में टीआई ड्यूटी के दौरान आदिवासी छात्रों और युवाओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

पुलिस उपायुक्त जोन-2 विकास शाहवाल ने बुधवार को टीआई के निलंबन का आदेश जारी किया। निलंबन अवधि में रतनलाल सिंह परिहार को रक्षित केंद्र, भोपाल अटैच किया गया है। वहीं मामले की विस्तृत जांच के लिए मिसरोद एसीपी को जिम्मेदारी दी गई है। जांच अधिकारी को 15 दिन के भीतर वीडियो की पेनड्राइव सहित विस्तृत और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

मामला उस वीडियो के सामने आने के बाद चर्चा में आया, जिसमें थाना प्रभारी द्वारा आदिवासी छात्रों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में छात्रों द्वारा ‘जय जोहार’ कहे जाने के बाद कथित तौर पर पुलिस अधिकारी की ओर से गाली-गलौज और धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

वीडियो में कथित रूप से ‘यहीं कूट दूंगा’ जैसे शब्द सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने पुलिस अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की।

हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर सामने आए आरोपों की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसी वजह से पुलिस विभाग ने मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच कराने का निर्णय लिया है।

ड्यूटी के दौरान अनर्गल टिप्पणी का आरोप

डीसीपी जोन-2 विकास शाहवाल के अनुसार, वायरल वीडियो में थाना प्रभारी ड्यूटी के दौरान अनर्गल और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। प्रथम दृष्टया उनका यह आचरण पुलिस सेवा के निर्धारित आचरण के अनुरूप नहीं पाया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही जांच के दौरान वीडियो समेत उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभागीय जांच में वीडियो की सत्यता, घटनाक्रम की परिस्थितियों और उसमें मौजूद लोगों के बयान सहित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।

15 दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश

मिसरोद के एसीपी को मामले की जांच सौंपी गई है। उन्हें वायरल वीडियो की पेनड्राइव के साथ विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया था। उसमें दिखाई और सुनाई दे रही घटनाओं का वास्तविक संदर्भ क्या है और पुलिस अधिकारी द्वारा किन परिस्थितियों में कथित टिप्पणी की गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमों के तहत अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।

पहले भी विवादों में रहा है टीआई का नाम

रतनलाल सिंह परिहार का नाम इससे पहले भी विवादों से जुड़ चुका है। उनकी लंबे समय से भोपाल में तैनाती रही है। पूर्व में भी उनके व्यवहार और कार्रवाई को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही गई है।

कुछ समय पहले यूथ कॉन्क्लेव कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और उनके बाल खींचने का मामला सामने आया था। उस मामले को लेकर भी पुलिस अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए थे। तब पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के स्तर से मामले की जांच कराए जाने की बात सामने आई थी।

इसके अलावा दिसंबर 2020 में निशातपुरा थाने में एसआई के पद पर तैनाती के दौरान भी उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। उस समय एक महिला ने उन पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और मारपीट करने का आरोप लगाया था। इन पुराने मामलों का उल्लेख वर्तमान मामले में इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अब एक बार फिर उनके खिलाफ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर विभागीय कार्रवाई हुई है।

आदिवासी छात्रों के मामले ने पकड़ा तूल

ताजा मामला आदिवासी छात्रों और युवाओं से कथित अभद्र व्यवहार से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए।

आदिवासी समुदाय से जुड़े लोगों और छात्रों के प्रति पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को लेकर पहले भी संवेदनशीलता बरतने की मांग उठती रही है। ऐसे में वायरल वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने शुरुआती स्तर पर निलंबन की कार्रवाई की है। अब विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

पुलिस विभाग ने लिया तत्काल एक्शन

वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने मामले को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल कार्रवाई की। टीआई को थाने से हटाकर रक्षित केंद्र भेज दिया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि पुलिस विभाग ने प्रथम दृष्टया सामने आए आचरण को गंभीर माना है।

हालांकि, निलंबन को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो में दिखाई देने वाली पूरी घटना वास्तव में किस परिस्थिति में हुई और अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप किस हद तक सही हैं।

जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल रतनलाल सिंह परिहार निलंबित हैं और उन्हें रक्षित केंद्र भोपाल अटैच किया गया है। मिसरोद एसीपी को 15 दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच के दौरान वायरल वीडियो के अलावा संबंधित छात्रों, पुलिसकर्मियों और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद पुलिस विभाग आरोपों की पुष्टि या खंडन के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का यह मामला एक बार फिर पुलिसकर्मियों के आचरण और संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल सबकी नजर विभागीय जांच पर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि निलंबित टीआई के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है।