राजधानी के हाई सिक्योरिटी इलाके में BJP विधायक के सरकारी बंगले में चोरी, ताले तोड़कर नल-गीजर तक ले गए चोर

भोपाल में VIP बंगलों पर चोरों का आतंक, मंत्रियों-विधायकों के सरकारी आवास भी नहीं सुरक्षित, प्रीतम लोधी के बंगले से लाखों का सामान साफ.

राजधानी के हाई सिक्योरिटी इलाके में BJP विधायक के सरकारी बंगले में चोरी, ताले तोड़कर नल-गीजर तक ले गए चोर

भोपाल में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के जुलाई से बंद सरकारी बंगले का ताला तोड़कर चोर एक्टिवा, दो गैस सिलेंडर और नल की टोटियां ले गए। 30 सितंबर की रात बंगले पर पहुंचे विधायक के भतीजे को चोरी का पता चला, जिसके बाद टीटी नगर पुलिस ने केस दर्ज किया है।

भोपाल। राजधानी भोपाल में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शहर के बेहद पॉश और हाई सिक्योरिटी माने जाने वाले 45 बंगला इलाके में बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी के सरकारी आवास को चोरों ने निशाना बना लिया। चोरों ने बंगले के कई कमरों के ताले तोड़कर जमकर तोड़फोड़ की और घर में रखा सामान चोरी कर लिया। हैरानी की बात यह है कि बदमाश सिर्फ कीमती सामान ही नहीं ले गए, बल्कि वॉशरूम की नल की टोंटियां, गीजर, एक्टिवा, गैस सिलेंडर और किचन का सामान तक चोरी कर ले गए।

जुलाई से बंद था विधायक का सरकारी बंगला

जानकारी के मुताबिक विधायक प्रीतम सिंह लोधी का 45 बंगला स्थित सरकारी आवास जुलाई महीने से बंद था। लंबे समय तक बंगले में किसी के नहीं रहने का फायदा चोरों ने उठाया। बताया जा रहा है कि 30 सितंबर को विधायक के पीए बंगले पर पहुंचे, जिसके बाद चोरी की पूरी वारदात का खुलासा हुआ।

जब पीए ने बंगले का दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। घर के कई कमरों के ताले टूटे हुए थे। सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था और बंगले के अलग-अलग हिस्सों में तोड़फोड़ के निशान दिखाई दे रहे थे। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई और टीटी नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।

कीमती सामान से लेकर नल और गीजर तक चोरी

चोरों ने बंगले को काफी बारीकी से खंगाला। बदमाशों ने घर में मौजूद सामान को अपने हिसाब से निशाना बनाया। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि चोरों ने केवल आसानी से उठाकर ले जाने वाला सामान ही चोरी नहीं किया, बल्कि घर में फिटिंग के तौर पर लगे सामान को भी खोल डाला।

बंगले के वॉशरूम में लगे नल और पानी गर्म करने वाले गीजर तक बदमाश खोलकर ले गए। इसके अलावा एक एक्टिवा स्कूटर, दो गैस सिलेंडर और किचन में रखा खाने-पीने का सामान भी चोरी होने की जानकारी सामने आई है।

यानी चोरों ने बंगले में जो सामान उन्हें उपयोगी या आसानी से चोरी करने लायक लगा, उसे अपने साथ ले गए। वारदात के दौरान उन्होंने घर के कई हिस्सों में तोड़फोड़ भी की।

हाई सिक्योरिटी इलाके में चोरी से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इलाके में वीआईपी और जनप्रतिनिधियों के सरकारी आवास हैं और जिसे राजधानी के हाई सिक्योरिटी इलाकों में गिना जाता है, वहां इतनी बड़ी चोरी की वारदात कैसे हो गई?

चोरों ने बंगले के ताले तोड़े, अंदर दाखिल हुए, कमरों और वॉशरूम को खंगाला, गीजर और नल की फिटिंग खोली, एक्टिवा और गैस सिलेंडर जैसे सामान बाहर निकाले और फिर वहां से फरार हो गए। इस पूरी वारदात के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर किसी की नजर नहीं पड़ी।

हालांकि पुलिस का कहना है कि बंगला करीब तीन महीने से बंद था, इसलिए वारदात की सही तारीख निर्धारित करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पांच दिन बाद भी चोरी की तारीख तय नहीं

चोरी का खुलासा 30 सितंबर को हुआ था। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी पुलिस यह तय नहीं कर पाई है कि आखिर चोरी किस दिन हुई थी।

दरअसल, जुलाई से बंगला बंद होने के कारण पुलिस के सामने चोरी की संभावित अवधि करीब तीन महीने की है। इसी वजह से जांचकर्ताओं के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि बदमाशों ने किस तारीख को बंगले में प्रवेश किया और कितने समय तक वहां रहे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर चोरी की तारीख का अनुमान भी सटीक तरीके से मिल जाता है तो जांच को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।

तीन महीने पुरानी CCTV फुटेज बनी चुनौती

पुलिस अब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। लेकिन तीन महीने पुरानी घटना होने के कारण पुलिस के सामने सीसीटीवी डेटा हासिल करना आसान नहीं है।

कई कैमरों में पुराना डेटा सुरक्षित नहीं रह पाता। ऐसे में पुलिस अलग-अलग स्थानों पर लगे कैमरों की फुटेज और उपलब्ध रिकॉर्ड को खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जुलाई से 30 सितंबर के बीच किसी संदिग्ध व्यक्ति, वाहन या समूह की गतिविधि तो इलाके में नहीं हुई।

अगर किसी कैमरे में संदिग्ध वाहन या व्यक्ति दिखाई देता है तो उसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा सकता है।

पुलिस के सामने कई सवाल

इस मामले में पुलिस के सामने कई सवाल हैं। सबसे पहला सवाल यही है कि चोर बंगले में किस रास्ते से दाखिल हुए। दूसरा, उन्होंने वारदात को अकेले अंजाम दिया या उनके साथ कई लोग थे। तीसरा, नल और गीजर जैसी फिटिंग खोलने में कितना समय लगा और चोरी किया गया सामान किस वाहन से ले जाया गया।

इसके अलावा एक्टिवा और गैस सिलेंडर जैसे सामान को बंगले से बाहर ले जाने के दौरान आसपास के लोगों ने कुछ देखा या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इलाके में सक्रिय किसी पुराने चोर गिरोह का इस वारदात से संबंध है या फिर चोरों ने बंद बंगले की रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम दिया।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने बताया जांच जारी

एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि विधायक प्रीतम सिंह लोधी के सरकारी आवास में हुई चोरी के मामले में पुलिस जांच कर रही है।

उनके मुताबिक पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चोरी की तारीख का पता लगाना है। उन्होंने कहा कि चोरी की तारीख स्पष्ट होने के बाद जांच को आगे बढ़ाना आसान होगा। जुलाई से बंगला बंद होने के कारण करीब तीन महीने का सीसीटीवी डेटा रिकवर करना चुनौतीपूर्ण है। पुलिस अलग-अलग स्थानों पर लगे कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।

अब पुलिस की जांच पर टिकी नजर

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और चोरी गए सामान की जानकारी जुटाने के साथ-साथ आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है। हाई सिक्योरिटी माने जाने वाले इलाके में विधायक के सरकारी आवास में हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

सबसे अहम बात यह है कि चोरी कब हुई, चोर कितने थे और वे इतनी आसानी से सरकारी बंगले तक कैसे पहुंचे, इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती तीन महीने की अवधि में से उस समय को चिन्हित करना है, जब बदमाशों ने बंगले में घुसकर पूरी वारदात को अंजाम दिया।