धान पर मौसम की मार, बिजली ने भी छोड़ा किसानों का साथ; खेतों में फसल पीली पड़ी, प्रशासन की अनदेखी से बढ़ा किसानों का संकट
रायसेन जिले के बरेली क्षेत्र में बारिश की कमी और अनियमित बिजली आपूर्ति से धान की फसल संकट में है। खेतों में फसल पीली पड़ने लगी है और सिंचाई के अभाव में किसानों को लागत डूबने की चिंता सताने लगी है। किसानों का आरोप है कि समस्या को लेकर बार-बार खबरें सामने आने के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों ने खेतों का निरीक्षण, फसल का सर्वे और नियमित बिजली आपूर्ति की मांग की है।
राजेंद्र सिंह राजपूत
धान पर मौसम की मार, बिजली की बेबसी और प्रशासन की अनदेखी
बारिश थमी तो खेतों में पीलापन, बिजली ने भी दिया झटका; बार-बार खबरों के बावजूद जिम्मेदारों की चुप्पी से किसानों में नाराजगी
बरेली, जिला रायसेन।धान की फसल को लेकर क्षेत्र के किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बारिश की कमी ने खेतों में खड़ी फसल की हालत खराब कर दी है। कहीं धान के पौधों में पीलापन दिखाई दे रहा है तो कहीं फसल की स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि किसानों को अपनी लागत तक निकलने की चिंता सताने लगी है। मौसम की मार के बीच किसानों को उम्मीद थी कि बिजली विभाग और प्रशासन उनकी परेशानी में सहारा बनेगा, लेकिन बिजली की समस्या और प्रशासनिक अनदेखी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बारिश नहीं, सिंचाई के लिए बिजली भी नहीं
वर्तमान में कई किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में सिंचाई की आवश्यकता बढ़ गई है। ऐसे समय में किसानों के लिए बिजली ही फसल बचाने का प्रमुख सहारा है। लेकिन बिजली की अनियमितता और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण किसान समय पर सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि एक तरफ आसमान से पानी की उम्मीद पूरी नहीं हो रही और दूसरी तरफ बिजली व्यवस्था भी राहत नहीं दे पा रही है। ऐसे में मेहनत और हजारों रुपये की लागत से तैयार की गई फसल संकट में है।
बार-बार खबरों के बाद भी प्रशासन की अनदेखी!
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। किसानों की समस्या को लेकर पहले भी कई बार खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा चुका है, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा।
किसानों का कहना है कि जब लगातार समाचारों के माध्यम से खेतों की स्थिति और उनकी परेशानी सामने लाई जा रही है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा क्यों नहीं ले रहे हैं? क्या प्रशासन को किसी बड़े नुकसान का इंतजार है?
खेतों तक पहुंचे अधिकारी, कागजों से बाहर निकले कार्रवाई
किसानों की मांग है कि अधिकारियों को केवल कार्यालयों में बैठकर स्थिति की जानकारी लेने के बजाय मौके पर खेतों में पहुंचकर फसल की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए और किसानों की शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाए।
वहीं बिजली विभाग से किसानों ने सिंचाई के लिए नियमित और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने तथा बार-बार आ रही विद्युत संबंधी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की है।
किसान पूछ रहा है—आखिर सुनवाई कब होगी?
धान की फसल अब किसान की मेहनत और उसकी पूरी साल की उम्मीद से जुड़ी है। मौसम ने साथ नहीं दिया, लेकिन किसानों को उम्मीद थी कि सरकारी विभाग उनकी फसल बचाने में सहयोग करेंगे। बार-बार खबरें प्रकाशित होने और समस्या सामने आने के बावजूद यदि जिम्मेदार अधिकारी अब भी सक्रिय नहीं होते हैं, तो किसानों की परेशानी और नुकसान दोनों बढ़ सकते हैं।
अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर निरीक्षण, बिजली व्यवस्था में सुधार और प्रभावित किसानों के लिए ठोस कार्रवाई की है। क्षेत्र के किसान प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि उनकी आवाज इस बार सिर्फ खबर बनकर न रह जाए, बल्कि उस पर जमीन पर भी कार्रवाई दिखाई दे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस