14.5 करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड 7 साल बाद गिरफ्तार: लग्जरी कार और iPhone से दिखाता था रुतबा, 65 बैंक खाते और 20 शेल कंपनियों का नेटवर्क; हांगकांग तक जुड़े तार
अहमदाबाद की वासना पुलिस ने 'ऑपरेशन हॉक आई' के तहत मध्य प्रदेश के बेतूल से नीलेश धीरूभाई पटेल को गिरफ्तार किया है, जो सात साल से फरार था और गुजरात और महाराष्ट्र में सात मामलों में वांछित था।
गुजरात के नीलेश धीरूभाई पटेल को MP के बैतूल से गिरफ्तार किया है
अहमदाबाद/बैतूल। गुजरात की अहमदाबाद पुलिस ने बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले में सात साल से फरार चल रहे कथित मास्टरमाइंड को मध्य प्रदेश के बैतूल से गिरफ्तार किया है। वासना पुलिस ने ‘ऑपरेशन हॉक आई’ के तहत यह कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक आरोपी नीलेश धीरूभाई पटेल गुजरात और महाराष्ट्र में दर्ज सात मामलों में वांछित था। उस पर फर्जी संपत्ति ऋण, कंपनियों और निवेश योजनाओं के जरिए करीब 14.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
पुलिस ने आरोपी के कथित सहयोगी दीपक आहूजा उर्फ दीपू टैंक को भी गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से कार, लैपटॉप, मोबाइल फोन सहित करीब 35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा पुलिस ने करीब 20 लाख रुपये की राशि वाले 65 बैंक खातों को फ्रीज कराया है। पुलिस की जांच में आरोपी से जुड़ी करीब 19 से 20 कथित शेल कंपनियों और विदेश तक फैले कारोबारी नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।
10 महीने की निगरानी के बाद पुलिस ने दबोचा
जोन-7 के डीसीपी के अनुसार, नीलेश पटेल को पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं था। अहमदाबाद से फरार होने के बाद वह कथित तौर पर मुंबई चला गया था। पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ-साथ मानवीय नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया।
पुलिस टीम ने करीब 10 महीने तक लगातार निगरानी की। इसी दौरान आरोपी के ठिकाने और उसकी गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई। मध्य प्रदेश पुलिस की मदद से आखिरकार 18 अगस्त को उसे बैतूल से गिरफ्तार कर लिया गया।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी पिछले कई वर्षों से अपनी पहचान और ठिकाना बदलकर पुलिस से बच रहा था। वह कथित तौर पर कारोबार और निवेश के नाम पर अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए था।
मुंबई में बनाई गईं 20 के करीब फर्जी कंपनियां
पुलिस का आरोप है कि गुजरात से फरार होने के बाद नीलेश पटेल ने मुंबई को अपना नया ठिकाना बनाया। यहां उसने कथित तौर पर ‘तोशान ग्रुप’ के नाम से करीब 19 से 20 कंपनियां स्थापित कीं।
इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर निवेश और वित्तीय लेनदेन के लिए किया जाता था। पुलिस जांच में ‘तोशान इंटरनेशनल’ नाम की एक कंपनी का भी पता चला है, जिसके हांगकांग में पंजीकृत होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कंपनियों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन किया गया और विदेशों में मौजूद संस्थाओं या लोगों के साथ आरोपी का किस स्तर तक संपर्क था।
सेमीकंडक्टर प्लांट के नाम पर निवेश जुटाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने बदलते कारोबारी माहौल और निवेशकों की रुचि वाले क्षेत्रों को भी कथित ठगी के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। उसने सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश का आकर्षक अवसर बताकर लोगों को जोड़ने की योजना बनाई।
जांच के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर ‘तोशान लिबरल साइंटिफिक’ नाम से कंपनी बनाई और एक प्रस्तावित सेमीकंडक्टर प्लांट की योजना का प्रचार किया। निवेशकों के बीच इस परियोजना को भविष्य की बड़ी कारोबारी संभावना के तौर पर पेश किए जाने का आरोप है।
इतना ही नहीं, पुलिस के अनुसार आरोपी ने ‘सेमी कॉइन्स’ नाम की क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भी रकम जुटाने की योजना बनाई थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस योजना में कितने लोगों को जोड़ा गया और वास्तविक रूप से कितनी राशि एकत्र की गई।
उत्तर प्रदेश में जमीन के नाम पर करीब 5 करोड़ जुटाने का आरोप
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने उत्तर प्रदेश में जमीन की पहचान की थी। आरोप है कि इसी जमीन और उससे जुड़े प्रोजेक्ट के नाम पर निवेशकों को जोड़कर करीब 5 करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई।
पुलिस अब उन निवेशकों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है, जिनसे आरोपी ने कथित तौर पर रकम ली थी। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि निवेश के नाम पर ली गई रकम किन बैंक खातों में पहुंची और बाद में उसे कहां-कहां ट्रांसफर किया गया।
मालिक की जानकारी के बिना 90 लाख रुपये का लोन
वासना पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले ने आरोपी के कथित फर्जीवाड़े के तरीके को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर आरोप है कि उसने ‘प्रियंका फैशन’ नाम की फर्म के माध्यम से ऐसी संपत्ति का इस्तेमाल किया, जिसके वास्तविक मालिक को इसकी जानकारी नहीं थी।
इस संपत्ति के आधार पर कथित तौर पर 90 लाख रुपये का बैंक लोन हासिल किया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि संपत्ति से संबंधित दस्तावेज कैसे तैयार किए गए और बैंक स्तर पर उनकी जांच किस तरीके से हुई।
बैंक अधिकारियों और वैल्यूअर्स की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले की जांच केवल आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस को संदेह है कि कथित लोन नेटवर्क में कुछ बैंक अधिकारियों और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स की भूमिका भी रही हो सकती है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह ऐसे प्रॉपर्टी मामलों की पहचान करता था, जहां स्वामित्व संबंधी जानकारी स्पष्ट नहीं होती थी या संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी की गुंजाइश होती थी। इसके बाद कथित तौर पर जाली दस्तावेजों और गलत जानकारी के आधार पर बैंक से बड़ा लोन लेने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, धोखाधड़ी को तत्काल पकड़ में आने से बचाने के लिए लोन लेने के बाद शुरुआत में दो या तीन किस्तों का भुगतान किया जाता था। इसके बाद भुगतान बंद कर दिया जाता और संबंधित लोग कथित तौर पर गायब हो जाते थे।
पहले भी गिरफ्तार हो चुका है बैंक मैनेजर
वासना पुलिस इस कथित नेटवर्क से जुड़े एक बैंक मैनेजर को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। अब पुलिस अन्य मामलों में भी बैंक अधिकारियों और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स की संभावित भूमिका की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी देने में किस स्तर पर लापरवाही या कथित मिलीभगत हुई। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो इस मामले में गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ सकता है।
65 बैंक खाते फ्रीज, लेनदेन की जांच जारी
पुलिस ने आरोपियों से जुड़े करीब 65 बैंक खातों को फ्रीज किया है। इन खातों में लगभग 20 लाख रुपये की राशि होने की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि बैंक खातों के लेनदेन से कथित नेटवर्क के संचालन और रकम के प्रवाह से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।
इसके साथ ही पुलिस ने कारों, लैपटॉप और मोबाइल फोन समेत करीब 35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से कथित तौर पर आरोपियों के संपर्क, दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और कंपनियों से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
लग्जरी कार और iPhone से दिखाता था रुतबा
पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर अपनी आर्थिक स्थिति और कारोबारी प्रभाव का रुतबा दिखाकर लोगों को प्रभावित करता था। लग्जरी कारों और महंगे iPhone के जरिए वह खुद को सफल कारोबारी और निवेश के क्षेत्र में मजबूत व्यक्ति के तौर पर पेश करता था।
पुलिस को आशंका है कि इसी दिखावे और कारोबारी पहचान का इस्तेमाल लोगों का भरोसा जीतने में किया गया। हालांकि, आरोपी ने किन-किन लोगों को किस योजना के नाम पर जोड़ा और कितनी रकम ली, इसका पूरा ब्योरा विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।
हांगकांग कनेक्शन की भी होगी जांच
तोशान इंटरनेशनल के हांगकांग में पंजीकृत होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन तक पहुंच सकता है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि विदेश में पंजीकृत कंपनी का वास्तविक संचालन किसके नियंत्रण में था और क्या भारत से विदेशों तक रकम का कोई लेनदेन हुआ था।
पुलिस अब आरोपियों के बैंक रिकॉर्ड, कंपनियों के दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही उन लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है, जिनके नाम पर कथित तौर पर कंपनियां या बैंक खाते संचालित किए गए।
सात साल से फरार था आरोपी
नीलेश पटेल के खिलाफ गुजरात और महाराष्ट्र में कुल सात मामलों में पुलिस को उसकी तलाश थी। लंबे समय तक फरार रहने के बावजूद वह कथित तौर पर अलग-अलग कारोबारी गतिविधियों के जरिए सक्रिय रहा। करीब 10 महीने की निगरानी के बाद अहमदाबाद पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से उसे बैतूल से गिरफ्तार किया।
फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि 14.5 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी में कितने लोग शामिल थे, 20 के करीब कंपनियों का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और हांगकांग समेत अन्य स्थानों तक इस नेटवर्क का विस्तार कितना था।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस