BJP विधायक ने फायर ब्रिगेड से धुलवाई अपनी निजी कार! वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल, बोले- मैं थोड़ी गाड़ी धोता हूं, ड्राइवर से पूछो

सिंगरौली के बीजेपी विधायक रामनिवास शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें उनके आवास पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी से इनोवा कार धोती दिखाई दे रही है. वीडियो के बाद सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया. विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, जबकि विधायक ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है.

BJP विधायक ने फायर ब्रिगेड से धुलवाई अपनी निजी कार! वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल, बोले- मैं थोड़ी गाड़ी धोता हूं, ड्राइवर से पूछो

बीजेपी विधायक के घर के बाहर खड़ी कार की धुलाई इंटरनेट पर विवाद का विषय बन गया है और बीजेपी विधायक की आलोचना भी की जा रही 

सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में भाजपा विधायक रामनिवास शाह से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में नगर निगम की फायर ब्रिगेड की गाड़ी से विधायक की निजी कार पर पाइप के जरिए पानी डाला जाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी संसाधनों के निजी इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि यह वीडियो विधायक रामनिवास शाह के बिलौंजी स्थित शासकीय आवास के बाहर का है। वीडियो में एक फायर ब्रिगेड वाहन खड़ा दिखाई देता है और उससे पाइप निकालकर पास में खड़ी एक कार पर पानी डाला जा रहा है। कार की धुलाई किए जाने का दावा सोशल मीडिया पर किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि नगर निगम की आपातकालीन सेवा के लिए इस्तेमाल होने वाले फायर ब्रिगेड वाहन को निजी वाहन की सफाई के लिए किस आधार पर लगाया गया।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा सवालों का दौर

फायर ब्रिगेड का मुख्य काम आगजनी और अन्य आपात परिस्थितियों में लोगों की जान-माल की सुरक्षा करना है। ऐसे में यदि सरकारी फायर टेंडर और उसमें तैनात कर्मचारियों का इस्तेमाल किसी निजी वाहन की धुलाई के लिए किया गया है, तो यह सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग यह भी पूछ रहे हैं कि यदि फायर ब्रिगेड को वास्तव में निजी कार की धुलाई के लिए इस्तेमाल किया गया था, तो इसकी अनुमति किस अधिकारी ने दी थी। क्या नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या फिर यह काम स्थानीय स्तर पर कराया गया? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

विधायक बोले- मैं थोड़ी गाड़ी धोता हूं

वीडियो को लेकर विधायक रामनिवास शाह से सवाल किए जाने पर उन्होंने कथित तौर पर कहा कि, "मैं थोड़ी गाड़ी धोता हूं, ड्राइवर से पूछो।" विधायक के इस जवाब के बाद मामले में ड्राइवर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि वाहन वास्तव में विधायक की निजी कार है और उसे फायर ब्रिगेड से पानी डालकर साफ किया गया, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि ऐसा किसके निर्देश पर हुआ।

हालांकि, विधायक की ओर से मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखाई दे रही कार विधायक की निजी कार ही है या नहीं और फायर ब्रिगेड को वहां किस उद्देश्य से भेजा गया था।

नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल

मामले में नगर निगम की भूमिका भी चर्चा में है। फायर ब्रिगेड नगर निगम की महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवा है। किसी इलाके में आग लगने या अन्य आपदा की स्थिति में फायर वाहन और कर्मचारियों की तत्काल जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में फायर ब्रिगेड की गाड़ी का गैर-आपातकालीन और निजी काम में इस्तेमाल किए जाने का आरोप सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

लोगों का कहना है कि सरकारी वाहनों का इस्तेमाल निर्धारित सरकारी कार्यों के लिए ही होना चाहिए। यदि किसी सरकारी वाहन या कर्मचारी का निजी काम में इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि वीडियो को लेकर कोई गलतफहमी है और फायर ब्रिगेड किसी अधिकृत सरकारी कार्य के तहत वहां पहुंची थी, तो नगर निगम को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में दिखाई देने वाली परिस्थितियों के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। यह भी सामने नहीं आया है कि वीडियो कब का है, फायर ब्रिगेड वाहन वहां किस आदेश पर पहुंचा था और उस समय वाहन के इस्तेमाल का आधिकारिक उद्देश्य क्या था।

इसी वजह से मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासनिक जांच जरूरी मानी जा रही है। जांच में फायर ब्रिगेड वाहन की लॉगबुक, ड्यूटी रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों के बयान और वाहन के मूवमेंट से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी संसाधन का निजी इस्तेमाल हुआ है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप सही नहीं हैं तो प्रशासन और विधायक की ओर से स्पष्ट जानकारी देकर स्थिति साफ की जानी चाहिए।

नगर निगम कमिश्नर सविता प्रधान की ओर से मामले पर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब लोगों की नजर प्रशासन की ओर है कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाती है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

फायर ब्रिगेड से निजी कार की कथित धुलाई का वीडियो सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। एक ओर वीडियो सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग को लेकर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आधिकारिक पुष्टि और पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ऐसे में फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फायर ब्रिगेड वाहन वहां क्यों पहुंचा था, कार पर पानी डालने का उद्देश्य क्या था और इसके लिए किसी स्तर से अनुमति दी गई थी या नहीं। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही जिम्मेदारी और कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।