भोपाल में स्वाइन फ्लू से पहली मौत: 12 दिन में मिले 45 नए मरीज, कुल केस 65; फिलहाल सिर्फ एम्स में जांच
भोपाल में इस साल स्वाइन फ्लू से पहली मौत हुई है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 साल के बुजुर्ग की संक्रमण के साथ गंभीर सांस संबंधी बीमारी के चलते मौत हो गई। वे पहले से टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित थे।
मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू से पहली मौत भोपाल में दर्ज हुई है. जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है. राज्य में अब तक 65 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 45 मरीज सिर्फ 12 दिनों में मिले हैं.
भोपाल में एच1एन1 संक्रमण ने बढ़ाई चिंता, 80 वर्षीय बुजुर्ग की गंभीर सांस की बीमारी के दौरान मौत; विशेषज्ञ बोले- 95% इंफ्लूएंजा मरीज बिना भर्ती हुए ठीक हो जाते हैं, लेकिन बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
भोपाल में इस साल स्वाइन फ्लू (एच1एन1) से पहली मौत सामने आई है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय राम सिंह की संक्रमण के साथ गंभीर सांस की बीमारी के चलते मौत हो गई। बताया गया है कि वे पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। ऐसे में एच1एन1 संक्रमण के बाद उनकी स्थिति गंभीर होती चली गई।
राजधानी में स्वाइन फ्लू के मामलों में पिछले कुछ दिनों में तेजी देखी गई है। अब तक शहर में 65 मरीजों में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 45 मरीज पिछले 12 दिनों में सामने आए हैं, यानी कुल मामलों का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा इसी अवधि में मिला है। तेजी से बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की निगरानी बढ़ गई है।
12 दिन में 45 नए केस मिलने से बढ़ी चिंता
मौसम में बदलाव, नमी और ठंडक के बीच राजधानी के अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी-खांसी, बुखार और सांस संबंधी संक्रमण के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। इन्हीं लक्षणों वाले कुछ मरीजों में जांच के बाद एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को महामारी जैसी स्थिति नहीं माना जा सकता। मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद अधिकांश लोग सामान्य उपचार और सावधानी के साथ ठीक हो जाते हैं। चिंता मुख्य रूप से उन मरीजों को लेकर है, जिनकी उम्र अधिक है या जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।
गंभीर लक्षण वाले 232 मरीजों की जांच
भोपाल में फिलहाल एच1एन1 की जांच की सुविधा एम्स भोपाल में उपलब्ध है। गांधी मेडिकल कॉलेज में अभी नियमित रूप से एच1एन1 जांच की सुविधा शुरू नहीं हुई है। जांच व्यवस्था सीमित होने के बावजूद गंभीर लक्षण वाले मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर जांच के लिए भेजा जा रहा है।
अब तक गंभीर लक्षण वाले 232 मरीजों की जांच की जा चुकी है। डॉक्टर मरीज की स्थिति, लक्षणों की गंभीरता और उसके स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए यह तय करते हैं कि एच1एन1 की जांच आवश्यक है या नहीं।
हर सर्दी-जुकाम या बुखार वाले व्यक्ति का एच1एन1 टेस्ट कराना जरूरी नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य वायरल संक्रमण और इंफ्लूएंजा के लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए जांच का निर्णय चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञ बोले- करीब 95% मरीज बिना भर्ती हुए ठीक
गांधी मेडिकल कॉलेज में आरआईआरडी के अधीक्षक और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. लोकेंद्र दवे के मुताबिक मौसम में बदलाव, नमी और ठंडक के कारण वायरल रेस्पिरेटरी बीमारियों के मामलों में वृद्धि होती है। इस दौरान इंफ्लूएंजा समेत कई वायरल संक्रमण देखने को मिलते हैं।
उनके अनुसार पिछले करीब तीन महीने से सर्दी-खांसी, बुखार और सांस संबंधी लक्षणों वाले मरीज अस्पतालों में आ रहे हैं। हालांकि वर्तमान स्थिति अभी असामान्य या महामारी जैसी नहीं है।
डॉ. दवे के मुताबिक इंफ्लूएंजा के करीब 95 प्रतिशत मामले सेल्फ रिकवरिंग होते हैं। यानी अधिकांश मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ती और वे डॉक्टर की सलाह, आराम तथा आवश्यक उपचार के साथ घर पर ही ठीक हो जाते हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मरीज के लिए संक्रमण हल्का ही रहेगा। कुछ लोगों में इंफ्लूएंजा गंभीर रूप ले सकता है और फेफड़ों में संक्रमण या निमोनिया जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों वाले मरीज ज्यादा जोखिम में
एच1एन1 संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों में अलग-अलग स्तर का हो सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण के बाद जटिलताओं की आशंका अधिक रहती है।
हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। 80 वर्षीय राम सिंह की मौत भी इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि उम्र और पहले से मौजूद बीमारियां संक्रमण की गंभीरता को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी मरीज को सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन का स्तर कम होना या लक्षणों का तेजी से बढ़ना महसूस हो तो उसे तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ऑक्सीजन की कमी यानी हाइपोक्सिया की स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के साथ ऑक्सीजन और जरूरत पड़ने पर आईसीयू सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है।
संक्रमण होने पर खुद को दूसरों से अलग रखें
एच1एन1 सहित इंफ्लूएंजा के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति को सावधानी बरतना जरूरी है। लक्षण दिखाई देने पर मरीज को यथासंभव खुद को अन्य लोगों से अलग रखना चाहिए।
पर्याप्त आराम करना, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना महत्वपूर्ण है। घर के अन्य सदस्यों में संक्रमण फैलने का खतरा कम करने के लिए मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके साथ ही हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा इस्तेमाल की गई चीजों की स्वच्छता बनाए रखना भी जरूरी है।
मेडिकल स्टोर से खुद दवा लेना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों ने सर्दी-खांसी और बुखार की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचने की सलाह दी है। खासतौर पर एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
यदि डॉक्टर एंटीवायरल या अन्य दवा लिखते हैं तो उसे निर्धारित मात्रा और अवधि तक लेना चाहिए। इलाज के दौरान लक्षण कम होने के बाद भी डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार को मनमाने ढंग से बंद नहीं करना चाहिए।
यदि इलाज के बावजूद बुखार, खांसी या सांस संबंधी परेशानी बढ़ती है, तो मरीज को दोबारा डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
हाई रिस्क मरीजों के लिए वैक्सीन का विकल्प
एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा वैक्सीन उपलब्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीन संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा देने में मदद करती है और हाई रिस्क श्रेणी के लोगों को डॉक्टर की सलाह से इसे लगवाने पर विचार करना चाहिए।
बताया गया है कि इंफ्लूएंजा वैक्सीन की सुरक्षा प्रभावशीलता करीब 60 से 70 प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि वैक्सीन लगवाने के तुरंत बाद पूर्ण सुरक्षा नहीं मिलती और शरीर में प्रतिरक्षा विकसित होने में समय लगता है।
जिन लोगों को एग एलर्जी है, उन्हें वैक्सीन लगवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। वैक्सीन को लेकर अंतिम निर्णय व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, एलर्जी और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डॉक्टर की सलाह से किया जाना चाहिए।
बढ़ते मामलों के बीच सावधानी जरूरी
भोपाल में कुल 65 एच1एन1 मरीजों में से 45 का पिछले 12 दिनों में सामने आना निश्चित तौर पर निगरानी बढ़ाने वाला संकेत है। हालांकि विशेषज्ञ फिलहाल इसे महामारी जैसी स्थिति नहीं मान रहे हैं, लेकिन तेजी से बदलते मौसम के बीच फ्लू और अन्य श्वसन संक्रमणों से बचाव के लिए सावधानी जरूरी है।
विशेष रूप से बुजुर्ग, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामान्य सर्दी-खांसी और बुखार अधिकांश मामलों में गंभीर नहीं होते, लेकिन जब सांस लेने में दिक्कत, ऑक्सीजन कम होना या लक्षणों में तेजी से बढ़ोतरी दिखाई दे, तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
भोपाल में एच1एन1 के मामलों पर नजर रखने के साथ-साथ जांच व्यवस्था को लेकर भी ध्यान बना हुआ है। फिलहाल जांच केवल एम्स में होने के कारण गंभीर लक्षण वाले मरीजों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है। ऐसे में लोगों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि घबराने के बजाय लक्षणों को समझें, संक्रमण की आशंका होने पर सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस