उमा भारती से अचानक मिलने पहुंचे CM मोहन, मुलाकात के बाद तीखे तेवरों में बोलीं- मंदिर-मस्जिद में भेद नहीं होना चाहिए, सागर शराब कांड पर भी उठाए सवाल
मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती से मिलने उनके निवास पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, उज्जैन हनुमान मंदिर विवाद को लेकर की बात. बंडा शराब कांड पर पूर्व सीएम ने जताया दुख.
CM मोहन यादव ने भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती से मुलाकात की। इसके बाद उमा भारती ने सागर शराब कांड में सरपंच से विधायक और मंत्री तक जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने अवैध शराब और आरोपियों से मिलीभगत पर कार्रवाई की बात कही।
भोपाल। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल स्थित उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद उमा भारती ने उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर विवाद, सागर-बांदा में जहरीली शराब कांड, अवैध शराब की बिक्री और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के बाद उमा भारती के तेवर काफी स्पष्ट और तीखे नजर आए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव पढ़े-लिखे और काबिल व्यक्ति हैं। उन्हें सलाह की जरूरत नहीं है, बल्कि आशीर्वाद की जरूरत है, ताकि वह अपने कार्यकाल में सफल हों और प्रदेश को आगे ले जाएं।
CM मोहन को सलाह नहीं, आशीर्वाद की जरूरत
मुख्यमंत्री को सलाह देने के सवाल पर उमा भारती ने कहा कि मोहन यादव अनुभवी और सक्षम व्यक्ति हैं। उन्होंने उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष से लेकर पर्यटन निगम के अध्यक्ष, विधायक और मुख्यमंत्री तक की जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे में उन्हें सलाह देने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री की सफलता की कामना करती हैं और उन्हें अपना आशीर्वाद देती हैं। उमा भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश के लिए अच्छे फैसले लेने चाहिए और जनता के हित में मजबूती से काम करना चाहिए।
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर बोलीं- बजरंगबली ने कमाल कर दिया
उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा और रास्ते को लेकर चल रहे विवाद पर उमा भारती ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि उन्हें मंदिर से जुड़ी जानकारी उज्जैन से निकलने के बाद रास्ते में मिली। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें वहीं इस मामले की जानकारी मिल जाती तो वह खुद मंदिर के सामने खड़ी हो जातीं।
उमा भारती ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में बजरंगबली ने भी कमाल कर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर और श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए उचित रास्ते की व्यवस्था होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में ऐसा भेद नहीं होना चाहिए कि किसी मस्जिद को बचाने के लिए रास्ता निकाला जाए और मंदिर को हटाने की स्थिति पैदा हो जाए। उनका कहना था कि जिस तरह किसी धार्मिक स्थल के लिए रास्ते की व्यवस्था की जाती है, उसी तरह मंदिर के लिए भी रास्ता निकाला जाना चाहिए।
दर्द में भी मंदिर और शराब कांड पर खुलकर बोलीं
उमा भारती ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिलहाल उनकी कमर में काफी दर्द है और वह ठीक से बैठ भी नहीं पा रही हैं। उन्होंने कहा कि वह कई बार गिर चुकी हैं और वर्ष 1996 से लगातार इस तरह की परेशानियों का सामना करती रही हैं।
उन्होंने वर्ष 2003 का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बनाने के दौरान उनकी कई हड्डियां टूट गई थीं। इसके बाद लंबे समय तक उन्हें गड्ढों वाली सड़कों पर सफर करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस समय वह इलाज के लिए रुकी हुई हैं, वरना उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के मामले में वह खुद मौके पर पहुंचतीं।
सागर शराब कांड पर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की मांग
सागर और बांदा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई घटनाओं को लेकर भी उमा भारती ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि शराब पीना ही नहीं चाहिए, लेकिन अवैध शराब की बिक्री को रोकने की जिम्मेदारी केवल पुलिस और प्रशासन की नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी बड़ी जिम्मेदारी है। पंच और सरपंच से लेकर जनपद और जिला पंचायत सदस्य, नगर पालिका के जनप्रतिनिधि, विधायक और सांसद तक को अपने क्षेत्र में अवैध शराब की गतिविधियों की जानकारी होनी चाहिए।
उमा भारती ने सवाल उठाया कि यदि किसी क्षेत्र में लगातार अवैध शराब बन रही है और बिक रही है तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जनप्रतिनिधियों को पुलिस की मदद लेकर कार्रवाई करवानी चाहिए।
उन्होंने साफ कहा कि जब तक स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक अवैध शराब पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।
सरपंच से मंत्री तक जिम्मेदारी तय हो
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सागर शराब कांड जैसे मामलों में केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि सरपंच से लेकर विधायक और मंत्री तक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उमा भारती ने यह भी मांग की कि आरोपियों के साथ रहने, उनके संपर्क में रहने या उनकी गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद चुप रहने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी की आरोपियों से मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना था कि अवैध शराब के नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल मुख्य आरोपियों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र की जांच जरूरी है।
गोविंद सिंह के साथ तस्वीर पर भी प्रतिक्रिया
उमा भारती ने कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह के साथ कथित आरोपी की तस्वीर को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि का आरोपियों से संपर्क या किसी प्रकार का संबंध सामने आता है तो उसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी की आरोपियों से मिलीभगत साबित होती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
खुद सागर और बांदा जाएंगी उमा भारती
उमा भारती ने कहा कि वह खुद सागर जाएंगी और बांदा क्षेत्र में लोगों से मुलाकात करेंगी। उन्होंने कहा कि वह वहां की वास्तविक स्थिति को समझना चाहती हैं और पीड़ित परिवारों से भी बातचीत करेंगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ आबकारी नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने और शराबबंदी की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर चर्चा की बात भी कही। उमा भारती लंबे समय से शराबबंदी को लेकर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखती रही हैं।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
मध्य प्रदेश में राहुल गांधी के दौरे को लेकर भी उमा भारती ने तंज कसा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि बच्चे उनसे प्यार करते हैं और उन्हें अपना नेता मानते हैं।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उमा भारती ने कहा कि अब वह बूढ़े हो चुके हैं। उनके इस बयान को मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
मुलाकात के बाद कई मुद्दों पर साफ संदेश
मुख्यमंत्री मोहन यादव और उमा भारती की करीब 40 मिनट की मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने जिस तरह उज्जैन मंदिर विवाद और सागर शराब कांड पर अपनी बात रखी, उससे साफ है कि वह इन दोनों मामलों को लेकर गंभीर हैं।
एक तरफ उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव की क्षमता और कार्यशैली पर भरोसा जताया, वहीं दूसरी तरफ मंदिर विवाद में समानता और संवैधानिक व्यवस्था का सवाल उठाया। दूसरी ओर सागर शराब कांड को लेकर उन्होंने प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
उमा भारती के सागर और बांदा जाने के ऐलान तथा आबकारी नीति और शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री से चर्चा की बात ने इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार इन मुद्दों पर आगे क्या कदम उठाती है और सागर शराब कांड की जांच में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस