‘चलो वो शराब आपको पिला दूं, बोतल गाड़ी में रखी है...’, IAS अफसर पर भड़के जीतू पटवारी, देवास में 13 मौतों के आरोप से गरमाई सियासत
देवास जिले के दो गांवों में संदिग्ध हालत में 13 मौतों पर सियासत तेज हो गई है। शनिवार को जीतू पटवारी पीड़ित परिजनों से मुलाकात करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने IAS को भी फटकार लगाई।
देवास जिले के चंदाना और बिजाना गांवों में करीब 10 संदिग्ध मौतों के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री अरुण यादव ने जांच की मांग की। ग्रामीणों ने जहरीली शराब की आशंका जताई है। प्रशासन के अनुसार, मौतों का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और विसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा।
देवास में 13 संदिग्ध मौतों पर बवाल: जीतू पटवारी ने अफसरों को लगाई फटकार, बोले- ‘वही शराब आपको पिला दूं, बोतल गाड़ी में रखी है’
देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। चंदाना और बिंजाना गांवों में कई लोगों की मौत के बाद परिजनों ने इन घटनाओं को शराब सेवन से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी, उल्टियां हुईं और कुछ मामलों में आंखों की रोशनी जाने जैसी शिकायतें भी सामने आईं। हालांकि मौतों की वास्तविक वजह क्या है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
शनिवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव प्रभावित गांवों में पहुंचे। दोनों नेताओं ने मृतकों के परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद पटवारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। यहां अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान उनका तेवर काफी आक्रामक नजर आया।
अधिकारियों से बोले- ‘चलो, वही बोतल आपको पिला दूं’
कलेक्टर कार्यालय में चर्चा के दौरान शराब की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। पटवारी ने अधिकारियों के सामने शराब की बोतल होने की बात कहते हुए कहा कि वह जांच के लिए उसे अपनी गाड़ी में लेकर आए हैं।
उन्होंने अधिकारियों से सवाल करते हुए कहा कि जिस शराब को लेकर ग्रामीण शिकायत कर रहे हैं, उसकी वास्तविकता सामने आनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने तीखे अंदाज में कहा- ‘चलो, वो बोतल आपको पिला दूं। मैं लाया हूं, शराब की बोतल जांच के लिए मेरी गाड़ी में रखी है।’
पटवारी ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका आरोप था कि प्रशासन पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेने के बजाय इसे दबाने की कोशिश कर रहा है, ताकि मामला मीडिया में ज्यादा न आए।
पटवारी ने जिम्मेदारी तय करने की मांग की
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि लोगों की मौत के पीछे अवैध या मिलावटी शराब की भूमिका सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
पटवारी ने प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए एफआईआर दर्ज कराने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मामले को दबाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
बातचीत के दौरान पटवारी ने अधिकारियों के निलंबन की मांग भी उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के कई अधिकारी एक-दूसरे को बचाने में लगे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।
दो दिन बाद धरने की चेतावनी
जीतू पटवारी ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने प्रशासन को समय देते हुए दो दिन बाद धरना देने की बात कही है।
कांग्रेस की ओर से मांग की जा रही है कि मौतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, शराब के नमूनों की वैज्ञानिक जांच हो तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अवैध शराब की भूमिका सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाए।
पटवारी के दौरे के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने इसे सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया है।
27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच हुई मौतों का दावा
जानकारी के मुताबिक चंदाना और बिंजाना गांवों में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच कई लोगों की मौत हुई। स्थानीय परिवारों की ओर से इन मौतों को शराब सेवन से जोड़कर सवाल उठाए गए हैं।
परिजनों का कहना है कि कथित तौर पर शराब पीने के बाद कुछ लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ी। उल्टियां होने और आंखों की रोशनी प्रभावित होने जैसे लक्षणों का भी उन्होंने उल्लेख किया है। इसके बाद कुछ लोगों की मौत हो गई।
मामले में मृतकों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों की ओर से 13 मौतों की बात कही जा रही है। वहीं प्रशासन ने मौतों से जुड़े दावों और आंकड़ों को भ्रामक बताया है।
यही वजह है कि फिलहाल मौतों की सही संख्या और उनकी वजह को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा सकती। पोस्टमार्टम, मेडिकल रिकॉर्ड, शराब के नमूनों तथा अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
प्रशासन ने शराब को जहरीली मानने से किया इनकार
मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। शुक्रवार रात जारी किए गए प्रेस नोट में प्रशासन ने मौतों से जुड़े दावों और आंकड़ों को भ्रामक बताया।
प्रशासन का कहना है कि जिस शराब को लेकर शिकायत की गई थी, उसकी जांच कराई गई और वह जांच में जहरीली नहीं पाई गई। प्रशासन की इस सफाई के बाद कांग्रेस के आरोपों और सरकारी दावे के बीच विरोधाभास सामने आया है।
जहां पीड़ित परिवार शराब सेवन के बाद तबीयत बिगड़ने और मौतों का दावा कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि शिकायत वाली शराब जहरीली नहीं मिली है। ऐसे में अब जांच की रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाएगी।
उज्जैन संभागायुक्त ने बनाई पांच सदस्यीय जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात उज्जैन संभागायुक्त ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया है। यह टीम पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी और संबंधित तथ्यों को सामने लाने का प्रयास करेगी।
जांच में मौतों की परिस्थितियों, मृतकों के मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शराब के नमूनों और स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों सहित कई पहलुओं को देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौतों के पीछे वास्तव में शराब की कोई भूमिका थी या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय अथवा स्वास्थ्य संबंधी कारण मौजूद था।
गांवों में चिंता, अब रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
घटनाओं के बाद प्रभावित गांवों में लोगों के बीच चिंता का माहौल है। मृतकों के परिजन पूरे मामले की सच्चाई सामने आने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वहीं कांग्रेस ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। दूसरी ओर प्रशासन अपनी जांच और शराब के नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर अलग तस्वीर पेश कर रहा है।
अब पांच सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। जांच में यदि शराब से मौतों का संबंध साबित होता है तो जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि जांच में शराब को मौतों का कारण नहीं पाया जाता है तो सामने आए आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट होगी।
फिलहाल देवास के चंदाना और बिंजाना गांवों में हुई मौतों का मामला जांच के दायरे में है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रशासनिक जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजरें टिकी हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस