SIR पर सियासी घमासान तेज, भोपाल में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन; जीतू पटवारी बोले- अब हर जिले में होगा आंदोलन

मध्य प्रदेश में एसआईआर को लेकर कांग्रेस का विरोध पिछले कुछ दिनों से लगातार तेज हो रहा है. 24 सितंबर को भोपाल में यूथ कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था. इसके बाद 25 सितंबर को कांग्रेस ने देशव्यापी प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई. अब इसी कड़ी में सोमवार को भोपाल में प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा प्रदर्शन किया.

SIR पर सियासी घमासान तेज, भोपाल में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन; जीतू पटवारी बोले- अब हर जिले में होगा आंदोलन

SIR को लेकर भोपाल में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन

CEO कार्यालय घेरने पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ता

बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन

प्रदर्शन में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की

भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। सोमवार को राजधानी भोपाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर मार्च करते हुए प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। बाद में कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर मौके से हटाया गया। जीतू पटवारी को भी पुलिस ने बस में बैठाया, हालांकि कुछ देर बाद वे बस से बाहर आ गए।

बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता, वाटर कैनन से पुलिस ने रोका

कांग्रेस के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए थे। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पर चढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार की।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर नारेबाजी की। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाया गया।

कांग्रेस पहले ही घोषणा कर चुकी थी कि 28 सितंबर को भोपाल में निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया जाएगा और इसके अगले चरण में 29 सितंबर को प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा।

ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनकर प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनकर पहुंचा। उसने खुद को जंजीरों से बांध रखा था। जीतू पटवारी और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार उस जंजीर को पकड़े दिखाई दिए।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने SIR, मतदाता सूची में बदलाव और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।

कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए अधिक पारदर्शिता की मांग की। पार्टी ने आगामी चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी दोहराई।

पूर्व विधायक के जूते भीड़ में छूटे

प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की के बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी के जूते भीड़ में छूट गए। इसके बाद वे कुछ समय तक नंगे पैर चलते नजर आए।

युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार भी प्रदर्शन के दौरान बस की खिड़की के शीशे के ऊपर चढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाने की कार्रवाई के बीच कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिस से बहस भी हुई।

कांग्रेस का आरोप- SIR में हटाए गए लाखों नाम

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और इन नामों को हटाने की प्रक्रिया तथा कारणों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

इससे पहले कांग्रेस ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि SIR से पहले मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख से अधिक मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर करीब 5 करोड़ 31 लाख रह गई थी। दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम सूची में संख्या करीब 5 करोड़ 39 लाख हो गई। निर्वाचन आयोग के अनुसार नाम हटाए जाने के कारणों में अनुपस्थित मतदाता, मृत्यु, स्थानांतरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल थीं।

कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा और बूथ स्तर पर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने नाम हटाए गए, किस आधार पर हटाए गए और दावे-आपत्तियों के बाद कितने नाम दोबारा जोड़े गए।

SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी उठे सवाल

कांग्रेस के प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में हाल में सामने आई द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता जोड़ने, नाम हटाने और मतदाता डेटाबेस से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर उनके सवालों का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में निर्णय प्रक्रिया में अपनी जानकारी और भूमिका को लेकर आपत्ति जताई थी। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने बाद में इन आपत्तियों को आयोग की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

यही रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपने सवाल और तेज किए हैं। कांग्रेस भी इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश में आंदोलन कर रही है।

पटवारी बोले- अब हर जिले में होगा प्रदर्शन

जीतू पटवारी ने भोपाल के प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस ने आंदोलन की शुरुआत राजधानी से कर दी है। पार्टी अब इस मुद्दे को जिला स्तर तक ले जाएगी। कांग्रेस की घोषित योजना के अनुसार 29 सितंबर को प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाना है।

कांग्रेस का कहना है कि जिला स्तर पर मतदाता सूची में नाम हटाने के कारणों, प्रक्रिया और पुनः नाम जोड़ने से जुड़े सवाल उठाए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ और स्थानीय स्तर पर मतदाता सूची की जानकारी जुटाने के लिए भी सक्रिय करने की बात कही गई है।

अजय सिंह ने EVM पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह ने प्रदर्शन के दौरान चुनाव प्रक्रिया को लेकर पार्टी की आपत्तियों को और व्यापक रूप दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कथित ‘वोट चोरी’ की शुरुआत 2013 से हुई और 2014 में इसी के जरिए मोदी सरकार बनी। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र की रक्षा करनी है तो EVM के बजाय मतपत्र से चुनाव कराया जाना चाहिए।

अजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधते हुए कई तीखे आरोप लगाए। ये आरोप कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक वक्तव्यों का हिस्सा हैं और इन्हें उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

SIR के साथ कांग्रेस ने चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग को भी अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया है। पार्टी का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के विश्वास को मजबूत करने के लिए इस पर चर्चा होनी चाहिए।

कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटने की स्थिति में उसे आसानी से सुधारने की व्यवस्था हो।

29 सितंबर को जिलों में शक्ति प्रदर्शन

भोपाल के प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस का आंदोलन प्रदेश के अन्य जिलों तक पहुंचने वाला है। पार्टी ने 29 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की घोषणा की है। इससे SIR को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में टकराव और बढ़ने के संकेत हैं।

एक ओर कांग्रेस मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की ओर से नाम हटाने के लिए अनुपस्थिति, मृत्यु, स्थानांतरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियों जैसे कारण बताए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मतदाता सूची के आंकड़े, नाम हटाने की प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों का निपटारा राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने रहने की संभावना है।