चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर वामपंथी मोर्चा का बड़ा हमला, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और SIR पर रोक की राष्ट्रपति से मांग
वामपंथी मोर्चा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। मोर्चा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने, कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के नाम की जांच कराने और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
SIR प्रक्रिया तत्काल रोकने की राष्ट्रपति से अपील
उरई। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर वामपंथी मोर्चा ने सोमवार को गंभीर सवाल उठाए। मोर्चा के नेताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने तथा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे मोर्चा नेताओं ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद होती है। ऐसे में निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार विवाद और मतभेद सामने आ रहे हैं।
मोर्चा की ओर से कहा गया कि पिछले दस महीनों के दौरान चुनाव आयोग के दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा करीब 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों से असहमति जताई गई। नेताओं के मुताबिक मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित निर्णयों को लेकर आयोग के भीतर मतभेद सामने आए हैं। मोर्चा ने इन घटनाओं को चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और विश्वसनीयता से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
मतदाता सूची में नाम हटाने का आरोप
वामपंथी मोर्चा ने ज्ञापन में मतदाता सूचियों को लेकर भी कई आरोप लगाए। नेताओं का कहना था कि कथित तौर पर गलत तरीके से कुछ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे सभी मामलों की जांच कराई जाए और यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसे तत्काल मतदाता सूची में बहाल किया जाए।
मोर्चा नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम शामिल होना उसके लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। इसलिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित सत्यापन और प्रक्रिया के आधार पर सूची से बाहर न हो।
SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक की मांग
ज्ञापन में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई। मोर्चा ने राष्ट्रपति से मांग की कि एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसके प्रभाव तथा प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की जाए।
नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर करना नहीं, बल्कि सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना होना चाहिए। उनका आरोप था कि वर्तमान प्रक्रिया को लेकर विभिन्न स्तरों पर आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं और इन आशंकाओं का समाधान किया जाना जरूरी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
वामपंथी मोर्चा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से रखी। मोर्चा नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचन संस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का विश्वास सर्वोपरि है और आयोग की निष्पक्षता को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका को दूर किया जाना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन में गिरफ्तारियों का भी विरोध
वामपंथी मोर्चा ने 25 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले लोगों की गिरफ्तारियों की भी निंदा की। ज्ञापन में दीपांकर भट्टाचार्य, आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा, अंजली, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और पुरुषोत्तम शर्मा की गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए इसे लेकर आपत्ति जताई गई।
मोर्चा नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शनों में उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति दर्ज कराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
मोर्चा ने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। नेताओं ने कहा कि इन प्रदर्शनों के दौरान उठाए जा रहे मुद्दों पर चुनाव आयोग और सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चुनाव आयोग में नियुक्ति की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
ज्ञापन में चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी मांग रखी गई। वामपंथी मोर्चा ने राष्ट्रपति से चुनाव आयोग में नियुक्ति की पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की। इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की व्यवस्था फिर से लागू करने की मांग की गई।
मोर्चा नेताओं के अनुसार चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर व्यापक पारदर्शिता और संस्थागत संतुलन जरूरी है। उनका कहना था कि नियुक्ति प्रक्रिया में विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं की भागीदारी से आयोग की स्वतंत्रता को लेकर विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
वामपंथी मोर्चा ने राष्ट्रपति से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि देश की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मोर्चा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने, एसआईआर प्रक्रिया रोकने, मतदाता सूची से कथित रूप से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम की जांच कराने तथा नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग रखी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कामरेड ग्रंथ सिंह कुशवाह, देवेंद्र शुक्ला, सुधीर अवस्थी, देवेश चौरसिया, विजय सिंह, राजीव कुशवाहा और भारत सिंह जाटव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
वामपंथी मोर्चा ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मतदाता के अधिकार और संस्थाओं पर विश्वास से जुड़ा विषय है। इसलिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण से लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली तक हर स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। नेताओं ने राष्ट्रपति से ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस