दतिया उपचुनाव में स्टार प्रचारकों की दूरी बनी चर्चा का विषय, बीजेपी-कांग्रेस के कई दिग्गज अब तक मैदान से बाहर; अंतिम दौर में बदल सकती है रणनीति

दतिया विधानसभा उपचुनाव में प्रचार अभियान अंतिम दौर में पहुंच गया है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े स्टार प्रचारक अब तक मैदान में नहीं उतरे हैं। कांग्रेस की ओर से कमलनाथ, दिग्विजय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं की सीमित मौजूदगी रही है, वहीं भाजपा के भी कई दिग्गज नेताओं की सभाएं अब तक नहीं हुई हैं।

दतिया उपचुनाव में स्टार प्रचारकों की दूरी बनी चर्चा का विषय, बीजेपी-कांग्रेस के कई दिग्गज अब तक मैदान से बाहर; अंतिम दौर में बदल सकती है रणनीति

दतिया उपचुनाव में बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय

कांग्रेस के कई दिग्गज अब तक प्रचार से दूर, कमलनाथ की नहीं हुई एंट्री

भाजपा के स्टार प्रचारकों ने भी नहीं संभाली अब तक कमान

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव का प्रचार अभियान अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी पूरी ताकत के साथ जुटे हुए हैं, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा दोनों दलों के बड़े नेताओं की सीमित मौजूदगी को लेकर हो रही है। आमतौर पर उपचुनाव में स्टार प्रचारकों की बड़ी सभाएं, रोड शो और जनसंपर्क अभियान चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं, लेकिन दतिया उपचुनाव में अब तक कई दिग्गज नेताओं की गैरमौजूदगी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के अंतिम दिनों में बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ सकती है। दोनों प्रमुख दल मतदान से पहले अपने प्रभावशाली नेताओं को मैदान में उतारकर मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस का पूरा फोकस स्थानीय नेतृत्व, संगठन कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नेताओं के भरोसे प्रचार अभियान को आगे बढ़ाने पर दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस के कई बड़े चेहरे अब तक दतिया से दूर

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की ओर से स्थानीय स्तर पर प्रचार अभियान तेज किया गया है, लेकिन पार्टी के कई बड़े नेता अब तक यहां नजर नहीं आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने अभी तक दतिया में चुनाव प्रचार नहीं किया है। उनकी अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दतिया में केवल कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के नामांकन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने अब तक चुनाव प्रचार के लिए क्षेत्र का दौरा नहीं किया है।

इसके अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा और विधायक आरिफ मसूद जैसे नेताओं की भी अब तक प्रचार सभाएं नहीं हुई हैं। कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अंतिम तीन दिनों में दतिया पहुंचकर प्रचार अभियान संभालने की बात कही जा रही है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उपचुनाव में स्थानीय मुद्दों और जनता से सीधे संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर संपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

भाजपा के दिग्गज भी प्रचार से बाहर

दतिया उपचुनाव में भाजपा ने भी अब तक अपने कई बड़े चेहरों को प्रचार मैदान में नहीं उतारा है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वीरेंद्र खटीक जैसे प्रमुख नेताओं की सभाएं अभी तक नहीं हुई हैं।

इसके अलावा प्रदेश सरकार के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता भी प्रचार अभियान में दिखाई नहीं दिए हैं। इनमें उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मंत्री प्रह्लाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह जैसे नाम शामिल हैं।

भाजपा संगठन की ओर से स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर चुनाव प्रचार को गति दी जा रही है। पार्टी का जोर बूथ स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने और मतदाताओं से सीधा संपर्क करने पर है।

हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा अक्सर चुनाव के अंतिम दौर में बड़े नेताओं की सभाएं आयोजित करती है, जिससे चुनावी माहौल को प्रभावित किया जा सके। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा के स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम सामने आने की संभावना बनी हुई है।

अंतिम तीन दिन होंगे बेहद अहम

दतिया उपचुनाव में अब प्रचार का अंतिम दौर शुरू हो चुका है। चुनावी रणनीति के लिहाज से आखिरी तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस दौरान दोनों दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक सकते हैं।

बड़ी जनसभाएं, रोड शो और वरिष्ठ नेताओं के दौरे चुनावी माहौल को बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दल मतदान से पहले अपने प्रमुख नेताओं के कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार उपचुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ बड़े नेताओं की मौजूदगी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने और मतदाताओं पर प्रभाव डालने का काम करती है। ऐसे में अंतिम समय में स्टार प्रचारकों की एंट्री चुनावी मुकाबले को और रोचक बना सकती है।

राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं

दतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की दूरी को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा जताने की रणनीति बता रहे हैं, तो कुछ इसे चुनावी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

हालांकि दोनों दलों की ओर से बड़े नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने स्तर पर चुनाव जीतने का दावा कर रहे हैं।

दतिया सीट का राजनीतिक महत्व भी काफी अधिक माना जाता है। यहां का चुनाव परिणाम दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है। भाजपा जहां अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस सत्ता पक्ष को चुनौती देकर अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी में जुटी है।

स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित प्रचार

बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी के बीच दोनों पार्टियों ने स्थानीय मुद्दों को चुनावी हथियार बनाया है। सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, विकास कार्य और क्षेत्रीय समस्याएं प्रचार अभियान के केंद्र में हैं।

भाजपा अपने सरकार के विकास कार्यों और योजनाओं को जनता के बीच रख रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और सरकार की नीतियों को लेकर मतदाताओं तक पहुंच रही है।

अब देखना होगा कि अंतिम चरण में स्टार प्रचारकों की सक्रियता चुनावी माहौल को कितना प्रभावित करती है। दतिया उपचुनाव में मुकाबला कितना दिलचस्प होगा, इसका फैसला मतदान के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल बड़े नेताओं की दूरी चुनावी चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है।