प्रदर्शनकारियों को दिग्विजय से ‘विजय’ की उम्मीद: शिक्षक अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे पूर्व CM, बोले- मांगें नहीं मानीं तो 5 सितंबर से साथ बैठूंगा अनशन पर
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती 2025 के वर्ग-2 और वर्ग-3 अभ्यर्थियों का पदवृद्धि की मांग को लेकर 16 दिनों से धरना और अनशन जारी है। परीक्षा और रिजल्ट आने के बाद अभ्यर्थी रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि GAD के भर्ती फार्मूले के तहत सभी रिक्त पदों पर एक साथ भर्ती नहीं की जाती। पिछली बार बड़े पैमाने पर शिक्षकों के रिटायरमेंट के कारण पदवृद्धि हुई थी, जबकि इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए चेतावनी दी है कि 5 सितंबर तक मांगें नहीं मानी गईं तो वे खुद उनके साथ अनशन पर बैठेंगे। इससे प्रदर्शनकारियों को अपनी मांग पूरी होने की उम्मीद बढ़ी है।
16 दिनों से नीलम पार्क में धरना-प्रदर्शन, पदवृद्धि की मांग पर अड़े शिक्षक अभ्यर्थी
परीक्षा और रिजल्ट के बाद रिक्त पद बढ़ाने की मांग, दिग्विजय सिंह के समर्थन से बढ़ी उम्मीद
GAD के भर्ती फार्मूले के बीच पदवृद्धि की मांग, 5 सितंबर तक फैसले का इंतजार
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती 2025 के अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार 16वें दिन भी जारी है। वर्ग-2 और वर्ग-3 के शिक्षक अभ्यर्थी भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने यानी पदवृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने और अनशन पर बैठे हैं। अब इस आंदोलन को पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का खुला समर्थन मिल गया है। शुक्रवार को दिग्विजय सिंह एक बार फिर नीलम पार्क स्थित धरना स्थल पहुंचे और आंदोलनरत अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।
दिग्विजय सिंह ने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि वे उनकी मांग को सरकार के सामने उठाएंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर तक पदवृद्धि की मांग पूरी नहीं की गई, तो वह स्वयं अभ्यर्थियों के साथ अनशन पर बैठेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच उम्मीद बढ़ी है।
परीक्षा और रिजल्ट हो चुका, अब पदवृद्धि की मांग
नीलम पार्क में प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती 2025 की परीक्षा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रिजल्ट भी जारी हो चुका है। अब उनकी मांग भर्ती में रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने की है।
अभ्यर्थियों का तर्क है कि प्रदेश में शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। यदि इन रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए तो बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को सरकारी शिक्षक बनने का अवसर मिल सकता है। इसी मांग को लेकर अभ्यर्थी पिछले 16 दिनों से धरना और अनशन कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी में लंबा समय लगाया है। परीक्षा में शामिल होने के बाद परिणाम का इंतजार किया और अब वे चाहते हैं कि सरकार उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर पदों की संख्या बढ़ाकर अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दे।
GAD के फार्मूले के कारण आसान नहीं पदवृद्धि
हालांकि, सरकार के सामने पदवृद्धि को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी कुछ सीमाएं हैं। मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों में रिक्त पदों के विरुद्ध भर्ती के लिए सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD की एक निर्धारित व्यवस्था और फार्मूला है। इसके तहत सभी रिक्त पदों को एक साथ भर्ती के लिए शामिल नहीं किया जाता।
इसके पीछे सरकार की दीर्घकालीन कर्मचारी व्यवस्था को प्रमुख कारण माना जाता है। यदि किसी समय उपलब्ध सभी रिक्त पदों को एक साथ भर दिया जाए, तो भविष्य में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के एक साथ सेवानिवृत्त होने की स्थिति बन सकती है।
यानी सरकार के सामने समस्या दो स्तर पर पैदा हो सकती है। एक तरफ बड़ी संख्या में कर्मचारियों की एक साथ भर्ती करना प्रशासनिक और वित्तीय चुनौती बन सकता है, तो दूसरी तरफ भविष्य में बड़ी संख्या में कर्मचारियों का एक साथ रिटायर होना भी सरकार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया में रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की व्यवस्था अपनाई जाती है।
सरकार के पास पद बढ़ाने का अधिकार
इसके बावजूद शिक्षक भर्ती के रिजल्ट के बाद रिक्त पदों में वृद्धि का विकल्प पूरी तरह बंद नहीं है। सरकार के पास परिस्थितियों के अनुसार भर्ती में अतिरिक्त पद शामिल करने का विशेष अधिकार रहता है। हालांकि, आमतौर पर इस अधिकार का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों या विषम स्थिति में किया जाता है।
यही वजह है कि आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के फैसले पर टिकी है। वे चाहते हैं कि सरकार इस मामले को विशेष परिस्थिति मानते हुए पदों की संख्या बढ़ाए।
पिछली बार क्यों हुई थी पदवृद्धि?
शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच पिछली भर्ती का उदाहरण भी सामने आ रहा है। पिछली बार बड़ी संख्या में शिक्षकों के थोकबंद रिटायरमेंट की स्थिति बनी थी। इसके कारण शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या में वृद्धि की गई थी और भर्ती के माध्यम से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिला था।
इस बार आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भी इसी उदाहरण को सामने रखते हुए सरकार से पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में पिछली बार जैसी बड़े पैमाने पर सेवानिवृत्ति की स्थिति नहीं बताई जा रही है। ऐसे में सरकार के लिए पदवृद्धि का फैसला करना पहले की तुलना में अलग परिस्थिति वाला मामला है।
दिग्विजय सिंह से अभ्यर्थियों को बड़ी उम्मीद
इसी पृष्ठभूमि में दिग्विजय सिंह का आंदोलन स्थल पर पहुंचना अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कुछ दिन पहले भी नीलम पार्क पहुंचकर अभ्यर्थियों से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने उस समय भी उनकी मांगों को जायज बताते हुए सरकार के सामने मुद्दा उठाने की बात कही थी।
शुक्रवार को दोबारा धरना स्थल पर पहुंचकर उन्होंने अभ्यर्थियों की समस्याएं सुनीं और उनके आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांग नहीं मानती है तो वह 5 सितंबर से खुद उनके साथ अनशन पर बैठेंगे।
दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद अभ्यर्थियों के बीच उत्साह बढ़ा है। आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि पूर्व मुख्यमंत्री के सीधे आंदोलन में शामिल होने से सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ेगा और सरकार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।
नीलम पार्क में 16 दिन से आंदोलन
शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन पिछले 16 दिनों से नीलम पार्क में चल रहा है। कई अभ्यर्थी धरने के साथ अनशन भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पदवृद्धि को लेकर सरकार की ओर से ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि अपने रोजगार और भविष्य को लेकर है। वे चाहते हैं कि भर्ती में उपलब्ध रिक्तियों को ध्यान में रखते हुए पदों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे अधिक योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का मौका मिल सके।
अब 5 सितंबर पर टिकी नजर
दिग्विजय सिंह की चेतावनी के बाद अब सभी की नजर 5 सितंबर पर टिक गई है। शिक्षक दिवस के दिन यदि सरकार पदवृद्धि को लेकर कोई सकारात्मक फैसला लेती है तो आंदोलन समाप्त होने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं होता है, तो दिग्विजय सिंह के ऐलान के मुताबिक उनके अभ्यर्थियों के साथ अनशन पर बैठने की संभावना है।
ऐसे में शिक्षक भर्ती 2025 का यह मामला आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। एक ओर प्रशासनिक नियम और GAD का भर्ती फार्मूला है, तो दूसरी ओर पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का दबाव। इनके बीच अब राजनीतिक समर्थन भी खुलकर सामने आ गया है।
फिलहाल अभ्यर्थी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं उन्हें उम्मीद है कि दिग्विजय सिंह के हस्तक्षेप से सरकार पर इतना दबाव बनेगा कि वह पदवृद्धि को लेकर कोई रास्ता निकालेगी। इसी उम्मीद के साथ नीलम पार्क में आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारियों के बीच एक सवाल चर्चा में है—क्या दिग्विजय सिंह उनके लिए ‘विजय’ लेकर आएंगे?
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस