होटल के चैंबर की सफाई के दौरान बड़ा हादसा, दम घुटने से चार लोगों की मौत; एक के बाद एक चैंबर में फंसे सफाईकर्मी, CM मोहन यादव ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को मिलेगी 4-4 लाख की सहायता

मध्य प्रदेश के उज्जैन में देवास रोड पर स्थित होटल श्री गंगा (Hotel Shri Ganga) में शनिवार रात अंडरग्राउंड फूड वेस्ट चैंबर (खाने के कचरे वाले टैंक) की सफाई के दौरान कथित तौर पर जहरीली गैस की चपेट में आने से होटल के चार कर्मचारियों की मौत हो गई।

होटल के चैंबर की सफाई के दौरान बड़ा हादसा, दम घुटने से चार लोगों की मौत; एक के बाद एक चैंबर में फंसे सफाईकर्मी, CM मोहन यादव ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को मिलेगी 4-4 लाख की सहायता

उज्जैन के होटल में दर्दनाक हादसा: चैंबर की सफाई के दौरान दम घुटने से चार लोगों की मौत, बचाने उतरे दो अन्य की हालत बिगड़ी; CM ने 4-4 लाख और होटल संचालक ने 30-30 लाख की मदद देने का किया ऐलान

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। उज्जैन-देवास रोड स्थित श्री गंगा होटल में ओवरग्राउंड चैंबर की सफाई के दौरान दम घुटने से चार लोगों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब सफाई के लिए एक के बाद एक चार लोग चैंबर के अंदर उतरे और जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण बाहर नहीं निकल सके। उन्हें बचाने के लिए चैंबर में उतरे दो अन्य लोग भी जहरीले वातावरण की चपेट में आकर बीमार हो गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद चारों लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, होटल संचालक की ओर से भी प्रत्येक मृतक के परिवार को 30-30 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।

सफाई के लिए चैंबर में उतरे चार लोग, एक के बाद एक फंसते चले गए

जानकारी के अनुसार घटना रात के समय की है। उज्जैन-देवास रोड पर स्थित श्री गंगा होटल में ओवरग्राउंड चैंबर की सफाई का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान सफाई के लिए चार लोग चैंबर के अंदर उतरे। बताया जा रहा है कि अंदर का वातावरण सांस लेने के अनुकूल नहीं था। दम घुटने के कारण एक के बाद एक चारों लोग चैंबर में ही फंसते चले गए। कुछ ही देर में उनकी हालत गंभीर हो गई और वे बाहर निकलने की स्थिति में नहीं रहे।

हादसे के दौरान वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। चार लोगों के चैंबर में फंसने की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही माधव नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू कराया गया। पुलिस और अन्य बचावकर्मियों ने तत्काल अंदर फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया, लेकिन चैंबर की स्थिति और तकनीकी परेशानियों के कारण रेस्क्यू में काफी कठिनाई आई।

कटर मशीन से काटना पड़ा चैंबर का गेट

रेस्क्यू अभियान के दौरान चैंबर का गेट खोलने में परेशानी सामने आई। गेट नहीं खुलने के कारण अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए माधव नगर थाना प्रभारी गजेंद्र पचोरिया ने पास में चल रहे निर्माण कार्य से कटर मशीन मंगवाई। इसके बाद कटर मशीन की सहायता से चैंबर का गेट काटा गया।

चैंबर के अंदर फर्श पर काफी फिसलन थी। इस वजह से बचाव अभियान में जुटे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंदर जाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने में काफी सावधानी बरतनी पड़ी। पुलिस और बचाव दल ने तमाम मुश्किलों के बावजूद अभियान जारी रखा। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद चारों लोगों को बाहर निकाला जा सका।

पुलिसकर्मियों ने CPR देकर बचाने का किया प्रयास

चैंबर से बाहर निकाले जाने के बाद चारों लोगों की हालत बेहद गंभीर थी। पुलिसकर्मियों ने तत्काल उन्हें सीपीआर (CPR) देना शुरू किया। करीब दो मिनट से अधिक समय तक उन्हें जीवन रक्षक प्रक्रिया के माध्यम से बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

मृतकों की पहचान कमलेश तंबोली, नितिन वाहिद, मनोज मीणा और वाहिद के रूप में हुई है। चारों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिजन अस्पताल पहुंच गए। परिवारों में मातम छा गया और हर तरफ चीख-पुकार का माहौल बन गया।

पांचवां सफाईकर्मी घबराहट के कारण बाहर निकला

इस हादसे में पांचवां सफाईकर्मी भी बाल-बाल बच गया। जानकारी के अनुसार चार लोगों के चैंबर में फंसने के बाद हेमराज नाम का पांचवां सफाईकर्मी भी अंदर गया था। हालांकि, कुछ ही देर में उसे घबराहट और बेहोशी जैसा महसूस होने लगा। अपनी तबीयत बिगड़ती देख वह चैंबर से बाहर आ गया। इस वजह से उसकी जान बच गई।

वहीं, अंदर फंसे चार लोगों को बचाने के लिए दो अन्य लोग भी चैंबर में उतरे थे। उनकी भी तबीयत बिगड़ गई। दोनों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। रेस्क्यू अभियान के दौरान एक सब-इंस्पेक्टर के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

एसपी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शर्मा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बचाव अभियान का जायजा लिया और रेस्क्यू टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अस्पताल में भी मौजूद रहे। मृतकों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन शव लेकर अपने घरों के लिए रवाना हुए।

हादसे के बाद होटल परिसर और आसपास के क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई इस बात से हैरान था कि चैंबर की सफाई जैसे काम के दौरान चार लोगों की जान कैसे चली गई। इस घटना ने एक बार फिर बंद चैंबर और सीवर जैसी जगहों पर बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई कार्य कराने के खतरों को उजागर कर दिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताया गहरा दुख

उज्जैन में हुए इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि होटल के चैंबर की सफाई के दौरान चार लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने राज्य शासन की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से आर्थिक मदद मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

होटल संचालक की ओर से 30-30 लाख रुपये देने की घोषणा

हादसे में जान गंवाने वाले चारों लोगों के परिवारों को राहत देने के लिए होटल संचालक की ओर से भी बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया ने बताया कि होटल संचालक की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजन को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

रविवार को चारों मृतकों का पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद परिजन शव लेकर रवाना हो गए। एक ओर जहां परिवार अपने प्रियजनों को खोने के गहरे सदमे में हैं, वहीं दूसरी ओर शासन और होटल संचालक की आर्थिक सहायता की घोषणाओं से प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

उज्जैन की यह घटना कार्यस्थलों पर सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। चैंबर, सीवर टैंक और अन्य बंद स्थानों में ऑक्सीजन की कमी तथा जहरीली गैसों की मौजूदगी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे स्थानों में बिना गैस की जांच, पर्याप्त वेंटिलेशन, सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित बचाव व्यवस्था के किसी व्यक्ति को अंदर नहीं उतारा जाना चाहिए।

इस हादसे में चार लोगों की जान चली गई, जबकि उन्हें बचाने पहुंचे दो अन्य लोग भी बीमार हो गए। घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सफाई कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। अब लोगों की नजर पुलिस और प्रशासन की आगे की जांच पर है, जिससे हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं का पता चल सके।