भड़के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, समाजसेवी को कहा- ‘इतने जूते खाने के बाद भी आ गया’: पुलिस से बोले- हिरासत में लो, पोस्टर दिखाने पर हुआ विवाद
भारतीय जनता पार्टी द्वारा शहर के सुभाष नगर से पाटनीपुरा चौराहे तक 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का आयोजन किया गया था। इस जनसभा और रैली में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विशेष रूप से उपस्थित हुए थे। अपने तीखे तेवरों और बेबाक बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस कार्यक्रम के दौरान मंच से एक ऐसा बयान दे दिया, जिससे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अचानक गर्माहट आ गई है
मंत्री के कड़े रुख और निर्देशों के तुरंत बाद इंदौर पुलिस के अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडेय को कार्यक्रम स्थल से बाहर निकालना शुरू कर दिया। पुलिस बल जब उन्हें वहां से ले जा रहा था, तब सामाजिक कार्यकर्ता लगातार सवाल उठाते रहे कि आखिर उनका कसूर क्या है और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना या तख्ती दिखाना किस तरह का अपराध है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद से ही शहर और प्रदेश के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक समाजसेवी पर गुस्सा जाहिर करने का मामला सामने आया है। कार्यक्रम के दौरान एक पोस्टर लेकर पहुंचे समाजसेवी प्रहलाद पांडे को देखकर मंत्री नाराज हो गए। उन्होंने न केवल समाजसेवी को वहां से हटाने के लिए कहा, बल्कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को उसे हिरासत में लेकर गाड़ी में बैठाने के निर्देश भी दिए। इस दौरान मंत्री की ओर से इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा का वीडियो और बयान चर्चा का विषय बन गया है।
पोस्टर देखते ही नाराज हुए मंत्री
जानकारी के अनुसार, भाजपा की पदयात्रा के दौरान समाजसेवी प्रहलाद पांडे एक पोस्टर लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। पोस्टर पर लिखा था- ‘30 हजार का बल्ब और 33 हजार लीटर फिनाइल, जवाब दो।’ बताया जा रहा है कि यह पोस्टर स्थानीय स्तर पर खर्च और उससे जुड़े सवालों को लेकर मंत्री से जवाब मांगने के उद्देश्य से दिखाया जा रहा था।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की नजर जैसे ही इस पोस्टर पर पड़ी, वह नाराज हो गए। उन्होंने समाजसेवी को वहां मौजूद एक ‘न्यूसेंस’ बताते हुए कहा कि जहां जवाब देना होगा, वहां जवाब दे दिया जाएगा। उन्होंने पांडे को तत्काल वहां से जाने के लिए कहा और चेतावनी दी कि अगर वह नहीं गया तो वहां मौजूद लोग उसे दोबारा जवाब दे सकते हैं।
पुलिस से बोले- इसे थोड़ी देर गाड़ी में बैठा दो
मंत्री का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से कहा कि इसका कागज ले लो और इसे थोड़ी देर गाड़ी में बैठा दो। यह यहां दिखाई नहीं देना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने प्रहलाद पांडे के लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘साला इतने जूते खाने के बाद भी यहां पर जबरदस्ती में आ गया है।’
विजयवर्गीय ने प्रदर्शनकारी को अराजकतावादी लोगों के साथ जुड़ा हुआ भी बताया। मंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया। एक ओर भाजपा कार्यकर्ता पदयात्रा में शामिल थे, वहीं दूसरी ओर पोस्टर के जरिए सवाल उठाने पहुंचे समाजसेवी कोदौरान भड़के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, समाजसेवी को कहा- ‘इतने जूते खाने के बाद भी आ गया’: पुलिस से बोले- हिरासत में लो, पोस्टर दिखाने पर हुआ विवाद लेकर विवाद खड़ा हो गया।
पहले भी मंत्री के घर के बाहर कर चुके हैं प्रदर्शन
प्रहलाद पांडे का नाम इससे पहले भी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े विरोध प्रदर्शन के मामले में सामने आ चुका है। कुछ दिन पहले उन्होंने मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।
इस घटना के बाद एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया था। बताया गया कि विजयवर्गीय ने खुद पत्र लिखकर प्रहलाद पांडे को छुड़वाने के लिए पहल की थी। ऐसे में अब पदयात्रा के दौरान उन्हीं समाजसेवी पर मंत्री की नाराजगी और पुलिस से उन्हें गाड़ी में बैठाने की बात कहे जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
विजयवर्गीय बोले- हिंसा और अराजकता का हर स्तर पर होगा विरोध
पदयात्रा के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने लोकतंत्र, विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के समर्थन में युवाओं की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से युवाओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है।
उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए। विजयवर्गीय ने कहा कि कुछ आंदोलनों के दौरान बिरयानी और पिज्जा बांटे गए थे। उन्होंने सवाल किया कि इन सबका खर्च कौन उठा रहा था और इसके पीछे किसका पैसा लगा हुआ था।
मंत्री ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती है तो उसका स्वागत है, लेकिन हिंसा और अराजकता का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उनके मुताबिक लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा और अव्यवस्था फैलाना उचित नहीं है।
सुभाष नगर से शुरू हुई पदयात्रा, पाटनीपुरा में हुआ समापन
भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा इंदौर के सुभाष नगर चौराहे से शुरू हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, युवा और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। पदयात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पाटनीपुरा चौराहे पर पहुंचकर संपन्न हुई।
इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, भाजपा के प्रदेश प्रभारी बिप्लब देव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
राजनीतिक कार्यक्रम के बीच पोस्टर बना चर्चा का केंद्र
भाजपा की इस पदयात्रा का उद्देश्य लोकतंत्र और विकास के मुद्दों को लेकर पार्टी का पक्ष सामने रखना था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी प्रहलाद पांडे का पोस्टर और उस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की प्रतिक्रिया चर्चा का प्रमुख विषय बन गई।
एक तरफ मंत्री ने हिंसा और अराजकता के खिलाफ विरोध की बात कही, वहीं दूसरी ओर सवाल पूछने पहुंचे समाजसेवी के साथ उनके व्यवहार और इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब यह घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस