GST रिटर्न की डेडलाइन बढ़ाने की मांग, दिवाली के दौरान GSTR-1 और GSTR-3B फाइलिंग में राहत की अपील
दिवाली और भाई दूज के दौरान लगातार छुट्टियों को देखते हुए अक्टूबर 2026 के GSTR-1 और GSTR-3B की ड्यू डेट बढ़ाने की मांग की गई है। 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक में इस पर राहत मिलने की उम्मीद है।
दिवाली की छुट्टियों के बीच GST रिटर्न फाइलिंग में बढ़ेगा दबाव
11 नवंबर है GSTR-1 की निर्धारित अंतिम तारीख
कारोबारियों और टैक्स प्रोफेशनल्स ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग की
7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक में हो सकता है फैसला
डेडलाइन बढ़ने से छोटे-मध्यम टैक्सपेयर्स को मिलेगी राहत
नई दिल्ली। अक्टूबर 2026 महीने के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की निर्धारित तारीखों को लेकर टैक्सपेयर्स और टैक्स प्रोफेशनल्स के सामने त्योहारों के कारण उत्पन्न होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को देखते हुए डेडलाइन बढ़ाने की मांग उठाई गई है। GST काउंसिल से अपील की गई है कि अक्टूबर 2026 के टैक्स पीरियड के लिए GSTR-1 और GSTR-3B दोनों रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथियों में उचित विस्तार किया जाए।
दिवाली और उसके आसपास पड़ने वाले त्योहारों के कारण नवंबर में लगातार छुट्टियों का माहौल रहेगा। ऐसे में कारोबारियों, कंपनियों, अकाउंटिंग टीमों, टैक्स कंसल्टेंट्स और अन्य जीएसटी अनुपालन से जुड़े पेशेवरों के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर रिटर्न तैयार करना और दाखिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
11 नवंबर को GSTR-1 की डेडलाइन
मांग उठाने वालों के मुताबिक, 11 नवंबर 2026 अक्टूबर 2026 टैक्स पीरियड के लिए GSTR-1 दाखिल करने की कानूनी ड्यू डेट है। इसी अवधि में दिवाली और भाई दूज सहित प्रमुख त्योहार पड़ रहे हैं। त्योहारों के दौरान कई व्यापारिक प्रतिष्ठान, कार्यालय और प्रोफेशनल फर्म कुछ दिनों के लिए बंद रहते हैं।
इसका सीधा असर जीएसटी अनुपालन की तैयारियों पर पड़ सकता है। कारोबारियों को बिक्री और खरीद से जुड़े आंकड़े जुटाने, इनवॉइस की जांच करने, खातों का मिलान करने, डेटा को अंतिम रूप देने और रिटर्न दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय की जरूरत होती है। छुट्टियों के दौरान संबंधित कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स की उपलब्धता कम होने से यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कर्मचारियों के घर जाने से बढ़ सकती है परेशानी
त्योहारों के समय देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले कर्मचारी अपने गृह नगर जाना पसंद करते हैं। खासतौर पर दिवाली के दौरान बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में अकाउंट्स, फाइनेंस और टैक्स से जुड़े कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
छोटे और मध्यम कारोबारों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि वहां सीमित संख्या में कर्मचारी अकाउंटिंग और जीएसटी से संबंधित काम संभालते हैं। किसी कर्मचारी के अवकाश पर जाने से पूरे रिटर्न फाइलिंग कार्य में देरी की संभावना बढ़ जाती है।
रिटर्न दाखिल करने से पहले कई स्तरों पर तैयारी
GSTR-1 और GSTR-3B दाखिल करना केवल ऑनलाइन फॉर्म भरने तक सीमित नहीं है। कारोबारियों को संबंधित अवधि के लेनदेन का डेटा तैयार करना, बिक्री और खरीद से संबंधित दस्तावेजों की जांच करना, इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान करना और जरूरी सुधारों को पूरा करना पड़ता है।
टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए भी क्लाइंट्स से समय पर डेटा प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है। यदि कारोबारी प्रतिष्ठान छुट्टियों के कारण बंद हैं या कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं, तो आवश्यक दस्तावेज और आंकड़े समय पर प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।
ऐसे में अंतिम तारीख नजदीक आने पर टैक्स कंसल्टेंट्स और अकाउंटिंग फर्मों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे जल्दबाजी में रिटर्न दाखिल करने के कारण गलतियां होने की आशंका भी बनी रहती है।
7 अक्टूबर को प्रस्तावित GST काउंसिल बैठक पर नजर
इस मांग के बीच GST काउंसिल की अगली बैठक 7 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बैठक के दौरान अक्टूबर टैक्स पीरियड के रिटर्न की समयसीमा पर भी विचार किया जा सकता है।
मांग करने वालों ने काउंसिल से अपील की है कि त्योहारों और लगातार छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए GSTR-1 के साथ-साथ GSTR-3B की अंतिम तारीख भी आगे बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि यदि फैसला समय रहते घोषित कर दिया जाता है तो कारोबारी और टैक्स प्रोफेशनल्स अपनी अनुपालन प्रक्रिया बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर सकेंगे।
समय रहते घोषणा से मिलेगी राहत
डेडलाइन बढ़ाने की मांग का प्रमुख आधार यह है कि यदि समयसीमा में बदलाव की घोषणा पहले ही कर दी जाए तो कारोबारियों को अंतिम समय की भागदौड़ से राहत मिल सकती है। टैक्सपेयर्स अपने कर्मचारियों की छुट्टियों और उपलब्धता के अनुसार काम की योजना बना सकेंगे।
इसके अलावा टैक्स प्रोफेशनल्स भी अलग-अलग ग्राहकों से डेटा प्राप्त करने, खातों की जांच करने और रिटर्न तैयार करने के लिए पर्याप्त समय निर्धारित कर पाएंगे। इससे गलतियों की संभावना कम करने में भी मदद मिल सकती है।
छोटे कारोबारियों पर अधिक असर
जीएसटी अनुपालन में समयसीमा का पालन सभी कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए त्योहारों के दौरान अतिरिक्त दबाव अधिक महसूस किया जा सकता है। कई छोटे प्रतिष्ठानों में मालिक या कुछ चुनिंदा कर्मचारी ही अकाउंटिंग और टैक्स से संबंधित कार्य देखते हैं।
यदि ऐसे कारोबारियों के पास त्योहारों के दौरान सीमित समय और कर्मचारी उपलब्धता रहती है, तो रिटर्न की तैयारी मुश्किल हो सकती है। समयसीमा में उचित विस्तार उन्हें अपने नियमित कारोबार और त्योहारों के बीच बेहतर संतुलन बनाने का अवसर दे सकता है।
लेट फीस और अनुपालन के दबाव से राहत की उम्मीद
समय पर रिटर्न दाखिल नहीं होने की स्थिति में टैक्सपेयर्स को लागू नियमों के अनुसार लेट फीस और अन्य अनुपालन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मांग की जा रही है कि त्योहारों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और GST काउंसिल व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं।
अपील में कहा गया है कि अक्टूबर 2026 टैक्स पीरियड के लिए GSTR-1 और GSTR-3B दोनों की ड्यू डेट बढ़ाने की घोषणा लाखों छोटे और मध्यम टैक्सपेयर्स के लिए राहतकारी कदम हो सकती है।
कारोबारियों को निर्णय का इंतजार
अब निगाहें 7 अक्टूबर को होने वाली प्रस्तावित GST काउंसिल बैठक पर हैं। हालांकि डेडलाइन में बदलाव का निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा ही लिया जाएगा, लेकिन त्योहारों के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए समयसीमा बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है।
यदि सरकार समय रहते फैसला लेकर नई तारीखों की घोषणा करती है, तो कारोबारियों और टैक्स प्रोफेशनल्स को रिटर्न तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। इससे वे बिना अनावश्यक दबाव के अपने जीएसटी अनुपालन की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे और त्योहारों के दौरान कर्मचारियों को भी आवश्यक अवकाश मिल सकेगा।
फिलहाल कारोबारियों और टैक्स प्रोफेशनल्स की नजर GST काउंसिल की बैठक पर टिकी है, जहां अक्टूबर 2026 के GSTR-1 और GSTR-3B की समयसीमा को लेकर कोई राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस