7 मिनट तक लिव-इन पार्टनर को सबके सामने पीटता रहा आरोपी, मौत के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर की पिटाई; गुजरात में कार्रवाई पर उठे सवाल

गुजरात के भावनगर में लिव-इन पार्टनर की हत्या के आरोपी को पुलिस ने घटनास्थल पर रस्सी से बांधकर पीटा। पुलिस ने इसे अपराधियों को कड़ा संदेश देने की कार्रवाई बताया, लेकिन हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के बीच इस पर सवाल उठ रहे हैं।

7 मिनट तक लिव-इन पार्टनर को सबके सामने पीटता रहा आरोपी, मौत के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर की पिटाई; गुजरात में कार्रवाई पर उठे सवाल

हत्या के आरोपी फैज़ल उर्फ़ खटकी को क्राइन सीन रीकंस्ट्रक्शन के दौरान पुलिस ने बेरहमी से पिटाई की। रस्सी से बांधकर बार-बार पीटे जाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस पर गंभीर सवाल उठ खड़े हो गए हैं।

भावनगर में हत्या के आरोपी की पुलिस पिटाई का वीडियो वायरल, कार्रवाई पर उठे सवाल 

भावनगर। गुजरात के भावनगर में लिव-इन पार्टनर काजल बरैया की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी फैजल लखानी की पुलिस द्वारा कथित पिटाई का वीडियो सामने आने के बाद कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में आरोपी को रस्सियों से बांधकर घटनास्थल के आसपास घसीटते और पुलिसकर्मियों द्वारा डंडे से पीटते हुए देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उस समय हुई, जब पुलिस हत्या की वारदात का घटनास्थल पर पुनर्निर्माण करा रही थी।

मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि गुजरात में पुलिस द्वारा आरोपियों के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट करने को लेकर पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। ऐसे में भावनगर में सामने आए वीडियो ने पुलिस के तौर-तरीकों और विभागीय जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।

घटनास्थल पर आरोपी की पिटाई का वीडियो सामने आया

शनिवार को सामने आए वीडियो में हत्या के आरोपी फैजल लखानी को रस्सियों से बंधा हुआ देखा जा सकता है। पुलिसकर्मी उसे घटनास्थल के आसपास ले जाते नजर आते हैं। इसी दौरान कुछ पुलिसकर्मी आरोपी पर डंडे बरसाते दिखाई दे रहे हैं।

बताया गया है कि पुलिस हत्या की घटना का पुनर्निर्माण कराने के लिए आरोपी को घटनास्थल पर लेकर गई थी। इसी दौरान कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या किसी आरोपी को जांच प्रक्रिया के दौरान इस तरह सार्वजनिक रूप से पीटने की अनुमति कानून देता है?

पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए नीलमबाग थाने के पुलिस निरीक्षक डीपी उनाडकट ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया। उनके मुताबिक, हत्या की घटना की क्रूरता और उसके बाद पुलिस की छवि को हुए नुकसान को देखते हुए पुलिस को कड़ा रुख अपनाना पड़ा।

पुलिस ने क्यों बताया जरूरी?

पुलिस निरीक्षक डीपी उनाडकट के अनुसार, घटना के बाद लोगों के बीच यह धारणा बनने लगी थी कि बदमाश महिलाओं और लड़कियों को निशाना बना रहे हैं और पुलिस उन्हें रोकने में असहाय नजर आ रही है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधियों को कड़ा संदेश देना जरूरी होता है।

पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि हत्या की घटना और उसका वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।

हालांकि, पुलिस का यह तर्क अब सवालों के घेरे में है। कानून के जानकारों के बीच यह सवाल उठ सकता है कि किसी अपराध की गंभीरता या पुलिस की छवि को हुए नुकसान के आधार पर आरोपी के साथ शारीरिक हिंसा की जा सकती है या नहीं।

सात साल से साथ रह रहे थे काजल और फैजल

पुलिस के मुताबिक, काजल बरैया और फैजल लखानी करीब सात साल से भावनगर में एक फुटपाथ पर साथ रह रहे थे। दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फैजल के खिलाफ पहले भी लूट समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद फैजल को कथित तौर पर पता चला कि काजल उसके परिचित रवि के साथ रिश्ते में थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।

गुरुवार को विवाद के दौरान फैजल पर काजल और रवि पर हमला करने का आरोप है। हमले में काजल गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे उपचार के लिए सरकारी सर टी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद पुलिस ने शुक्रवार को फैजल लखानी को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

सार्वजनिक जगह पर हुई थी वारदात

पुलिस के अनुसार, घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई थी और कथित हमले के दौरान आरोपी ने काजल को काफी देर तक पीटा। इस घटना से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया था।

पुलिस का दावा है कि घटना की गंभीरता और लोगों के बीच पैदा हुए आक्रोश को देखते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। इसी क्रम में पुलिस उसे घटनास्थल पर लेकर गई थी, जहां वारदात का पुनर्निर्माण कराया जा रहा था।

लेकिन घटनास्थल पर आरोपी के साथ हुई कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

गुजरात में सार्वजनिक पिटाई पर पहले से जारी है सर्कुलर

मामले में गुजरात हाईकोर्ट में चल रही एक स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका का भी उल्लेख सामने आया है। यह मामला सूरत में पुलिस अधिकारियों द्वारा आरोपियों की कथित सार्वजनिक पिटाई से जुड़ा बताया जा रहा है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी की ओर से अदालत को बताया गया था कि गुजरात के गृह विभाग ने 7 मई को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें पुलिस द्वारा आरोपियों के साथ सार्वजनिक रूप से इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।

सर्कुलर में कथित तौर पर आरोपियों को सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक करवाने, घुटनों के बल चलाने, लात मारने या डंडे से पीटने जैसी कार्रवाइयों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बताया गया था।

इसके अलावा, ऐसी घटनाओं में संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की बात भी कही गई थी।

अब भावनगर पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

भावनगर में सामने आए वीडियो ने इसी पुराने दिशा-निर्देश की प्रासंगिकता को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह है कि जब पुलिस विभाग की ओर से आरोपियों को सार्वजनिक रूप से पीटने या अपमानित करने जैसी कार्रवाई पर रोक के निर्देश मौजूद हैं, तो फिर हत्या के आरोपी के साथ कथित तौर पर ऐसा व्यवहार कैसे हुआ?

दूसरा सवाल यह है कि क्या घटनास्थल का पुनर्निर्माण कराते समय आरोपी को रस्सियों से बांधकर इस तरह घसीटना और पीटना जांच प्रक्रिया का हिस्सा था या यह पुलिसकर्मियों की अलग कार्रवाई थी?

तीसरा महत्वपूर्ण सवाल वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि पुलिसकर्मियों ने निर्धारित नियमों और विभागीय निर्देशों का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

अपराध की गंभीरता और कानून का पालन दोनों जरूरी

काजल बरैया की मौत का मामला निश्चित रूप से गंभीर है और यदि आरोपी के खिलाफ हत्या के आरोप साबित होते हैं तो अदालत कानून के अनुसार उसे सजा दे सकती है। लेकिन किसी आरोपी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई भी कानून और निर्धारित प्रक्रिया के दायरे में ही होनी चाहिए।

पुलिस का काम अपराध की जांच करना, सबूत जुटाना और आरोपी को अदालत के सामने पेश करना है। किसी आरोपी को सजा देना अदालत का अधिकार है। ऐसे में भावनगर की घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि गंभीर अपराधों के मामलों में भी पुलिस कार्रवाई कितनी सीमा तक जा सकती है।

फिलहाल वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस घटना की जांच किस स्तर पर कराते हैं और यदि विभागीय निर्देशों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।