MSME के भुगतान संकट पर GSTN आधारित समाधान का प्रस्ताव, Payment Credit Score को मिला समर्थन -चंपालाल बोथरा
MSME और छोटे व्यापारियों को समय पर भुगतान दिलाने के लिए GSTN आधारित Payment Registration Portal और B2B Payment Credit Score का प्रस्ताव सामने आया है। CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चंपालाल बोथरा ने SIDBI के पूर्व उप महाप्रबंधक बी. एल. चांडक के इस सुझाव का समर्थन किया है।
GSTN-आधारित सरल समाधान: देर से भुगतान के बढ़ते संकट का समाधान
MSME और छोटे व्यापारियों के बढ़ते बकाया एवं कार्यशील पूंजी संकट के समाधान के लिए GSTN आधारित Payment Credit Score की पहल का CAIT ने किया समर्थन
बी. एल. चांडक, पूर्व उप महाप्रबंधक, सिडबी (SIDBI)
CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चंपालाल बोथरा ने MSME और छोटे व्यापारियों को समय पर भुगतान न मिलने से उत्पन्न बढ़ते बकाया और कार्यशील पूंजी संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने SIDBI के पूर्व उप महाप्रबंधक बी. एल. चांडक द्वारा GSTN के माध्यम से भुगतान व्यवहार को पारदर्शी बनाने तथा B2B Payment Credit Score विकसित करने के सुझाव का समर्थन किया।
चंपालाल बोथरा ने कहा कि माल एवं सेवाओं की आपूर्ति के बाद भुगतान लंबे समय तक अटकने से व्यापारियों की कार्यशील पूंजी फंस जाती है और उन्हें कारोबार चलाने के लिए महंगे वित्तीय स्रोतों पर निर्भर होना पड़ता है। GSTN में खरीद-बिक्री के इनवॉइस का डेटा उपलब्ध है, लेकिन यदि भुगतान की वास्तविक स्थिति और भुगतान व्यवहार का व्यवस्थित डेटा भी उपलब्ध हो जाए, तो समय पर भुगतान करने वाली तथा लगातार भुगतान में देरी करने वाली फर्मों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि CAIT, बी. एल. चांडक के GSTN आधारित Payment Registration Portal और Payment Credit Score के सुझाव का समर्थन करता है तथा सरकार से इस प्रस्ताव का गंभीरता से अध्ययन कर चरणबद्ध रूप से लागू करने का आग्रह करता है। इससे MSME को बेहतर क्रेडिट सुविधा, Cash-flow-based Lending तथा Receivables के आधार पर वित्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही बैंकों और वित्तीय संस्थानों को वास्तविक भुगतान व्यवहार के आधार पर जोखिम का आकलन करने में सहायता मिलेगी।
प्रस्ताव के तहत GSTN पर एक Payment Registration Portal (PRP) बनाया जा सकता है, जिसमें खरीदार प्रत्येक विक्रेता का मासिक लेजर दर्ज करें। इसमें प्रारंभिक बकाया, खरीद, भुगतान, समायोजन और अंतिम बकाया शामिल होंगे। इस डेटा के आधार पर भुगतान अनुशासन, भुगतान चक्र और बकाया तनाव जैसे संकेतकों से संयुक्त B2B Payment Credit Score तैयार किया जा सकता है।
यह स्कोर सहमति के आधार पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ साझा किया जा सकेगा, जबकि मूल लेजर को DPDP अधिनियम के तहत गोपनीय रखा जाएगा। इसे चरणबद्ध रूप से लागू करते हुए पहले बड़े कारोबार वाली फर्मों को शामिल किया जा सकता है और बाद में इसका विस्तार MSME क्षेत्र तक किया जा सकता है।
चंपालाल बोथरा ने कहा कि भुगतान व्यवहार की पारदर्शिता से व्यापारिक अनुशासन मजबूत होगा और समय पर भुगतान करने वाले व्यापारियों एवं उद्यमियों को बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल का लाभ मिलेगा। यह व्यवस्था MSMED Act और धारा 43B(h) का विकल्प नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक अतिरिक्त डिजिटल आधार होगी।
उन्होंने कहा कि यह सरल, विस्तार-योग्य और राजस्व-सकारात्मक सुधार है। इससे MSME को समय पर भुगतान, बेहतर ऋण सुविधा और कम लागत वाली कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही बैंकों को जोखिम का पूर्व आकलन करने और सरकार को फर्जी इनवॉइस तथा अनियमित व्यापार पर नियंत्रण मजबूत करने में सहायता मिलेगी। भुगतान व्यवहार को दृश्यमान बनाना व्यापारिक अनुशासन और मजबूत B2B ऋण व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस