दिग्विजय सिंह से मिले अतिथि विद्वान, फॉलन आउट पर सरकार को घेरा; शिवराज का काफिला रोक बोले- 2023 में किया वादा पहले पूरा कराइए, नीति बनने तक छंटनी बंद हो

मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों ने नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। उन्होंने भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोका

दिग्विजय सिंह से मिले अतिथि विद्वान, फॉलन आउट पर सरकार को घेरा; शिवराज का काफिला रोक बोले- 2023 में किया वादा पहले पूरा कराइए, नीति बनने तक छंटनी बंद हो

नियमितीकरण और स्थायित्व की नीति बनने तक फॉलन आउट रोकने की मांग, दिग्विजय सिंह ने किया समर्थन, करैरा में सामने आया फॉलन आउट का आदेश, उच्च शिक्षा विभाग ने 15 से 17 सितंबर की जानकारी तलब की

दिग्विजय सिंह से मिले अतिथि विद्वान; फॉलन आउट रोकने की मांग, शिवराज का काफिला रोककर बोले- पहले वादा पूरा कराइए

भोपाल। मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण और नौकरी में स्थायित्व का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। फॉलन आउट प्रक्रिया को तत्काल रोकने और स्थायित्व की नीति बनाने की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों का आंदोलन लगातार जारी है। इसी क्रम में अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के पूर्व में दिए गए आश्वासनों का हवाला देते हुए कहा कि नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।

अतिथि विद्वानों के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने उनकी मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से नियमितीकरण और स्थायित्व को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय करने तथा नीति लागू होने तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग की है।

मंत्री के बंगले के बाहर धरना, आंदोलन ने पकड़ा जोर

मध्य प्रदेश के अतिथि विद्वान मंगलवार से उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के भोपाल स्थित आवास के बाहर धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सरकारी कॉलेजों में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नौकरी की स्थिरता को लेकर लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि सरकार नियमितीकरण अथवा स्थायित्व के लिए स्पष्ट और समयबद्ध नीति बनाए। जब तक यह नीति लागू नहीं होती, तब तक फॉलन आउट की प्रक्रिया रोक दी जाए।

बुधवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि विद्वानों के चार प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक फॉलन आउट प्रक्रिया को वापस लेने या नीति बनने तक इसे रोकने पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद अतिथि विद्वानों का आंदोलन जारी रहा।

करीब 200 अतिथि विद्वानों ने रोका शिवराज का काफिला

बुधवार सुबह आंदोलन कर रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला उस समय रोक लिया, जब वह प्रदर्शन स्थल के पास से गुजर रहा था।

अतिथि विद्वानों ने शिवराज सिंह चौहान को 11 सितंबर 2023 की महापंचायत में दिए गए उनके आश्वासनों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ने फॉलन आउट की समस्या से राहत और अतिथि विद्वानों के भविष्य को सुरक्षित करने की बात कही थी।

अतिथि विद्वानों ने शिवराज के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा कि वे वर्षों से कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में नियमितीकरण और स्थायित्व की नीति बनने तक उन्हें व्यवस्था से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा को दूसरे मुख्यमंत्री को पूरा करना चाहिए। उन्होंने अतिथि विद्वानों से उनकी बात सरकार तक पहुंचाने और इस मामले में प्रयास करने की बात कही।

11 सितंबर 2023 की महापंचायत का दिया हवाला

अतिथि विद्वानों ने दिग्विजय सिंह से मुलाकात के दौरान भी 11 सितंबर 2023 की महापंचायत का जिक्र किया। उनका कहना है कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के हित में कई घोषणाएं की थीं।

2023 में सरकार की ओर से अतिथि विद्वानों के वेतन, भर्ती में अवसर और सेवा संबंधी कई घोषणाएं सामने आई थीं। अतिथि विद्वान अब इन्हीं आश्वासनों को आधार बनाकर फॉलन आउट प्रक्रिया पर रोक की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उस समय भविष्य सुरक्षित करने की बात कही गई थी, लेकिन मौजूदा समय में फॉलन आउट की प्रक्रिया के कारण कई अतिथि विद्वानों के सामने दोबारा रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है।

10 जुलाई 2026 के सम्मेलन का भी उल्लेख

अतिथि विद्वानों ने अपने मांग-पत्र में 10 जुलाई 2026 को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की मौजूदगी में अतिथि विद्वानों की समस्याओं पर चर्चा हुई थी।

अतिथि विद्वानों का दावा है कि उस दौरान नियमितीकरण और स्थायित्व के संबंध में नीति बनाने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही सरकार की ओर से हरियाणा मॉडल से बेहतर व्यवस्था तैयार करने और उसे लागू करने की बात भी कही गई थी।

यही वजह है कि अब आंदोलनकारी सरकार से पूछ रहे हैं कि यदि स्थायित्व की नीति तैयार की जा रही है तो उसके लागू होने तक फॉलन आउट की प्रक्रिया क्यों जारी रखी जा रही है।

उज्जैन में मुख्यमंत्री से मुलाकात का भी हवाला

अतिथि विद्वानों ने 28 अगस्त 2026 को उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया है। आंदोलनकारी महिला अतिथि विद्वानों के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधकर अपनी नौकरी और भविष्य की सुरक्षा की मांग रखी थी।

उनका कहना है कि मुख्यमंत्री से नीति बनने तक फॉलन आउट रोकने का आग्रह किया गया था और उन्हें जल्द प्रक्रिया रोकने का आश्वासन मिलने की बात कही गई थी। हालांकि, अतिथि विद्वानों का कहना है कि इसके बाद भी फॉलन आउट को लेकर स्थिति में बदलाव नहीं आया।

दिग्विजय सिंह बोले- नीति बनने तक फॉलन आउट रोका जाए

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मुलाकात के बाद अतिथि विद्वानों ने बताया कि उन्होंने उनकी मांगों का समर्थन किया है। दिग्विजय सिंह ने सरकार से नियमितीकरण और स्थायित्व की नीति बनाने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने की बात कही है।

साथ ही उनका कहना है कि जब तक यह नीति तैयार होकर लागू नहीं हो जाती, तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकना चाहिए।

अतिथि विद्वानों के मांग-पत्र में भी दो प्रमुख बिंदु सामने रखे गए हैं—पहला, स्थायित्व अथवा नियमितीकरण की नीति के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाए और दूसरा, नीति लागू होने तक फॉलन आउट प्रक्रिया को रोका जाए।

क्या है फॉलन आउट प्रक्रिया?

सरकारी कॉलेजों में जब किसी पद पर नियमित सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति या स्थानांतरण होता है और उसी पद पर अतिथि विद्वान पहले से काम कर रहा होता है, तो संबंधित अतिथि विद्वान की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं। इस प्रक्रिया को फॉलन आउट कहा जाता है।

अतिथि विद्वानों का कहना है कि इसी व्यवस्था के कारण वर्षों से काम कर रहे शिक्षकों के सामने रोजगार की अनिश्चितता बनी रहती है। उनका तर्क है कि जब तक सरकार स्थायित्व की नीति लागू नहीं करती, तब तक उन्हें फॉलन आउट से सुरक्षा मिलनी चाहिए।

सरकार और अतिथि विद्वानों के बीच अब अगली बातचीत पर नजर

इस पूरे मामले में फिलहाल सरकार और आंदोलन कर रहे अतिथि विद्वानों के बीच मतभेद बना हुआ है। एक तरफ अतिथि विद्वान फॉलन आउट रोकने और स्थायित्व की नीति को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं उच्च शिक्षा मंत्री की ओर से फॉलन आउट प्रक्रिया को वापस लेने पर सहमति नहीं बनने की रिपोर्ट सामने आई है।

इसी बीच उच्च शिक्षा विभाग ने 15, 16 और 17 सितंबर को अतिथि विद्वानों से संबंधित जानकारी भी तलब की है। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन कर रहे अतिथि विद्वानों की नजर सरकार के अगले कदम पर है।

फिलहाल अतिथि विद्वानों का आंदोलन भोपाल में जारी है। प्रतिनिधिमंडल की दिग्विजय सिंह से मुलाकात, शिवराज सिंह चौहान के काफिले को रोककर 2023 के आश्वासन की याद दिलाना और उच्च शिक्षा मंत्री से हुई बातचीत के बाद यह मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अतिथि विद्वानों की नौकरी की सुरक्षा और स्थायित्व के सवाल को केंद्र में ले आया है।