जनता से भयभीत है बीजेपी, इसलिए रोक दिए नगरीय निकाय उपचुनाव: जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर साधा निशाना
पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के मूड और जनादेश से पूरी तरह डर चुकी है, इसीलिए उसने नगरपालिका, नगर निगम और नगर पंचायत के उप-चुनावों को निरस्त कर दिया है
नगरीय निकाय उपचुनाव स्थगित होने पर जीतू पटवारी का भाजपा पर हमला, बोले- जनादेश का डर तो चुनाव रोक दिए; जनपद-जिला पंचायत चुनाव जारी रखने पर उठाए सवाल
भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित नगरीय निकायों के उपचुनाव स्थगित किए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने चुनाव टाले जाने के फैसले पर भारतीय जनता पार्टी और प्रदेश की मोहन सरकार पर तीखा हमला बोला है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा को जनता के जनादेश का डर सता रहा है, इसलिए नगरीय निकायों के उपचुनाव को रोक दिया गया है।
जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि जब एक ही प्रदेश में जनपद पंचायत और जिला पंचायत के उपचुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराए जा सकते हैं, तो नगरपालिका, नगर निगम और नगर पंचायत के उपचुनावों को अचानक स्थगित करने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया को लेकर दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
नगरीय निकाय चुनाव स्थगित होने पर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि नगरीय निकायों के उपचुनाव को लेकर निर्वाचन कार्यक्रम पहले ही जारी किया जा चुका था। इसके बाद 7 सितंबर को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगरीय निकायों के उपचुनाव को आगामी आदेश तक स्थगित करने के निर्देश जारी किए गए।
पटवारी का कहना है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद अचानक चुनाव रोकने से प्रदेश की जनता के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर चुनाव स्थगित करने के पीछे कानून-व्यवस्था, अतिरिक्त सुरक्षा बल की जरूरत, बारिश, आपदा राहत कार्य या आगामी त्योहार जैसे कारण हैं, तो क्या इन परिस्थितियों की जानकारी चुनाव कार्यक्रम जारी करने से पहले नहीं थी?
उन्होंने कहा कि यदि यह सभी परिस्थितियां पहले से मौजूद थीं, तो चुनाव की तारीख घोषित करने से पहले उनका आकलन क्यों नहीं किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव स्थगित किए जाने की प्रक्रिया और उसके पीछे बताए जा रहे कारणों पर भी सवाल खड़े किए।
'भाजपा को जनता के जनादेश का डर'
जीतू पटवारी ने भाजपा पर सीधा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि नगरीय निकायों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर होते हैं। ऐसे में भाजपा को यह डर क्यों सता रहा है कि पार्टी के सिंबल पर चुनाव होने पर जनता उसे नकार सकती है?
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को अपने काम, लोकप्रियता और जनसमर्थन पर पूरा भरोसा है तो उसे चुनाव से पीछे हटने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा को जनता के बीच जाने और उसके फैसले का सामना करने का डर है।
पटवारी ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है और किसी भी चुनाव को मनमाने तरीके से रोकना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
'हार दिखे तो चुनाव स्थगित, क्या यही लोकतंत्र है?'
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जब चुनाव अपने पक्ष में दिखाई दें तो तारीख घोषित करो और जब हार सामने नजर आए तो चुनाव ही स्थगित कर दो। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही लोकतंत्र है?
पटवारी ने कहा कि चुनाव किसी राजनीतिक दल की सुविधा के हिसाब से नहीं होने चाहिए। निर्वाचन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित होना लोकतंत्र की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी चुनाव को स्थगित करने की आवश्यकता है तो उसके स्पष्ट और ठोस कारण जनता के सामने रखे जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के उपचुनाव में जनता सीधे राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच फैसला करती है। ऐसे में चुनाव का परिणाम राजनीतिक दलों के लिए भी जनता के बीच उनके समर्थन का संकेत होता है।
निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी उठाए सवाल
जीतू पटवारी ने राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग कोई राजनीतिक दल नहीं है, जिसे सत्ता की सुविधा और राजनीतिक गणित के हिसाब से चुनाव कराने या रोकने का अधिकार हो।
पटवारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता पर जनता का भरोसा लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। चुनाव प्रक्रिया में अचानक बदलाव होने से संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि चुनाव केवल मतदान की तारीख नहीं होते, बल्कि यह जनता के संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ी प्रक्रिया है। इसलिए चुनाव स्थगित करने के फैसले को केवल प्रशासनिक निर्णय मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एक ही प्रदेश में दो अलग-अलग चुनावी व्यवस्था क्यों?
पटवारी ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि जब जनपद पंचायत और जिला पंचायत के उपचुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी हैं, तो नगरीय निकायों के उपचुनाव ही क्यों रोके गए?
उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियां इतनी गंभीर हैं कि चुनाव कराना संभव नहीं है, तो फिर दूसरे स्थानीय निकायों के चुनाव कैसे जारी रह सकते हैं। कांग्रेस नेता ने इसे सरकार और निर्वाचन व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल बताया।
उन्होंने कहा कि चुनावों के लिए सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक मशीनरी, बारिश और त्योहारों जैसी परिस्थितियां किसी एक दिन अचानक पैदा नहीं होतीं। इन सभी पहलुओं का आकलन चुनाव कार्यक्रम तैयार करने से पहले किया जाता है। इसलिए चुनाव घोषित करने के बाद अचानक उन्हें स्थगित करने का निर्णय लोगों के मन में संदेह पैदा करता है।
'जनता सब देख रही है'
जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा चुनाव रोककर अपनी हार के डर को छिपा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी प्रक्रिया को अपनी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से प्रभावित करना चाहती है। हालांकि नगरीय निकायों के उपचुनाव कब होंगे, इसे लेकर फिलहाल अगला आदेश आने का इंतजार है।
पटवारी ने कहा कि चुनाव आज नहीं तो कल होंगे, लेकिन जब जनता अपना फैसला सुनाएगी तब सत्ता की राजनीति और उसके पीछे का पूरा खेल सामने आ जाएगा।
कांग्रेस ने उठाया लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मुद्दा
कांग्रेस ने नगरीय निकाय उपचुनाव स्थगित किए जाने के मुद्दे को अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना दिया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता बनी रहनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि यदि चुनाव स्थगित करने के पीछे वास्तविक प्रशासनिक कारण हैं तो सरकार और निर्वाचन आयोग को उन्हें स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखना चाहिए।
वहीं, जीतू पटवारी के बयान के बाद इस मुद्दे पर प्रदेश की सियासत और तेज होने के आसार हैं। नगरीय निकायों के उपचुनाव कई स्थानीय क्षेत्रों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में चुनाव स्थगित होने से जहां प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की तैयारियां प्रभावित हुई हैं, वहीं अब इसके कारणों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी और चुनाव स्थगित किए जाने के फैसले पर सरकार से जवाब मांगेगी। दूसरी ओर, अब सबकी निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग के अगले आदेश पर हैं कि नगरीय निकायों के उपचुनाव के लिए नई तारीख कब घोषित की जाती है।
फिलहाल नगरीय निकाय उपचुनाव स्थगित होने का मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद बन गया है। कांग्रेस इसे भाजपा के जनादेश के डर से जोड़ रही है, जबकि चुनाव की अगली तारीख और स्थगन के कारणों को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस