कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया पर निकाला गुस्सा, बोले- ‘इंदौर में बाइट देना बंद’, महिला पार्षद विवाद के बाद लिया फैसला
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बनाई दूरी, बीते दिनों महिला नेत्री की बॉडी सेमिंग वाले बयान को लेकर मचा था बवाल।
महिला पार्षद पर टिप्पणी के बाद मीडिया से नाराज विजयवर्गीय, कैमरे से मुंह फेरकर बोले- ‘इंदौर में बाइट देना बंद’
इंदौर। मध्यप्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने मीडिया से दूरी बनाने का ऐलान किया है। इंदौर में आयोजित एक पौधरोपण कार्यक्रम के बाद जब मीडियाकर्मी उनसे बातचीत करने और सवाल पूछने के लिए पहुंचे, तो विजयवर्गीय ने कैमरों की ओर देखकर अपना मुंह फेर लिया और साफ शब्दों में कहा- “इंदौर में बाइट देना बंद।” उनके इस अंदाज का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।
विजयवर्गीय का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले दिनों इंदौर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भाजपा की महिला पार्षद संध्या यादव को लेकर की गई उनकी टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ था। टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हुई थीं। बाद में विजयवर्गीय ने अपने शब्दों पर खेद जताते हुए पार्षद को बेटी जैसा बताया था।
दतूनी पहाड़ी पर पौधरोपण कार्यक्रम में पहुंचे थे विजयवर्गीय
कैलाश विजयवर्गीय 24 सितंबर को इंदौर की दतूनी पहाड़ी पर आयोजित बड़े पौधरोपण अभियान में शामिल हुए थे। यहां करीब 25 हजार पौधे लगाने के अभियान की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में दादा गुरु महाराज भी मौजूद रहे। विजयवर्गीय ने इस अवसर पर पौधों की देखभाल को लेकर भी संदेश दिया और कहा कि पेड़ों को बच्चों की तरह पाल-पोसकर बड़ा करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उनका फोकस पर्यावरण और पौधरोपण अभियान पर रहा। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब मीडियाकर्मी मंत्री से बातचीत के लिए आगे बढ़े तो स्थिति अचानक बदल गई।
कैमरा देखकर मुंह फेरा, बोले- इंदौर में बाइट देना बंद
कार्यक्रम के बाद मीडिया ने विजयवर्गीय से बातचीत करने की कोशिश की। मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल पूछने के लिए संपर्क किया, लेकिन मंत्री ने कैमरे की ओर देखने के बजाय अपना मुंह फेर लिया।
इसी दौरान उन्होंने कहा- “इंदौर में बाइट देना बंद।”
मंत्री का यह छोटा-सा बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, महिला पार्षद से जुड़ी टिप्पणी को मीडिया में प्रमुखता से दिखाए जाने को लेकर विजयवर्गीय नाराज बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उन्होंने इंदौर की मीडिया को एक साल तक बाइट नहीं देने की बात कही है।
महिला पार्षद को लेकर टिप्पणी से शुरू हुआ था विवाद
पूरा मामला उस समय सामने आया था जब इंदौर में विकास कार्यों से जुड़े एक कार्यक्रम में विजयवर्गीय मंच से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय भाजपा महिला पार्षद संध्या यादव के काम और सक्रियता की चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद इंदौर-5 के विधायक महेंद्र हार्डिया की ओर देखते हुए विजयवर्गीय ने पहले उनसे संबंधित टिप्पणी की। इसके बाद उन्होंने महिला पार्षद की शारीरिक बनावट को लेकर टिप्पणी कर दी।
वीडियो सामने आने के बाद इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विभिन्न रिपोर्टों में इसे बॉडी शेमिंग से जोड़कर देखा गया और कांग्रेस नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया।
मंच पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया और विजयवर्गीय के खुद हंसने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद मामला केवल इंदौर तक सीमित नहीं रहा और मध्यप्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया।
विवाद बढ़ने के बाद विजयवर्गीय ने जताया था खेद
विवाद बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि संध्या यादव उनकी बेटी जैसी हैं और उन्होंने उन्हें गोद में खिलाया है। उन्होंने अपनी टिप्पणी को लेकर खेद भी जताया।
वहीं, संध्या यादव की ओर से भी विजयवर्गीय के समर्थन में प्रतिक्रिया सामने आई थी। उन्होंने विजयवर्गीय को पितातुल्य बताया और कहा कि उनके और विजयवर्गीय के बीच पारिवारिक संबंध हैं।
इस सफाई के बावजूद विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी रहीं। मीडिया में इस पूरे घटनाक्रम की लगातार कवरेज हुई। अब विजयवर्गीय द्वारा इंदौर में मीडिया को बाइट नहीं देने की बात इसी पूरे घटनाक्रम की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
मीडिया से दूरी बनाने का फैसला चर्चा में
राजनीतिक नेताओं और मीडिया के बीच सार्वजनिक कार्यक्रमों में बातचीत आम तौर पर खबरों का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। मंत्री स्तर के नेता जब किसी कार्यक्रम में पहुंचते हैं तो मीडियाकर्मी स्थानीय मुद्दों, सरकार के फैसलों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर सवाल करते हैं।
ऐसे में विजयवर्गीय का कैमरे के सामने आकर बाइट देने से इनकार करना चर्चा का विषय बन गया है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि उनका यह रुख महिला पार्षद से जुड़े विवाद के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है।
हालांकि, विजयवर्गीय ने अपने बयान में किसी विशेष मीडिया संस्थान का नाम नहीं लिया। उन्होंने केवल “इंदौर में बाइट देना बंद” कहा। इसलिए उनके इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज
विजयवर्गीय का मीडिया से मुंह फेरने वाला वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग उनके बयान को पिछले विवाद से जोड़कर देख रहे हैं।
वहीं, इस पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि विजयवर्गीय पहले ही महिला पार्षद से जुड़े बयान पर खेद व्यक्त कर चुके हैं। ऐसे में अब मीडिया से दूरी बनाने की उनकी बात ने मामले को एक नया एंगल दे दिया है।
दतूनी पहाड़ी पर आयोजित कार्यक्रम मूल रूप से पौधरोपण अभियान को लेकर था, लेकिन कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत नहीं करने का उनका अंदाज ही खबरों में प्रमुखता से आ गया।
एक बयान से फिर सुर्खियों में मंत्री
कैलाश विजयवर्गीय अपने राजनीतिक बयानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिए जाने वाले वक्तव्यों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार भी एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद उनका छोटा-सा बयान सुर्खियों में है।
महिला पार्षद की टिप्पणी के बाद पहले विवाद, फिर सफाई और खेद तथा अब मीडिया से बाइट देने से इनकार—इन घटनाओं ने पूरे मामले को लगातार चर्चा में बनाए रखा है।
फिलहाल विजयवर्गीय के “इंदौर में बाइट देना बंद” कहने के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या वे आगे भी इंदौर में मीडिया से दूरी बनाए रखेंगे या यह फैसला केवल मौजूदा विवाद के बीच लिया गया अस्थायी कदम है। उपलब्ध रिपोर्टों में उनके एक साल तक इंदौर मीडिया को बाइट नहीं देने की बात भी सामने आई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सार्वजनिक मंचों पर नेताओं की टिप्पणियों, उनके प्रसारण और मीडिया कवरेज को लेकर बहस को सामने ला दिया है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस