मध्य प्रदेश में शराब टेंडर पर बड़ा सियासी बवाल: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, 2012-13 से अब तक के टेंडरों की उच्च स्तरीय जांच की मांग
मध्य प्रदेश में शराब टेंडर और आबकारी नीति को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखे जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कांग्रेस को शराब माफियाओं का सबसे बड़ा मददगार करार दिया है।
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर शराब टेंडर प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में शराब कारोबार से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक प्रदेश में शराब के टेंडरों की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पटवारी ने शराब कारोबार में कुछ चुनिंदा कंपनियों के लंबे समय से प्रभावी बने रहने पर सवाल उठाते हुए पूरी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पिछले कई वर्षों से प्रदेश के शराब कारोबार में कुछ कंपनियों और कारोबारी समूहों का प्रभाव लगातार बना हुआ है। उनके मुताबिक सामने आए दावों में चार समूहों के पास प्रदेश के शराब बाजार का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा होने की बात कही गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है और कई जिलों में वर्षों तक उन्हीं कंपनियों को लगातार टेंडर मिलते रहे हैं, तो इसे केवल संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वर्षों से एक ही कंपनियों के प्रभाव पर सवाल
जीतू पटवारी ने आरोपों के आधार पर कहा कि शराब कारोबार जैसे बड़े राजस्व वाले क्षेत्र में यदि सीमित संख्या में कंपनियों का लंबे समय तक दबदबा बना रहता है, तो यह सरकार और संबंधित विभाग के लिए गंभीर जांच का विषय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया का मूल उद्देश्य अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है, ताकि सरकार को बेहतर राजस्व प्राप्त हो और किसी एक कारोबारी समूह का अनुचित प्रभाव स्थापित न हो।
पटवारी ने कहा कि यदि अलग-अलग वर्षों में टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनियों की संख्या, उनकी बोलियों और अंतिम चयन के आंकड़ों में लगातार एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है, तो उसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर जांच कराई जाए।
ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने के बावजूद यदि टेंडर के परिणामों में पुराने पैटर्न की पुनरावृत्ति दिखाई दे रही है, तो सरकार को प्रदेश की जनता के सामने इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
पटवारी के मुताबिक केवल टेंडर प्रक्रिया का ऑनलाइन होना ही पर्याप्त नहीं है। वास्तविक पारदर्शिता तब मानी जाएगी, जब पात्र कंपनियों को समान अवसर मिले, बोली प्रक्रिया निष्पक्ष हो और अंतिम चयन के पीछे स्पष्ट एवं सार्वजनिक मापदंड हों।
उन्होंने कहा कि यदि ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद वही कंपनियां बार-बार अलग-अलग जिलों में टेंडर हासिल कर रही हैं, तो इस पूरे पैटर्न का डेटा आधारित विश्लेषण कराया जाना चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि लगातार टेंडर मिलने के पीछे सामान्य कारोबारी प्रतिस्पर्धा है या किसी प्रकार की मिलीभगत की संभावना।
2022 के कथित घटनाक्रम का भी किया जिक्र
पटवारी ने अपने पत्र में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से जुड़े वर्ष 2022 के कथित घटनाक्रम का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय जिस कथित कारोबारी पैटर्न के टूटने की बात सामने आई थी, यदि उसके बाद फिर से उसी प्रकार की स्थिति दिखाई दे रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि संबंधित वर्षों के टेंडर रिकॉर्ड, कंपनियों की भागीदारी, बोली प्रक्रिया और चयन के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शराब कारोबार में कंपनियों की हिस्सेदारी और टेंडर प्राप्त करने के पैटर्न में समय के साथ क्या बदलाव आया।
सरकार के सामने पटवारी का सीधा सवाल
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि सरकार शराब कारोबार से हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करने वाले कारोबारियों के हितों की रक्षा कर रही है या प्रदेश के राजस्व और जनता के हितों की।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी किसी कारोबारी समूह को संरक्षण देना नहीं, बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि शराब कारोबार से सरकार को मिलने वाला राजस्व प्रदेश के विकास और जनकल्याण से जुड़ा है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली गतिविधि की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
पटवारी ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, कंपनियों या अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सभी प्रमुख टेंडरों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से वर्ष 2012-13 से अब तक प्रदेश में शराब के सभी प्रमुख टेंडरों का स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस ऑडिट में केवल वर्तमान वित्तीय वर्ष या हाल के कुछ वर्षों को शामिल करने के बजाय पूरे निर्धारित कालखंड की जांच की जानी चाहिए।
पटवारी ने मांग की कि सरकार यह पूरा विवरण सार्वजनिक करे कि किन कंपनियों ने किन-किन जिलों में कितने वर्षों तक शराब के टेंडर प्राप्त किए। इसके साथ ही प्रत्येक टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों की संख्या और उनके द्वारा लगाई गई बोलियों की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा कि कंपनियों की पात्रता, तकनीकी एवं वित्तीय शर्तें तथा अंतिम चयन के आधार को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे जनता और संबंधित पक्ष यह समझ सकेंगे कि टेंडर प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई और किन कारणों से किसी विशेष कंपनी का चयन हुआ।
कार्टेल और मिलीभगत की आशंका की जांच
पटवारी ने यह भी मांग की कि यह जांच की जाए कि कहीं किसी कंपनी या कंपनियों के समूह ने शराब बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित तो नहीं किया। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत या कार्टेल की आशंका की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर कंपनियों के बीच आपसी समझ, बोली प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश या अधिकारियों और कंपनियों के बीच किसी प्रकार का गठजोड़ सामने आता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जांच का दायरा केवल कंपनियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। संबंधित विभागीय अधिकारियों और निर्णय लेने वाले स्तर की भूमिका की भी आवश्यकता पड़ने पर जांच की जानी चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
सार्वजनिक हो पूरा टेंडर डेटा
पटवारी ने सरकार से शराब टेंडर से संबंधित अधिक से अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उनके अनुसार जिलावार टेंडर, कंपनियों की भागीदारी, बोली की राशि, पात्रता, चयन के कारण और टेंडर की अवधि जैसी जानकारी सार्वजनिक होने से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक किसी एक कंपनी या समूह को टेंडर मिलने का कारण यदि पूरी तरह वैध और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया है, तो सरकार को उसके दस्तावेज और आंकड़े सार्वजनिक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता है तो वह जांच के माध्यम से सामने आनी चाहिए।
राजनीतिक मुद्दा बनने के साथ बढ़ी पारदर्शिता की मांग
मध्य प्रदेश में शराब कारोबार से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पर पटवारी के सवालों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरमा सकता है। कांग्रेस ने सरकार से पूरे मामले में स्पष्ट जवाब और स्वतंत्र जांच की मांग की है। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब निगाहें राज्य सरकार के रुख पर हैं कि वह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की इस मांग पर क्या कदम उठाती है। यदि सरकार उच्चस्तरीय ऑडिट या स्वतंत्र जांच कराती है, तो पिछले वर्षों के टेंडरों में कंपनियों की भागीदारी और चयन का विस्तृत रिकॉर्ड सामने आ सकता है।
फिलहाल पटवारी की मांग का केंद्र बिंदु यही है कि शराब टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो, प्रतिस्पर्धा बनी रहे और प्रदेश के राजस्व एवं जनता के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। कांग्रेस ने सरकार से वर्ष 2012-13 से अब तक के प्रमुख टेंडरों की स्वतंत्र जांच कराकर पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस