बिजली बचत के साथ सूरत की दीपावली की रौनक और उत्साह भी बनाए रखें: चम्पालाल बोथरा

सूरत में बिजली बचत के साथ दीपावली की रौनक बनाए रखने की अपील की गई है। CAIT के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट एवं टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के नेशनल प्रेसिडेंट चम्पालाल बोथरा ने बाजारों की सजावटी रोशनी को 50% घटाने के बजाय उसके संचालन का समय निर्धारित करने का सुझाव दिया। उन्होंने SMC, राज्य सरकार और कपड़ा बाजार संगठनों से मिलकर व्यावहारिक व्यवस्था बनाने की अपील की

बिजली बचत के साथ सूरत की दीपावली की रौनक और उत्साह भी बनाए रखें: चम्पालाल बोथरा

बिजली कटौती और उत्पादन में कमी के बीच बाजारों की रोशनी को 50% घटाने के बजाय समय निर्धारित करें; दीपावली की सजावट में सहयोग करे SMC और मार्केट कार्यकारिणी 

सूरत, देश में बिजली की मांग और कोयले की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही चिंताओं के बीच सूरत के कपड़ा उद्योग, वीविंग,  मिलों, प्रोसेस हाउस और अन्य वैल्यू एडिशन इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई औद्योगिक इकाइयों में एक शिफ्ट का उत्पादन बंद रखने जैसी स्थिति है। ऐसे समय में बिजली बचत आवश्यक है, लेकिन इसके साथ सूरत की दीपावली की पारंपरिक भव्यता, व्यापारिक उत्साह और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

CAIT के राष्ट्रीय चेयरमैन, टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी एवं FOSTTA के पूर्व महासचिव चम्पालाल बोथरा ने कहा कि सूरत के लगभग 240 कपड़ा बाजार केवल व्यापारिक केंद्र नहीं हैं, बल्कि दीपावली के अवसर पर शहर की रौनक, उत्साह और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख प्रतीक भी हैं। हर वर्ष बाजारों की आकर्षक रोशनी और सजावट सूरत की अलग पहचान बनाती है। सूरत महानगरपालिका (SMC) भी शहर की सड़कों, ब्रिजों और सार्वजनिक स्थलों पर रोशनी की व्यवस्था कर दीपावली के उत्सव को भव्य स्वरूप देती रही है। बाजारों की बेहतर सजावट के लिए विभिन्न अवसरों पर प्रोत्साहन और पुरस्कार भी दिए जाते रहे हैं।

चम्पालाल बोथरा ने कहा कि गुजरात में इस माह GST संग्रह में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि का जो आंकड़ा सामने आया है, वह व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक योगदान के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। वहीं दूसरी ओर, कपड़ा उद्योग मंदी, धीमे कारोबार और भुगतान में देरी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। अनेक व्यापारी इस बार अपेक्षित व्यापार नहीं कर पाए हैं। ऐसे माहौल में दीपावली का उत्साह व्यापारियों और उद्योग जगत में नई ऊर्जा तथा सकारात्मक उम्मीद जगाने का माध्यम बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि बिजली बचत की आवश्यकता है, तो बाजारों की सजावटी लाइटों के संचालन का समय निर्धारित किया जा सकता है। बाजारों में शाम से रात 12 बजे तक रोशनी रखकर उसके बाद लाइटें बंद की जा सकती हैं। दीपावली, धनतेरस और रामाश्यामा के प्रमुख अवसरों पर बाजारों की सजावट और रोशनी को लेकर अनावश्यक नकारात्मक माहौल बनाने के बजाय व्यावहारिक समाधान अपनाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दीपावली के बाद लाभ पंचम तक अनेक औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन बंद या सीमित रहने से बिजली की खपत में स्वाभाविक कमी आएगी। ऐसे में बाजारों की सजावट के लिए आवश्यक बिजली की खपत को लेकर संतुलित व्यवस्था बनाई जा सकती है। इसका अर्थ बिजली की बर्बादी को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि बचत और उत्सव—दोनों के बीच व्यावहारिक संतुलन स्थापित करना है।

चम्पालाल बोथरा ने सूरत महानगरपालिका, राज्य सरकार और कपड़ा बाजारों के संगठनों से अपील की कि वे मिलकर बाजारों की दीपावली सजावट को प्रोत्साहित करें। जहां आवश्यक हो, वहां रोशनी के समय और बिजली खपत में उचित कटौती की जाए, लेकिन सभी बाजारों में 50 प्रतिशत रोशनी घटाने जैसी एकतरफा सोच के स्थान पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाए।

उन्होंने कहा कि सूरत की दीपावली केवल रोशनी का आयोजन नहीं, बल्कि व्यापारियों की मेहनत, परिवारों की खुशियों, रोजगार और शहर की समृद्धि से जुड़ा पर्व है। बाजारों में जगमगाहट से ग्राहकों का उत्साह बढ़ता है और व्यापारिक वातावरण में सकारात्मकता आती है। वर्तमान मंदी के दौर में इस सकारात्मकता का विशेष महत्व है।

अंत में उन्होंने कहा कि बिजली की बचत भी हो, बाजारों की रौनक भी बनी रहे और सूरत की दीपावली पूरे देश के लिए खुशियों, ऊर्जा और व्यापारिक उत्साह का उदाहरण बने। मां लक्ष्मी की कृपा से सूरत फिर नई उमंग के साथ आगे बढ़े और शहर की समृद्धि एवं प्रगति की परंपरा निरंतर मजबूत होती रहे।