मन की बात’ कार्यक्रम के बाद मंत्री सिलावट का घेराव, पेयजल संकट से परेशान रहवासियों ने खोला मोर्चा; बोले- बोरिंग में पानी नहीं

इंदौर में मन की बात कार्यक्रम में रविवार को शामिल होने पहुंचे मंत्री तुलसी सिलावट को रहवासियों ने घेर लिया। लोगों ने क्षेत्र में बनी पेयजल समस्या को लेकर अपनी परेशानी सामने रखी।

मन की बात’ कार्यक्रम के बाद मंत्री सिलावट का घेराव, पेयजल संकट से परेशान रहवासियों ने खोला मोर्चा; बोले- बोरिंग में पानी नहीं

रविवार को मन की बात कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे मंत्री तुलसीराम सिलावट को रहवासियों ने घेर लिया। उनका कहना था कि बोरिंग में पानी नहीं आ रहा है। उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। सिलावट ने एक-दो दिन में बोरिंग कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद रहवासियों का आक्रोश दूर हुआ

पानी की किल्लत पर मंत्री तुलसी सिलावट का घेराव, ‘मन की बात’ कार्यक्रम के बाद भड़का रहवासियों का गुस्सा

इंदौर। सांवेर विधानसभा क्षेत्र के तलावली चांदा में रविवार को प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मंत्री तुलसी सिलावट को स्थानीय रहवासियों के विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग पानी की समस्या को लेकर मंत्री के सामने पहुंच गए और क्षेत्र में लंबे समय से बनी पेयजल समस्या का तत्काल समाधान कराने की मांग की। रहवासियों का कहना था कि इलाके में बोरिंग होने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है और कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

रहवासियों के विरोध और मंत्री से बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पेयजल संकट के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में परेशानी हो रही है। उनका कहना था कि जब क्षेत्र में बोरिंग की व्यवस्था मौजूद है, तो उसमें पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की है।

‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे मंत्री

रविवार को मंत्री तुलसी सिलावट तलावली चांदा में कार्यकर्ता आशीष बिरथरे के घर आयोजित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जैसे ही मंत्री घर से बाहर निकलने की तैयारी में थे, बड़ी संख्या में स्थानीय रहवासी वहां जमा हो गए।

लोगों ने मंत्री को घेरकर क्षेत्र की पेयजल समस्या बताई। रहवासियों ने कहा कि पानी की समस्या कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि लंबे समय से लोग इससे परेशान हैं। उनका आरोप था कि बोरिंग में पानी नहीं आ रहा है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकलने की बात

घटनाक्रम के दौरान रहवासी मंत्री के घर के बाहर ही जमा रहे। बताया गया कि मंत्री करीब एक घंटे तक बाहर नहीं निकले। इस दौरान स्थानीय पार्षद और मंत्री के बेटे ने लोगों को समझाने का प्रयास किया।

हालांकि, रहवासी अपनी मांग पर कायम रहे। उनका कहना था कि उन्हें आश्वासन नहीं बल्कि पानी की समस्या का तत्काल समाधान चाहिए। लोगों ने मंत्री के सामने अपनी परेशानी विस्तार से रखी और बोरिंग में पानी उपलब्ध कराने की मांग की।

जब स्थिति बनी रही तो बाद में मंत्री तुलसी सिलावट स्वयं बाहर आए और रहवासियों से बातचीत की। उन्होंने लोगों की शिकायतें सुनीं और पानी की समस्या को दूर करने का आश्वासन दिया।

मंत्री बोले- 1-2 दिन में करवाएंगे बोरिंग

रहवासियों ने मंत्री से स्पष्ट तौर पर कहा कि इलाके में लगे बोरिंग में पानी नहीं आ रहा है। इससे लोगों को पीने के पानी के साथ-साथ घरेलू जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायत सुनने के बाद मंत्री तुलसी सिलावट ने लोगों को भरोसा दिलाया कि 1-2 दिन में बोरिंग करवाने की व्यवस्था की जाएगी। मंत्री के आश्वासन के बाद मौके पर मौजूद रहवासी शांत हुए।

लोगों का कहना था कि यदि जल्द पानी की समस्या का समाधान हो जाता है तो उन्हें काफी राहत मिलेगी। वहीं, मंत्री के आश्वासन के बाद तत्काल विरोध की स्थिति समाप्त हो गई।

विरोध के दौरान बनाए गए वीडियो

पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो भी बनाए। इन वीडियो में स्थानीय लोगों और मंत्री के बीच बातचीत तथा पानी की समस्या को लेकर विरोध का माहौल दिखाई देने की बात सामने आई है।

वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इस घटना की चर्चा तेज हो गई। रहवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को सामने रखने के लिए वीडियो बनाए, ताकि उनकी शिकायत और क्षेत्र की स्थिति लोगों तक पहुंच सके।

वीडियो बनाने को लेकर भी विवाद की स्थिति

मंत्री के सामने अपनी समस्या रखते समय कुछ लोग वीडियो बना रहे थे। इसी दौरान वीडियो बनाने को लेकर भी विवाद की स्थिति बनने की बात सामने आई है। आरोप है कि मंत्री के बेटे बंकीम सिलावट ने कुछ लोगों को वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया।

मौके पर बने वीडियो में रहवासियों और मंत्री के परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत होती दिखाई देने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के अलग-अलग हिस्सों को लेकर सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पार्षद पर अभद्रता के आरोप भी सामने आए

पेयजल समस्या को लेकर हुए विवाद के बीच क्षेत्रीय पार्षद राकेश सोलंकी को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। कुछ रहवासियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ बातचीत के दौरान पार्षद की ओर से कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।

इस बातचीत की एक रिकॉर्डिंग सामने आने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही उसमें सुनाई देने वाली आवाज की आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में लगाए गए आरोपों को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।

पानी की समस्या पर रहवासियों ने मांगा स्थायी समाधान

रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र में पानी की समस्या को केवल अस्थायी व्यवस्था से दूर नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि बोरिंग होने के बावजूद पानी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में स्थायी समाधान की जरूरत है।

स्थानीय लोगों ने मंत्री के सामने अपनी परेशानी रखते हुए कहा कि पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए उन्हें लगातार परेशान होना पड़ रहा है। गर्मी हो या बारिश, घरेलू कामकाज और पीने के पानी की जरूरत रोज बनी रहती है। ऐसे में क्षेत्र में पर्याप्त जल व्यवस्था होना जरूरी है।

अब 1-2 दिन में समाधान पर रहेगी नजर

मंत्री तुलसी सिलावट द्वारा 1-2 दिन में बोरिंग करवाने का आश्वासन दिए जाने के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर इस पर रहेगी कि पानी की समस्या का समाधान कितनी जल्दी होता है।

रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के बाद सामने आया यह घटनाक्रम स्थानीय स्तर पर पेयजल व्यवस्था को लेकर लोगों की नाराजगी को सामने लाता है। फिलहाल मंत्री के आश्वासन के बाद तत्काल विरोध शांत हो गया है, लेकिन रहवासी समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

यदि तय समय में बोरिंग की व्यवस्था हो जाती है और लोगों को पानी उपलब्ध होने लगता है, तो लंबे समय से चली आ रही समस्या से उन्हें राहत मिल सकती है। वहीं, यदि समस्या बनी रहती है तो रहवासी दोबारा अपनी मांग को लेकर अधिकारियों के सामने पहुंच सकते हैं।