कोसमी में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में 35 से अधिक गांवों के आदिवासी भोपाल पहुंचेंगे, CM मोहन यादव से मिलकर रखेंगे पक्ष; पट्टे, मुआवजे और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग

सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई के विरोध में आदिवासी परिवार आंदोलन कर रहे हैं। हजारों आदिवासी सीहोर से भोपाल तक पैदल मार्च कर रहे हैं। इसमें महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी शामिल हैं।

कोसमी में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में 35 से अधिक गांवों के आदिवासी भोपाल पहुंचेंगे, CM मोहन यादव से मिलकर रखेंगे पक्ष; पट्टे, मुआवजे और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग

सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी गुरुवार को भोपाल पहुंचेंगे।

सीहोर। जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी गुरुवार को भोपाल पहुंचेंगे। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ अपना पक्ष रखेंगे और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाएंगे। कोसमी में वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में पिछले तीन दिनों से आदिवासियों का धरना जारी है।

11 अक्टूबर को हुई थी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

वन विभाग ने 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए गए। कार्रवाई के दौरान एक कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया। इसके बाद प्रभावित परिवारों और आदिवासी समाज में नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी क्षेत्र में रहकर खेती और जंगल से जुड़े संसाधनों के जरिए अपना जीवनयापन कर रहे हैं।

शिवराज चौहान भी पहुंचे थे कोसमी

मामले को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पीड़ित आदिवासी परिवारों से मिलने कोसमी पहुंचे थे। उन्होंने वन विभाग की कार्रवाई को अत्याचार की पराकाष्ठा बताया था। चौहान ने प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनीं और कार्रवाई के विरोध में धरना भी दिया था। इसके बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।

बैनर-तख्तियां लेकर भोपाल के लिए निकले आदिवासी

गुरुवार को बड़ी संख्या में आदिवासी बैनर और तख्तियां लेकर अपनी मांगों के समर्थन में आगे बढ़ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की तख्तियों और बैनर पर सरकार से न्याय की मांग और कार्रवाई के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े नारे लिखे हैं। आदिवासी समाज का कहना है कि वे अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री के सामने रखना चाहते हैं।

जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग

आंदोलन में शामिल रमेश बारेला ने बताया कि उनकी प्रमुख मांग है कि कोसमी में मकान तोड़ने की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों को पद से हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों पर आदिवासी परिवार वर्षों से खेती कर रहे हैं, उन्हें जमीन के पट्टे दिए जाएं।

बेघर परिवारों के लिए आवास और भोजन की मांग

आदिवासी समाज ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल रहने, भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके साथ ही मकान और फसलों के नुकसान का मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है। रमेश बारेला का कहना है कि आदिवासी परिवार बाहर से आकर यहां नहीं बसे हैं, बल्कि पीढ़ियों से इसी वन क्षेत्र में रहते आए हैं। जंगल और खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। मकान टूटने के बाद 12 परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।

35 से अधिक गांवों में खेती रोकने का आरोप

आदिवासी समाज का आरोप है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। उनका कहना है कि खेती पर निर्भर परिवारों के सामने अब आजीविका का संकट पैदा हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन और खेती से जुड़े दस्तावेजों को भी प्रशासन के सामने रखा जाएगा।

कई गांवों के आदिवासी आंदोलन में शामिल

आदिवासी समाज ने इटावा खुर्द, जामुल झील पानी, पांगरी, छापरी, कोसमी, सनकोटा, नवलगांव, भीलखेड़ा, कुरी, बसंतपुर, लावापानी, बोरपानी, डोंगला पानी, बेड़ापानी, सिराली, बावड़ी खेड़ा, अमीरगंज, सुरई, खजूरी, आमाझिर, चतरकोटा, ठीकरी खेड़ा, यारनगर, मथार, भूरीटेक कावड़, ढाबा, पाट तलाई, भिलाई, मोगरा खेड़ा, भूराखेड़ा, सेवनिया, मंजाखेड़ी छाप, मोगली भुराट, गाडरीपुरा, झोलियापुरा और बीलपाटी समेत कई गांवों का जिक्र किया है।

मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे जमीन और कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज

आदिवासी समाज का कहना है कि भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने पूरे मामले की जानकारी रखी जाएगी। प्रदर्शनकारी जमीन पर अपने अधिकार, वर्षों से खेती करने और मकान तोड़े जाने से हुए नुकसान से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए और जमीन से जुड़े विवाद का स्थायी समाधान निकाला जाए।

मकान टूटने के बाद बढ़ा विवाद

कोसमी में हुई कार्रवाई के बाद से ही वन विभाग और आदिवासी समाज के बीच विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ वन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं आदिवासी परिवार अपने लंबे समय से चले आ रहे निवास और खेती के आधार पर अधिकार की मांग कर रहे हैं। अब 35 से अधिक गांवों के लोगों के भोपाल पहुंचने से मामला सरकार के सामने सीधे तौर पर उठने की संभावना है।