बीना में बनेगी पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री...सालाना 22 लाख टन प्रोडक्शन होगा: इंडिया केम-2026 में शामिल हुए CM मोहन यादव ने मुंबई में दी जानकारी

मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बीना को नए औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंडिया केम-2026 में वैश्विक निवेशकों को प्रदेश में निवेश का न्योता देते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

बीना में बनेगी पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री...सालाना 22 लाख टन प्रोडक्शन होगा: इंडिया केम-2026 में शामिल हुए CM मोहन यादव ने मुंबई में दी जानकारी

बीना में ₹50 हजार करोड़ की पेट्रोकेमिकल परियोजना से हर साल 22 लाख टन से अधिक उत्पाद तैयार होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में इंडिया केम-2026 में बताया कि इससे उद्योगों को कच्चा माल और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

भोपाल। मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी की जा रही है। सागर जिले के बीना में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस परियोजना के माध्यम से हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य बताया गया है। इससे न केवल प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होगा, बल्कि प्लास्टिक, पैकेजिंग, दवा, कपड़ा और वाहन निर्माण जैसे क्षेत्रों को भी आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में आयोजित इंडिया केम-2026 में भाग लेते हुए मध्य प्रदेश में पेट्रोकेमिकल उद्योग की संभावनाओं और निवेश के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का जोर ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विकसित करने पर है, जिनसे बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को भी लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद प्रदेश में लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया है। सरकार का उद्देश्य निवेश प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलना और प्रदेश में उत्पादन, रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना है।

बीना की परियोजना से कई उद्योगों को मिलेगा कच्चा माल

बीना में विकसित की जा रही डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना को मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। पेट्रोकेमिकल उत्पाद आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होते हैं। इनका उपयोग प्लास्टिक के विभिन्न उत्पादों, पैकेजिंग सामग्री, कपड़ा निर्माण, दवा उद्योग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में किया जाता है।

यदि परियोजना के निर्धारित उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप काम आगे बढ़ता है, तो इससे प्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर बन सकते हैं। स्थानीय स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध होने से संबंधित उद्योगों को आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने में सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही नए औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और सहायक इकाइयों की स्थापना की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

पेट्रोकेमिकल उद्योग का विस्तार केवल बड़े संयंत्रों तक सीमित नहीं रहता। इससे पैकेजिंग, प्लास्टिक उत्पाद निर्माण, औद्योगिक उपकरण, परिवहन, भंडारण और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में बीना की परियोजना को प्रदेश में औद्योगिक निवेश की व्यापक संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, परियोजना का वास्तविक आर्थिक प्रभाव उत्पादन शुरू होने, स्थानीय उद्योगों की भागीदारी, निवेश की प्रगति और रोजगार सृजन जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

बीना से आष्टा तक पेट्रोकेमिकल उद्योगों के विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए बिजली, पानी, जमीन और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार राज्य को निवेश के लिए अनुकूल स्थान बनाने के उद्देश्य से औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार कर रही है।

बीना की परियोजना के अलावा विजयपुर में गेल के गैस प्रसंस्करण ढांचे और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना से भी औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं और औद्योगिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश में रसायन, गैस तथा पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाएं भी निवेशकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में स्थापित होने वाली इकाइयों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों और उद्योगों को अपने संचालन में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

तामोट और बिलोवा में प्लास्टिक पार्क से छोटे उद्योगों को मिलेगा अवसर

पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में निवेश के साथ-साथ राज्य सरकार प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर जिले के बिलोवा में 93 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं।

इन पार्कों का उद्देश्य प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित छोटे तथा मध्यम उद्योगों को एक व्यवस्थित औद्योगिक क्षेत्र उपलब्ध कराना है। ऐसे उद्योग विभिन्न प्रकार के घरेलू उत्पाद, पैकेजिंग सामग्री, औद्योगिक उपकरणों के हिस्से और अन्य उपयोगी वस्तुओं का निर्माण कर सकते हैं।

प्लास्टिक पार्क जैसे औद्योगिक केंद्रों से छोटे उद्यमियों को उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर श्रमिकों, तकनीकी कर्मचारियों और परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना रहती है।

यदि इन क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश आता है और उद्योगों को बाजार तथा कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता मिलती है, तो प्रदेश में विनिर्माण गतिविधियों को मजबूती मिल सकती है। इससे बड़े उद्योगों और छोटे उद्यमों के बीच आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

पीएम मित्रा पार्क से कपड़ा उद्योग को बढ़ावा

मध्य प्रदेश में कपड़ा उद्योग के विकास पर भी सरकार का ध्यान है। मुख्यमंत्री ने पीएम मित्रा पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से कपड़ा क्षेत्र में प्रदेश की भागीदारी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

कपड़ा उद्योग में कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन लागत, बिजली, परिवहन और बाजार तक पहुंच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से बनने वाले कुछ उत्पाद सिंथेटिक फाइबर और अन्य संबंधित औद्योगिक सामग्रियों के लिए उपयोगी होते हैं। ऐसे में पेट्रोकेमिकल तथा कपड़ा उद्योगों का विकास व्यापक औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है।

राज्य में कपड़ा उत्पादन से जुड़ी इकाइयों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इस क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक इकाइयों के साथ छोटे उद्यमों, कारीगरों और सहायक व्यवसायों की भागीदारी महत्वपूर्ण रहती है।

निवेशकों को सुविधाएं देने की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है। निवेशकों को बिजली, पानी और जमीन जैसी सुविधाएं रियायती दरों पर उपलब्ध कराने के साथ औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों के अनुसार आधारभूत ढांचा विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत स्पष्टता, समय पर अनुमतियां, परिवहन सुविधाएं और प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को परियोजनाएं स्थापित करने और उनका संचालन करने में आवश्यक सहयोग मिले।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद घोषित निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में किए जा रहे प्रयास भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। प्रस्तावित निवेशों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने से निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक उत्पादन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश अलग-अलग चरण हैं। परियोजनाओं की स्थापना, निर्माण कार्य, उत्पादन शुरू होने और रोजगार के आंकड़ों के आधार पर ही उनके प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

2040 तक एक ट्रिलियन डॉलर के उद्योग का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने इंडिया केम-2026 में भारत के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वर्ष 2014 में भारत का रसायन एवं पेट्रोकेमिकल बाजार लगभग 120 अरब डॉलर का था, जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में करीब एक लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का भी उल्लेख किया।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के बीच भारत के पास औद्योगिक विकास के नए अवसर विकसित करने की संभावना है। ऐसे समय में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना और निवेश को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2040 तक देश के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्य प्रदेश भी इस लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देने के लिए तैयार है।

रोजगार और औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर रहेगी नजर

बीना की पेट्रोकेमिकल परियोजना और प्रदेश में विकसित की जा रही अन्य औद्योगिक सुविधाओं से निवेश तथा उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही निर्माण कार्यों, तकनीकी सेवाओं, परिवहन, रखरखाव और सहायक उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी है।

प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण होगा कि बड़े औद्योगिक निवेश के साथ स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण मिले और छोटे-मध्यम उद्यमों को भी विकास की प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिले। इससे औद्योगिक विस्तार का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है।

कुल मिलाकर, बीना की 50 हजार करोड़ रुपये की पेट्रोकेमिकल परियोजना मध्य प्रदेश की औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विजयपुर, आष्टा, तामोट, बिलोवा और पीएम मित्रा पार्क जैसी पहलों के साथ राज्य सरकार रसायन, प्लास्टिक, कपड़ा और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ाने पर जोर दे रही है। अब इन योजनाओं की सफलता परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति, वास्तविक निवेश, उत्पादन क्षमता के उपयोग और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से तय होगी।

अनुप्रिया पटेल ने सुरक्षा और गुणवत्ता पर दिया जोर

केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रसायन उद्योग में सुरक्षा, गुणवत्ता और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े मुद्दों पर बात की। उन्होंने बताया कि खतरनाक रसायनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख दुर्घटना संभावित औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले पांच वर्षों में करीब 3,000 इकाइयों को इस पहल के दायरे में लाने का लक्ष्य है। अब तक 26 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगभग 2,500 कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि रसायनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश लागू किए जा रहे हैं। हालांकि, इनके प्रभाव को छोटे और मध्यम उद्योगों पर भी ध्यान में रखा जा रहा है। उनके अनुसार, विभाग ने 38 गुणवत्ता नियंत्रण आदेश वापस लिए हैं और भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों को अनिवार्य बनाने के लिए 37 आदेश जारी किए हैं। पटेल ने खतरनाक कचरे के निपटान और गहरे समुद्र में अपशिष्ट छोड़ने से जुड़े नियमों पर भी उद्योग जगत की चिंताओं का उल्लेख किया।

महाराष्ट्र में रसायन उद्योग के लिए बनेगी नई नीति

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो रही है। सभी राज्य अधिक निवेश लाकर देश के आर्थिक विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में करीब 3,600 रसायन उद्योग काम कर रहे हैं। देश के रसायन क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन में राज्य की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत और रसायन क्षेत्र के निर्यात में 17 प्रतिशत है। इस उद्योग से राज्य में करीब तीन लाख रोजगार मिलने की बात भी उन्होंने कही।

फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार रसायन उद्योग के लिए अलग नीति तैयार कर रही है, जिसे नवंबर के पहले सप्ताह में जारी करने की उम्मीद है। राज्य सरकार वाढवण बंदरगाह के आसपास 2,500 से 5,000 एकड़ जमीन पर बड़ा रसायन उद्योग क्षेत्र विकसित करने की दिशा में भी काम करना चाहती है।

उन्होंने मेथनॉल और एसिटिक एसिड जैसे रसायनों के आयात पर निर्भरता कम करने तथा दवा निर्माण में उपयोग होने वाले सक्रिय औषधीय घटकों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई।

मुंबई में इंडिया केम-2026 का शुभारंभ

मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर ‘केमिकल फ्रेटरनिटी रिपोर्ट’ पुस्तिका और फिक्की तथा ईवाई की ओर से तैयार ज्ञान पुस्तिका का विमोचन किया गया। आयोजन में देश-विदेश के रसायन, पेट्रोकेमिकल, पॉलिमर और कृषि रसायन उद्योगों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इंडिया केम का यह 14वां संस्करण है। इसमें रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में निवेश, नई तकनीक, नवाचार, गुणवत्ता, सुरक्षा और वैश्विक व्यापार की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है।