राहुल गांधी 13 दिन में दूसरी बार MP आएंगे: 1 अक्टूबर को बालाघाट पहुंचेंगे, मृत आदिवासी बच्चों के परिजनों से करेंगे मुलाकात
राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट आएंगे और बैहर-बिरसा क्षेत्र में मृत बैगा आदिवासी बच्चों के परिजनों से मिलेंगे। कांग्रेस इस दौरे के माध्यम से प्रदेश में आदिवासियों की सुरक्षा और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे को उठाएगी।
एक अक्टूबर को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बालाघाट आ रहे हैं। वह मृतक आदिवासी बच्चों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। बालाघाट में अभी तक 30 बच्चों की मौत हो चुकी है।
बालाघाट। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 1 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के दौरे पर पहुंचेंगे। इस दौरान वे उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात करेंगे, जिनके बच्चों की हाल ही में बीमारी के चलते मौत हुई है। राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है।
राहुल गांधी करीब 13 दिनों के भीतर दूसरी बार मध्यप्रदेश पहुंचेंगे। इससे पहले 19 सितंबर को उन्होंने इंदौर में छात्रों के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। अब उनका अगला दौरा बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों का है।
बालाघाट में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला
बालाघाट जिले के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पिछले कुछ समय से बच्चों के बीमार पड़ने और मौत की घटनाएं सामने आई हैं। अलग-अलग रिपोर्टों और स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी में 30 से अधिक बच्चों की मौत का दावा किया गया है।
बच्चों में बुखार, कमजोरी, शरीर पर दाने, सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण सामने आने की बात कही गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों तक पहुंचीं और बीमार बच्चों की जांच शुरू की गई।
कई बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे, जांच और उपचार की व्यवस्था भी की गई।
इलाज में देरी को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि प्रभावित आदिवासी परिवारों तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच सकीं और इलाज में देरी के कारण स्थिति गंभीर होती गई।
विपक्ष का कहना है कि यदि बीमारी के शुरुआती दौर में ही प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जाता तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
हालांकि, प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य टीमों की मौजूदगी और लगातार निगरानी किए जाने की जानकारी दी गई है। दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रही है।
नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुंचना रही चुनौती
बालाघाट का प्रभावित क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के कारण संवेदनशील माना जाता रहा है। दूरस्थ और जंगल से जुड़े गांवों तक सरकारी टीमों की पहुंच आसान नहीं रही है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने एक चुनौती ग्रामीणों का स्वास्थ्य टीमों पर भरोसा कायम करना भी रही। बताया गया कि पहले कुछ इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों को देखकर ग्रामीण उनसे दूरी बना लेते थे।
अब प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा स्थिति में सुधार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी बढ़ी है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीम भेजकर बच्चों की जांच और इलाज किया जा रहा है।
बीमारी के कारण को लेकर भी सवाल
बच्चों की मौत के मामले में बीमारी के वास्तविक कारण को लेकर भी कई सवाल हैं। कुछ मामलों में मलेरिया, खसरा, संक्रमण, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित बच्चों की जांच और आवश्यक परीक्षण कराए गए हैं। अलग-अलग बच्चों में अलग-अलग लक्षण पाए जाने की वजह से पूरे मामले को किसी एक बीमारी से जोड़कर देखना आसान नहीं है।
इसी कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि बच्चों की मौत का मुख्य कारण क्या रहा और किन परिस्थितियों ने बीमारी को गंभीर बनाया।
1 अक्टूबर को जगला गांव जाएंगे राहुल गांधी
राहुल गांधी के दौरे का कार्यक्रम तय होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जानकारी के अनुसार राहुल गांधी 1 अक्टूबर को महाराष्ट्र के गोंदिया पहुंचेंगे। इसके बाद वे बालाघाट के जगला गांव जाएंगे।
यहां वे मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेंगे और उनके हालात जानेंगे। राहुल गांधी स्थानीय लोगों से भी बातचीत कर सकते हैं। इसके बाद मीडिया से बातचीत का कार्यक्रम है।
दौरे के बाद राहुल गांधी दिल्ली रवाना होंगे।
इससे पहले भी उठाया गया था मामला
राहुल गांधी से पहले अभिजीत दिपके भी बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात की थी और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए थे।
उनके दौरे के दौरान कुछ स्थानों पर विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनी थी। इसके बाद बालाघाट में बच्चों की मौत का मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया।
सरकार से जवाब मांग रहा विपक्ष
बच्चों की मौत को लेकर विपक्ष सरकार से कई सवाल पूछ रहा है। विपक्ष जानना चाहता है कि बीमारी के शुरुआती संकेत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कितनी तेजी से कार्रवाई की और प्रभावित परिवारों को समय पर उपचार क्यों नहीं मिल पाया।
साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने के लिए सरकार की क्या योजना है।
दूसरी ओर प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती, जांच और उपचार की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
राहुल गांधी के दौरे पर रहेगी नजर
अब 1 अक्टूबर को राहुल गांधी के बालाघाट पहुंचने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रमुखता से उठ सकता है। मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात के दौरान राहुल गांधी स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनेंगे और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति की जानकारी लेंगे।
इस दौरे में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे बच्चों की मौत का वास्तविक कारण, प्रभावित परिवारों को मिला उपचार और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम रहेंगे।
बालाघाट के आदिवासी इलाकों में हुई बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर उपचार उपलब्ध कराने की जरूरत को भी सामने ला दिया है। अब राहुल गांधी के दौरे के बाद इस मामले में सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस