चिकासी-मुहाना बेतवा पुल पर बड़ा हादसा टला, स्टेयरिंग फेल होने से रेलिंग तोड़ नदी की ओर बढ़ी रोडवेज बस
चिकासी-मुहाना बेतवा नदी पुल पर शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा टल गया। दिल्ली से महोबा जा रही रोडवेज बस का अचानक स्टेयरिंग फेल हो गया, जिससे चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका। अनियंत्रित बस पुल की रेलिंग तोड़ते हुए नदी की ओर बढ़ गई। चालक ने किसी तरह बस को रोक लिया, जिससे बस बेतवा नदी में गिरने से बच गई। बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। घटना के बाद यात्रियों में दहशत फैल गई। हादसे ने रोडवेज बसों की तकनीकी जांच और पुल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्टेयरिंग फेल होते ही बेकाबू हुई बस, रेलिंग तोड़कर नदी की ओर बढ़ी
चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, बेतवा में गिरने से बची बस
पुल पर मची चीख-पुकार, कुछ मीटर पहले रुकी रोडवेज बस
उरई। चिकासी-मुहाना बेतवा नदी पुल पर शुक्रवार सुबह उस समय यात्रियों की सांसें थम गईं, जब दिल्ली से महोबा जा रही रोडवेज बस का अचानक स्टेयरिंग फेल हो गया। स्टेयरिंग फेल होने के बाद चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस पुल की रेलिंग से टकराकर उसे तोड़ते हुए नदी की ओर बढ़ गई। कुछ ही पलों में बस पुल से नीचे जाने की स्थिति में पहुंच गई। हालांकि चालक ने किसी तरह बस को रोक लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया और बस में सवार यात्रियों की जान बच गई।
जानकारी के अनुसार, रोडवेज बस संख्या यूपी 78 जेएन 8754 शुक्रवार सुबह दिल्ली से यात्रियों को लेकर महोबा की ओर जा रही थी। बस अपने निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए चिकासी-मुहाना स्थित बेतवा नदी के पुल पर पहुंची थी। इसी दौरान अचानक बस का स्टेयरिंग फेल हो गया। स्टेयरिंग ने काम करना बंद किया तो चालक ने तत्काल बस को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन तेज गति और पुल की स्थिति के कारण बस पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया।
स्टेयरिंग फेल होते ही बिगड़ा बस का संतुलन
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्टेयरिंग फेल होने के बाद बस अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग की तरफ बढ़ने लगी। चालक ने बस को रोकने और दिशा नियंत्रित करने की काफी कोशिश की, लेकिन बस रेलिंग से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पुल की रेलिंग टूट गई और बस का अगला हिस्सा नदी की दिशा में पहुंच गया।
बस को पुल के किनारे इस तरह देखकर यात्रियों में दहशत फैल गई। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि अगले कुछ सेकंड में क्या होने वाला है। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और बस के भीतर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्री अपनी सीटों से उठकर सुरक्षित स्थान की ओर जाने का प्रयास करने लगे।
कुछ मीटर और आगे बढ़ती तो नदी में समा सकती थी बस
घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बस बेतवा नदी में गिरने की स्थिति तक पहुंच गई थी। अगर चालक समय रहते बस को रोकने में सफल नहीं होता तो बस पुल से नीचे नदी में गिर सकती थी। ऐसी स्थिति में बड़ा जनहानि वाला हादसा हो सकता था।
चालक ने किसी तरह बस को नियंत्रित करते हुए रोक दिया। बस रुकने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। इसके बाद यात्रियों को सुरक्षित तरीके से बस से बाहर निकाला गया। हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
मौके पर जुटे ग्रामीण और राहगीर
बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी आसपास के लोगों को हुई तो बड़ी संख्या में ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंच गए। पुल पर बस को क्षतिग्रस्त स्थिति में देखकर लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों ने बस में सवार यात्रियों की मदद की और उन्हें सुरक्षित बाहर निकलने में सहयोग किया।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसा बेहद गंभीर हो सकता था। पुल की रेलिंग टूटने के बाद बस नदी की तरफ बढ़ गई थी। गनीमत रही कि बस पूरी तरह पुल से नीचे नहीं गई और समय रहते रुक गई। हादसे के बाद काफी देर तक पुल पर लोगों के बीच घटना को लेकर चर्चा होती रही।
यात्रियों में दिखी दहशत
बस में सवार यात्रियों के लिए यह घटना किसी डरावने अनुभव से कम नहीं थी। अचानक स्टेयरिंग फेल होने के बाद बस के अनियंत्रित होने से यात्रियों को कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला। पुल की रेलिंग टूटने और बस के नदी की ओर जाने के बाद यात्रियों को लगा कि अब बड़ा हादसा होने वाला है।
बस रुकने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। कई यात्रियों ने भगवान का शुक्रिया अदा किया कि बस नदी में नहीं गिरी। हादसे के बाद यात्रियों में परिवहन व्यवस्था और बस की तकनीकी स्थिति को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली।
बसों की तकनीकी जांच पर उठे सवाल
इस घटना ने रोडवेज बसों की तकनीकी जांच को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों की नियमित रूप से जांच किया जाना जरूरी है। विशेष रूप से स्टेयरिंग, ब्रेक, टायर और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सों की जांच में किसी तरह की लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
यात्रियों का कहना है कि लंबी दूरी की बसों को सड़क पर उतारने से पहले उनकी तकनीकी स्थिति की अच्छी तरह जांच होनी चाहिए। यदि बस का स्टेयरिंग रास्ते में अचानक फेल हो जाए तो चालक के लिए उसे नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। शुक्रवार की घटना में भी यही स्थिति देखने को मिली।
पुल पर सुरक्षा को लेकर भी चिंता
बेतवा नदी पर बने चिकासी-मुहाना पुल पर हुई इस घटना के बाद पुल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की रेलिंग वाहनों को नदी में गिरने से बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि रेलिंग मजबूत और पर्याप्त सुरक्षा वाली हो तो दुर्घटना की स्थिति में वाहन को रोकने में मदद मिल सकती है।
स्थानीय लोगों ने पुल की रेलिंग की स्थिति की जांच कराने और जहां आवश्यकता हो वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पुल पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है, इसलिए यहां सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
जांच के बाद सामने आएगी घटना की पूरी वजह
फिलहाल प्रारंभिक तौर पर बस का स्टेयरिंग फेल होना हादसे की वजह बताया जा रहा है। हालांकि स्टेयरिंग किस तकनीकी खराबी के कारण फेल हुआ और बस की फिटनेस की स्थिति क्या थी, इसकी जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
परिवहन विभाग को घटना का संज्ञान लेते हुए बस की तकनीकी स्थिति की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी है कि बस का फिटनेस प्रमाणपत्र और निर्धारित तकनीकी जांच समय पर हुई थी या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जरूरत होगी।
बाल-बाल बचे दर्जनों यात्री
चिकासी-मुहाना बेतवा पुल पर शुक्रवार सुबह हुई यह घटना एक बड़े हादसे की चेतावनी भी है। बस पुल की रेलिंग तोड़कर नदी की ओर बढ़ चुकी थी और कुछ ही क्षणों में स्थिति भयावह हो सकती थी। चालक की कोशिश और समय रहते बस रुक जाने से दर्जनों यात्रियों की जान बच गई।
फिलहाल सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की जानकारी है। घटना के बाद यात्रियों को दूसरे साधन से आगे भेजने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने राहत जताते हुए कहा कि अगर बस
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस