राम मंदिर दान मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, जांच पर उठाए सवाल; यूपी सरकार को नई SIT बनाने का निर्देश
अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में CJI ने बड़ा आदेश दिया है। उन्होंने किसी IPS अधिकारी की अगुवाई में SIT का फिर से गठन करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। राम मंदिर के दान मामले की जांच सही तरीके से पूरी हो और तार्किक नतीजा सामने आए।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय नहीं, बल्कि आपराधिक कानून के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का है। अदालत की टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई SIT के गठन को मंजूरी दे दी है, जिसमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
सोमवार दोपहर करीब 3:30 बजे हुई सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मौजूदा जांच व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए नए सिरे से SIT बनाई जानी चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि जांच टीम का नेतृत्व एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करें, ताकि जांच को निष्पक्ष तरीके से तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, “हम केवल सावधान करना चाहते हैं। इस मामले में राजनीति न करें। पहली नजर में यह दंड कानून के तहत अपराध का मामला लगता है। इसकी निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूरी ईमानदारी से जांच होनी चाहिए। जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए। बस हमारी यही बात है।”
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे उत्तर प्रदेश सरकार से चर्चा कर नई SIT के लिए अधिकारियों के नाम प्रस्तुत करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत सहित अन्य वकील उपस्थित रहे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई SIT के गठन को मंजूरी दे दी। जानकारी के अनुसार, नई टीम में पहले शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और विशेष सचिव नीलरतन कुमार को नहीं रखा जाएगा। उनकी जगह एक डीआईजी और एक एसएसपी स्तर के आईपीएस अधिकारी को जांच टीम में शामिल किया जाएगा। यह SIT पहले से दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की जांच करेगी और 30 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि मौजूदा SIT के पास इतने जटिल वित्तीय मामले की जांच के लिए आवश्यक फोरेंसिक विशेषज्ञता और संसाधन नहीं हैं। साथ ही, बिना एफआईआर दर्ज किए जांच शुरू करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। याचिका में कहा गया कि यदि जांच विधिसम्मत तरीके से नहीं हुई तो बाद में जुटाए गए साक्ष्यों की कानूनी वैधता पर विवाद खड़ा हो सकता है।
याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के समर्थन में आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के कथित मिलावटी घी मामले का भी उल्लेख किया। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित SIT को हटाकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के नेतृत्व में नई जांच टीम बनाने का निर्देश दिया था। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में भी स्वतंत्र और विशेषज्ञ जांच की मांग की।
यह मामला अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के कथित गबन या चोरी से जुड़ा है। मामले के सामने आने के बाद से ही विपक्षी दल सरकार पर हमलावर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब इस मामले की जांच नए सिरे से और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में होगी।
अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में भी जांच प्रक्रिया पूरी तरह कानून के दायरे में और निष्पक्ष होनी चाहिए। अब सबकी निगाहें नई SIT की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय कर सकती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस