यूपी राज्यसभा चुनाव में बड़ा खेल: दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन खारिज, 10 सीटों पर बीजेपी-सपा के 10 उम्मीदवार ही मैदान में; रिजल्ट लगभग साफ!

UP Rajya Sabha Chunav के 10 सीटों पर अब चुनाव की जरूरत नहीं पड़ेगी. दस सीटों के लिए 10 ही उम्मीदवार बचे हैं. ऐसे में इन सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा होगी.

यूपी राज्यसभा चुनाव में बड़ा खेल: दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन खारिज, 10 सीटों पर बीजेपी-सपा के 10 उम्मीदवार ही मैदान में; रिजल्ट लगभग साफ!

यूपी में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने वाले दोनों निर्दलीय का नामांकन रद हो गया। ऐसे में अब भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब लगभग निर्विरोध होता दिखाई दे रहा है। नामांकन पत्रों की जांच के बाद दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों ओंकारनाथ चौरसिया और कांते सायना के नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए हैं। इसके साथ ही 10 सीटों के लिए अब केवल 10 वैध उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आठ और समाजवादी पार्टी (सपा) के दो उम्मीदवार शामिल हैं।

यदि 9 अक्टूबर तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया, तो सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो जाएगा। ऐसी स्थिति में 16 अक्टूबर को मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आधिकारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा 9 अक्टूबर को की जाएगी।

12 उम्मीदवारों ने दाखिल किए थे नामांकन

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 रिक्त सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। बीजेपी की ओर से आठ, सपा की ओर से दो और दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने पर्चा भरा था। मंगलवार 8 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच की गई।

जांच के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी ओंकारनाथ चौरसिया और कांते सायना के नामांकन पत्र वैध नहीं पाए गए। दोनों के पर्चे खारिज होने के बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अब सीटों की संख्या और वैध उम्मीदवारों की संख्या बराबर हो गई है।

ऐसे में चुनावी मुकाबले की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। हालांकि, अंतिम रूप से निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

बीजेपी के आठ उम्मीदवार मैदान में

बीजेपी ने इस बार राज्यसभा के लिए उत्तर प्रदेश से आठ नए चेहरों को मैदान में उतारा है। पार्टी ने राज्य के मंत्री धर्मपाल सिंह, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया है।

बीजेपी उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तथा प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था।

पार्टी ने इस बार सामाजिक समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा है। उम्मीदवारों की सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग, दलित, ब्राह्मण और ठाकुर समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके अलावा दो महिला उम्मीदवारों को भी राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है।

मौजूदा सांसदों की जगह नए चेहरों पर दांव

बीजेपी के उम्मीदवारों के चयन को कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने अपने सभी आठ मौजूदा सदस्यों को दोबारा राज्यसभा भेजने के बजाय नए चेहरों पर भरोसा जताया है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को इस बार दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। बीजेपी के इस फैसले को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वर्ष 2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले राज्यसभा उम्मीदवारों के जरिए पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश की है।

बीजेपी के उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर भी ध्यान दिया गया है। माना जा रहा है कि पार्टी का लक्ष्य संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों को मजबूत करना है।

सपा के दो उम्मीदवार

समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा की दो सीटों के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है।

सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में काफी समय से चल रही थी। माना जा रहा था कि यदि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो 10वीं सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो सकता था।

हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संकेत दिया कि पार्टी का ध्यान राज्यसभा की तीन सीटों पर नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव पर है। उन्होंने कहा, “अब हमारा फोकस तीन पर नहीं, 403 पर है।”

अखिलेश यादव के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

37 वोट से जीतने के लिए जरूरी थी पहली वरीयता

यदि राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए चुनाव होता तो प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए पहली वरीयता के कम से कम 37 मतों की आवश्यकता होती। उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या और राज्यसभा चुनाव की गणित को देखते हुए 10वीं सीट पर मुकाबले की स्थिति बन सकती थी।

यही वजह थी कि तीसरे उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं। लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने और सपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के बाद अब चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया है।

अब बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवार ही मैदान में हैं। यानी जितनी सीटें हैं, उतने ही वैध उम्मीदवार बचे हैं।

16 अक्टूबर को मतदान की जरूरत नहीं

राज्यसभा चुनाव के कार्यक्रम के मुताबिक 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित था। लेकिन यदि 9 अक्टूबर तक किसी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया तो मतदान की जरूरत नहीं होगी।

निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति में सभी 10 उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में जाने वाले नए सदस्यों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

हालांकि, चुनावी प्रक्रिया के नियमों के तहत नामांकन वापसी की अंतिम तारीख तक स्थिति पर नजर बनी रहेगी। यदि कोई उम्मीदवार पर्चा वापस लेता है तो समीकरण बदल सकते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में सभी 10 उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

25 नवंबर को खत्म हो रहा है कार्यकाल

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इन्हीं रिक्त होने वाली सीटों को भरने के लिए द्विवार्षिक चुनाव कराया जा रहा है।

राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। इसलिए यहां होने वाले राज्यसभा चुनाव का राष्ट्रीय राजनीति में भी विशेष महत्व रहता है।

इस बार भी चुनाव के जरिए बीजेपी और सपा दोनों के लिए अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने का अवसर था। बीजेपी ने जहां नए चेहरों और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर जोर दिया, वहीं सपा ने अपने दो उम्मीदवारों के जरिए अपनी सीटों को बरकरार रखने की रणनीति अपनाई।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम राजनीतिक संदेश

राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। बीजेपी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों से नेताओं को उम्मीदवार बनाकर व्यापक प्रतिनिधित्व का संदेश देने की कोशिश की है।

वहीं, सपा ने तीसरी सीट के लिए मुकाबले में उतरने के बजाय विधानसभा चुनाव पर अपना फोकस रखने का संकेत दिया है। अखिलेश यादव का “तीन नहीं, 403” वाला बयान इसी रणनीति की ओर इशारा करता है।

फिलहाल नामांकन पत्रों की जांच के बाद तस्वीर लगभग साफ है। 10 सीटों के लिए 10 वैध उम्मीदवार बचे हैं। यदि 9 अक्टूबर तक कोई नामांकन वापस नहीं लिया जाता है तो बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा पहुंच जाएंगे और 16 अक्टूबर का प्रस्तावित मतदान नहीं होगा।