उरई में सजेगा पहलवानों का महादंगल, छह-सात राज्यों के नामी पहलवान दिखाएंगे दांव-पेच; समापन पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह होंगे मुख्य अतिथि

उरई में 22-23 सितंबर को स्वर्गीय महेश प्रसाद अवस्थी की स्मृति में दो दिवसीय दंगल होगा। छह-सात राज्यों के नामी पहलवान अखाड़े में उतरेंगे, पहले दिन डीएम-एसपी और समापन पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी रहेगी।

उरई में सजेगा पहलवानों का महादंगल, छह-सात राज्यों के नामी पहलवान दिखाएंगे दांव-पेच; समापन पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह होंगे मुख्य अतिथि

पांच दशक पुरानी दंगल परंपरा में इस बार भी देशभर के पहलवान दिखाएंगे दमखम, 22 सितंबर को डीएम-एसपी और 23 को जलशक्ति मंत्री करेंगे शिरकत

स्वर्गीय महेश प्रसाद अवस्थी की स्मृति में पांच दशक से जारी परंपरा, दो दिन तक अखाड़े में होगी जोरदार कुश्ती

उरई। बुंदेलखंड की पारंपरिक खेल संस्कृति और कुश्ती के शौकीनों के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह खास रहने वाला है। उरई में एक बार फिर अखाड़ा सजेगा और देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे नामी पहलवान अपनी ताकत, तकनीक और दांव-पेच का प्रदर्शन करेंगे। स्वर्गीय महेश प्रसाद अवस्थी की स्मृति में जय महावीर समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय दंगल का आयोजन 22 और 23 सितंबर को किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और समिति के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की रूपरेखा तथा अतिथियों की जानकारी साझा की है।

करीब पांच दशक से लगातार आयोजित हो रहा यह दंगल अब उरई की पहचान से जुड़ चुका है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हर बार अलग-अलग राज्यों के पहलवान अखाड़े में उतरते हैं और दर्शकों को रोमांचक कुश्तियां देखने को मिलती हैं। इस बार भी देश के करीब छह से सात राज्यों से पहलवानों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में स्थानीय दर्शकों के साथ कुश्ती प्रेमियों की भी बड़ी भीड़ जुटने की संभावना है।

22 सितंबर को अखाड़े में उतरेंगे बाहरी राज्यों के पहलवान

दंगल का पहला दिन मंगलवार, 22 सितंबर को होगा। आयोजन के दौरान विभिन्न राज्यों से आने वाले पहलवान एक-दूसरे को चुनौती देंगे। अखाड़े में पहलवानों के बीच मुकाबले होंगे और दर्शकों को कुश्ती के पारंपरिक दांव-पेच देखने का अवसर मिलेगा।

आयोजकों के अनुसार, इस दंगल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सिर्फ स्थानीय स्तर के पहलवान ही हिस्सा नहीं लेते, बल्कि देश के कई राज्यों से पहलवान यहां पहुंचते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की कुश्ती शैली और तकनीक के कारण मुकाबलों में खास रोमांच देखने को मिलता है।

दंगल से जुड़े आयोजकों का कहना है कि वर्षों से इस आयोजन को जिस उत्साह के साथ आयोजित किया जाता रहा है, उसी परंपरा को इस वर्ष भी कायम रखने की तैयारी है। पहलवानों के बीच होने वाले मुकाबले दर्शकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगे।

डीएम समीर और एसपी विनय कुमार सिंह होंगे विशिष्ट अतिथि

पहले दिन के कार्यक्रम में जालौन के जिलाधिकारी समीर और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में दंगल के पहले दिन के कार्यक्रम की शुरुआत और आयोजन प्रस्तावित है।

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से आयोजन को लेकर आयोजकों में भी उत्साह है। दंगल के दौरान अखाड़े में होने वाले मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा के कारण दंगल सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए यह सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन का रूप भी ले चुका है। हर वर्ष लोग इसका इंतजार करते हैं और दूर-दराज से आने वाले पहलवानों के मुकाबले देखने के लिए अखाड़े में पहुंचते हैं।

23 सितंबर को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह करेंगे समापन

दंगल का दूसरा और अंतिम दिन बुधवार, 23 सितंबर को होगा। इस दिन मुकाबले जारी रहने के साथ आयोजन का समापन किया जाएगा। समापन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

आयोजकों के मुताबिक, दो दिवसीय कार्यक्रम में पहले दिन प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी, जबकि दूसरे दिन प्रदेश सरकार के मंत्री की सहभागिता निर्धारित की गई है। उनके मुख्य आतिथ्य में दंगल के समापन कार्यक्रम को आयोजित किया जाएगा।

समिति पदाधिकारियों का कहना है कि दोनों दिनों में पहलवानों के बीच कई मुकाबले होंगे। अखाड़े में उतरने वाले पहलवान अपने अनुभव और कुश्ती कौशल के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। आयोजकों की कोशिश है कि इस वर्ष भी दंगल को उसी भव्यता और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाए, जिसके लिए यह आयोजन लंबे समय से जाना जाता है।

पांच दशक से निभाई जा रही परंपरा

स्वर्गीय महेश प्रसाद अवस्थी की स्मृति में आयोजित होने वाला यह दंगल करीब 50 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। इतने लंबे समय तक किसी खेल आयोजन की परंपरा का जारी रहना अपने आप में खास माना जा रहा है।

जय महावीर समिति इस परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। वर्षों से पहलवानों की पीढ़ियां इस अखाड़े में अपने दांव-पेच आजमा चुकी हैं। आयोजन के जरिए कुश्ती जैसी पारंपरिक खेल विधा को बढ़ावा देने के साथ ही नई पीढ़ी को भी इस खेल से जोड़ने का प्रयास किया जाता रहा है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में कुश्ती का अपना अलग महत्व रहा है। गांव-कस्बों में अखाड़ों की परंपरा और पहलवानों के प्रति लोगों का आकर्षण आज भी दिखाई देता है। ऐसे में उरई का यह दंगल स्थानीय खेल संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

छह-सात राज्यों के पहलवानों के पहुंचने से बढ़ेगा मुकाबलों का रोमांच

समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, इस बार भी करीब छह से सात राज्यों के पहलवान दंगल में भाग लेंगे। अलग-अलग राज्यों से आने वाले पहलवानों के बीच होने वाले मुकाबले आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण होंगे।

दर्शकों को अखाड़े में पहलवानों की ताकत के साथ उनकी तकनीक और कुश्ती के पारंपरिक दांव-पेच देखने को मिलेंगे। मुकाबलों के दौरान माहौल रोमांच से भरने की उम्मीद है।

आयोजकों के अनुसार, दंगल का उद्देश्य सिर्फ प्रतियोगिता कराना नहीं बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाना भी है। इसी कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग आयोजन से जुड़ते हैं।

आयोजकों ने साझा की कार्यक्रम की जानकारी

दंगल के आयोजन और अतिथियों की जानकारी समिति के पदाधिकारियों ने साझा की। इस संबंध में सुधीर अवस्थी, सुशील अवस्थी, गिरीश अवस्थी, नीरज पाठक, प्रमोद त्रिपाठी, मनीष शर्मा, जितेंद्र त्रिपाठी, संजय व्यास और सभासद शैलेंद्र सोनी ने जानकारी दी।

पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन की तैयारियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार की जा रही हैं। दो दिनों तक चलने वाले दंगल में विभिन्न राज्यों के पहलवानों की भागीदारी रहेगी। पहले दिन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे, जबकि समापन अवसर पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्य अतिथि होंगे।

कुल मिलाकर, उरई में 22 और 23 सितंबर को होने वाला यह दंगल एक बार फिर अखाड़े में कुश्ती के रोमांच को जीवंत करेगा। पांच दशक पुरानी परंपरा, अलग-अलग राज्यों से आने वाले पहलवान और दो दिनों तक चलने वाले मुकाबले इसे क्षेत्र के प्रमुख पारंपरिक खेल आयोजनों में शामिल करते हैं। अब दर्शकों को इंतजार है कि अखाड़े में कौन-कौन से पहलवान उतरते हैं और किसके दांव-पेच से मुकाबले का रुख बदलता है।