जिस न्यायालय में मामला लंबित, उसी न्यायालय के आदेश पर चला बुलडोजर!अंतिम आदेश पारित किये बिना और बिना अपील के खजूरी कला में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया को लेकर उठे गंभीर सवाल
भोपाल के खजूरी कला में धारा 250 का भूमि विवादित प्रकरण न्यायालय में लंबित होने और साक्ष्य के प्रतिपरीक्षण की प्रक्रिया बाकी होने के बावजूद 9 सितंबर को प्रशासन ने बुलडोजर से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। कार्रवाई उसी न्यायालय के आदेश के आधार पर हुई, जबकि अंतिम आदेश और अपील की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले की पूरी वैधानिक स्थिति संबंधित न्यायालय ही तय करेगा।
अंतिम आदेश से पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
धारा 250 का प्रकरण लंबित, साक्ष्य का प्रतिपरीक्षण बाकी
न्यायालयीन कार्यवाही जारी रहने के दौरान 9 सितंबर को मौके पर पहुंचा बुलडोजर
कार्रवाई से पहले पुलिस बल और नगर निगम संसाधनों की मांगी गई थी व्यवस्थाभोपाल। एम.पी. नगर तहसील क्षेत्र के ग्राम खजूरी कला में भूमि विवाद ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। जिस मामले को लेकर न्यायालय में कार्यवाही लंबित है, उसी प्रकरण में संबंधित न्यायालय के आदेश के आधार पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर दी। मामले की खास बात यह बताई जा रही है कि कार्रवाई के समय न तो कोई अंतिम आदेश था और न ही आदेश के खिलाफ कोई अपील लंबित थी।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, विवादित भूमि खसरा नंबर 177/23 से संबंधित है। राजीव अग्रवाल के विरुद्ध कथित अतिक्रमण हटाने का आदेश पूर्व में पारित किया गया था। वहीं इसी प्रकरण को लेकर न्यायालय में कार्यवाही लंबित होने का उल्लेख आवेदक पक्ष ने अपने आवेदन में किया है।
साक्ष्य का प्रतिपरीक्षण बाकी, फिर भी हुई कार्रवाई
आवेदक पक्ष ने न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन में कहा था कि मामला धारा 250 के अंतर्गत लंबित है। उसकी साक्ष्य हो चुकी है, लेकिन साक्ष्य का प्रतिपरीक्षण किया जाना बाकी है। आवेदन में प्रकरण के लंबित रहने तक विवादित संपत्ति से बेदखली की कार्रवाई रोकने का अनुरोध भी किया गया था।
इसके बावजूद, अब उसी न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाई और 9 सितंबर को मौके पर बुलडोजर पहुंचाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर दी।
पहले से प्रशासन ने कर रखी थी पूरी तैयारी
कार्रवाई से पहले तहसीलदार नजूल वृत्त एम.पी. नगर की ओर से थाना प्रभारी अवधपुरी को पत्र भेजकर पुलिस बल एवं महिला पुलिस बल उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। नगर निगम की अतिक्रमण शाखा से भी कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने को कहा गया था।
दस्तावेजों में ग्राम खजूरी कला की एक अन्य भूमि पर 25×35 यानी 875 वर्गफीट क्षेत्र में किए गए कथित अतिक्रमण को हटाने के आदेश का भी उल्लेख है।
सबसे बड़ा सवाल: लंबित मामले में आदेश और कार्रवाई की स्थिति क्या?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस न्यायालय में मामला लंबित था, उसी न्यायालय के आदेश से कार्रवाई हुई। आवेदक पक्ष के अनुसार कार्रवाई पर कोई अंतरिम रोक नहीं थी और आदेश के विरुद्ध कोई अपील भी लंबित नहीं थी।
ऐसे में अब सवाल यह है कि लंबित न्यायालयीन कार्यवाही, साक्ष्य के प्रतिपरीक्षण और बेदखली की कार्रवाई—इन तीनों की कानूनी स्थिति क्या है? यही मुद्दा अब पूरे मामले का केंद्र बन गया है।
उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रशासन की कार्रवाई को सीधे तौर पर अवैध कहना उचित नहीं होगा। अंतिम वैधानिक स्थिति संबंधित न्यायालय ही तय कर सकता है। लेकिन यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यायालयीन प्रक्रिया जारी रहने के दौरान उसी न्यायालय के आदेश पर मौके पर बुलडोजर कार्रवाई हो चुकी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस